लखनऊ अलीगंज अग्निकांड में सनसनीखेज खुलासा: बिजली विभाग की NOC निकली पूरी तरह फर्जी, बिल्डिंग मालिक के खिलाफ एक और FIR दर्ज

लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज इलाके में हुए भीषण अग्निकांड के मामले में जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे चौंकाने वाले और बड़े खुलासे हो रहे हैं। पुलिस और प्रशासनिक जांच में यह सनसनीखेज बात सामने आई है कि जिस बहुमंजिला बिल्डिंग में आग लगी थी, उसका कमर्शियल बिजली कनेक्शन पूरी तरह से फर्जी अनापत्ति प्रमाणपत्र (NOC) के आधार पर लिया गया था। इस गंभीर फर्जीवाड़े के सामने आने के बाद बिजली सुरक्षा निदेशालय की तहरीर पर अलीगंज थाने में बिल्डिंग मालिक के खिलाफ एक और एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली गई है।

जांच में खुले जालसाजी के पन्ने, डिस्पैच नंबर से लेकर साइन तक सब फर्जी

बिजली सुरक्षा निदेशालय ने अग्निकांड के बाद जब संबंधित इमारत के तकनीकी और सुरक्षा दस्तावेजों को खंगाला, तो अधिकारियों के होश उड़ गए। निदेशालय की आंतरिक जांच रिपोर्ट में निम्नलिखित बड़ी कमियां और जालसाजी पाई गई:

  • दस्तावेज का फर्जीवाड़ा: बिल्डिंग के बिजली कनेक्शन के लिए 24 जून 2016 को जारी की गई एनओसी (NOC) पूरी तरह जाली है।

  • रिकॉर्ड में मिसमैच: एनओसी पर जो डिस्पैच नंबर (प्रेषण संख्या) दर्ज है, वह बिजली विभाग के आधिकारिक सरकारी रिकॉर्ड या कार्यालय रजिस्टर से बिल्कुल भी मेल नहीं खाता है।

  • फर्जी हस्ताक्षर: जांच में पाया गया कि दस्तावेज पर तत्कालीन सहायक निदेशक के जो हस्ताक्षर (Sign) हैं, वे पूरी तरह फर्जी और स्कैन किए हुए हैं।

  • बनावट में अंतर: असली सरकारी दस्तावेजों के मुकाबले इस फर्जी एनओसी का फॉन्ट, लिखने का तरीका (लिखावट) और पेपर का डिजाइन भी बिल्कुल अलग पाया गया है।

फर्जी एनओसी के दम पर लिया बिजली का भारी-भरकम लोड

आरोप है कि बिल्डिंग मालिक ने सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर और अधिकारियों की आंखों में धूल झोंककर इसी फर्जी दस्तावेज के जरिए विभाग से बिजली का कनेक्शन हासिल कर लिया था। अलीगंज में हुए भीषण अग्निकांड के बाद जब आग लगने के कारणों (जैसे शॉर्ट सर्किट) की पड़ताल शुरू हुई, तब जाकर परतों के पीछे छिपा यह पूरा संगठित फर्जीवाड़ा उजागर हुआ।

विभागीय मिलीभगत के एंगल पर भी घूम रही जांच की सुई

बिजली सुरक्षा निदेशालय की लिखित शिकायत और तहरीर पर अलीगंज थाना पुलिस ने धोखाधड़ी, कूटरचित दस्तावेज तैयार करने (Forged Documents) और सरकारी नियमों के उल्लंघन की संगीन धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया है।

पुलिस अब इस बिंदु पर भी गहराई से तफ्तीश कर रही है कि साल 2016 में इस फर्जी एनओसी को तैयार करने और बिना वेरिफिकेशन के बिजली कनेक्शन पास करने में विभाग के किन-किन अधिकारी या कर्मचारियों की मिलीभगत थी। अधिकारियों का साफ कहना है कि अग्निकांड में सुरक्षा मानकों की घोर अनदेखी और इस फर्जीवाड़े की भूमिका अब इस पूरे केस का सबसे अहम हिस्सा है, और इसमें शामिल किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

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