अयोध्या। अयोध्या के भव्य राम मंदिर में चढ़ावे और दानपेटी से हुई करोड़ों की कथित चोरी के मामले में स्पेशल इनवेस्टिगेशन टीम (SIT) की जांच में हर दिन नए और चौंकाने वाले खुलासे हो रहे हैं। जांच एजेंसियों के हाथ अब कुछ ऐसे दस्तावेज और सबूत लगे हैं, जो मंदिर प्रशासन से लेकर देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) तक की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं।
सूत्रों के मुताबिक, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट और एसबीआई के बीच दान की राशि की सुरक्षित गणना के लिए जो आधिकारिक समझौता (MoU) हुआ था, उसके नियमों की जमीन पर जमकर धज्जियां उड़ाई गईं। इसके साथ ही एसआईटी अब गिरफ्तार सभी 8 आरोपियों की चल-अचल संपत्ति को कुर्क करने और परिसर में तैनात रहे 400 प्राइवेट गार्ड्स की कुंडली खंगालने में जुट गई है।
MoU के नियमों की उड़ीं धज्जियां: न ड्रेस कोड का पालन हुआ, न अधिकारियों का रोटेशन
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, फरवरी 2025 में ट्रस्ट और एसबीआई के बीच दान-पात्रों से प्राप्त राशि की गिनती को पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए एक विस्तृत कार्यप्रणाली (SOP) तय की गई थी। इस समझौते के तहत दोनों पक्षों की जिम्मेदारियां अलग-अलग निर्धारित थीं, लेकिन एसआईटी जांच में सामने आया है कि इन प्रावधानों का नियमित रूप से पालन ही नहीं किया गया:
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संयुक्त उपस्थिति का नियम टूटा: समझौते के मुताबिक, दान-पात्रों को खोलने और ‘कैश काउंटिंग रूम’ (गिनती कक्ष) के संचालन के समय ट्रस्ट और बैंक दोनों के जिम्मेदार अधिकारियों की संयुक्त मौजूदगी अनिवार्य थी, जिसमें लापरवाही बरती गई।
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कर्मचारियों का रोटेशन नहीं हुआ: एमओयू में बैंक अधिकारियों और गणना करने वाले कर्मियों के लिए मासिक रोटेशन (हर महीने ट्रांसफर) का कड़ा प्रावधान था, ताकि कोई सांठगांठ न हो सके। इसके उलट, कुछ खास कर्मचारी लंबे समय तक एक ही सीट और व्यवस्था में जमे रहे।
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सुरक्षा जांच में घोर लापरवाही: गिनती कक्ष में आने-जाने वाले कर्मियों की नियमित व रैंडम फिजिकल तलाशी, प्रत्येक दान-पात्र की राशि का अलग-अलग रिकॉर्ड रखना और क्रमवार (सीरियल वाइज) गणना करने जैसी बेहद सुरक्षित व्यवस्थाएं सिर्फ कागजों तक ही सीमित रहीं।
फिलहाल पुलिस टीम दैनिक रिपोर्ट, जमा पर्चियों (डिपॉजिट स्लिप) और आंतरिक रजिस्टरों के सत्यापन के जरिए यह पता लगा रही है कि इस ढिलाई का फायदा उठाकर कब से और कितने बड़े पैमाने पर हेराफेरी की जा रही थी।
करोड़ों का आलीशान मकान और जेवरात; 3 साल की आर्थिक कुंडली खंगाल रही पुलिस
चढ़ावा चोरी के इस खेल से आरोपियों ने कितनी अकूत संपत्ति बनाई, अब पुलिस का पूरा फोकस इसी आर्थिक जांच (Financial Investigation) पर है। एसआईटी ने गिरफ्तार किए गए सभी 8 आरोपियों से पिछले तीन वर्षों में अर्जित की गई उनकी और उनके परिजनों की चल-अचल संपत्तियों का पूरा ब्योरा का रिकॉर्ड मांगा है।
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आरोपी लवकुश: जांच में पता चला है कि आरोपी लवकुश ने हाल ही में अपनी पत्नी के नाम पर कीमती जमीन खरीदी थी, जिस पर तीन मंजिला आलीशान मकान बनकर तैयार है। इस निर्माण पर करोड़ों रुपये खर्च होने का अनुमान है।
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आरोपी टिन्नू यादव और अनुकल्प: मुख्य सूत्रधार माने जा रहे टिन्नू यादव के बैंक खातों (Bank Details) को पूरी तरह खंगाला जा रहा है। उसके यहां से छापेमारी के दौरान कुछ आभूषण भी जब्त किए गए हैं। इसके साथ ही अनुकल्प की संपत्तियों की भी भौतिक जांच पुलिस टीम कर रही है।
जांच टीम सभी आरोपियों की वैध आय के स्रोतों और उनके द्वारा किए गए खर्च व निवेश का मिलान कर रही है ताकि कोर्ट में इसे पुख्ता सबूत के रूप में पेश किया जा सके।
400 प्राइवेट सुरक्षा कर्मी भी रडार पर, दलालों को छूट देने का आरोप
राम मंदिर परिसर की सुरक्षा में तैनात रहने वाले निजी सुरक्षा कर्मियों (प्राइवेट गार्ड्स) की भूमिका ने भी एसआईटी को चौंकाया है। सूत्रों के मुताबिक, करीब 400 निजी सुरक्षा कर्मी इस वक्त जांच के घेरे में हैं और उनकी ड्यूटी, कार्यप्रणाली व संदिग्ध गतिविधियों का रिकॉर्ड खंगाला जा रहा है।
जांच एजेंसियों का का मानना है कि मंदिर परिसर के प्रमुख प्रवेश-निकास द्वारों, दर्शन पथ और सबसे महत्वपूर्ण—चढ़ावे की राशि को काउंटिंग रूम तक ले जाने वाले रास्तों पर इन्हीं गार्ड्स की तैनाती होती थी। आरोप है कि चढ़ावा चोरी के आरोपियों के अलावा परिसर में सक्रिय कुछ दलाल इन्हीं सुरक्षाकर्मियों की ‘विशेष छूट’ और लापरवाही का फायदा उठाकर नियमों को ठेंगा दिखाते थे। एसआईटी अब इन सभी 400 गार्ड्स का ड्यूटी रोस्टर, उनका पुराना रिकॉर्ड, एंट्री-एग्जिट रजिस्टर और घटना के दिनों के सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) खंगाल रही है, ताकि यह साफ हो सके कि ड्यूटी के दौरान किस गार्ड ने जानबूझकर संदिग्धों को बिना चेकिंग के आने-जाने का रास्ता दिया।
चोरी के बाद बदला पूरा सिस्टम, अब 39 कर्मचारी संभाल रहे कमान
इतने बड़े घोटाले और 8 लोगों की जेल यात्रा के बाद आखिरकार ट्रस्ट और बैंक प्रशासन की नींद खुली है। राम मंदिर के भीतर दान गणना की पूरी व्यवस्था में कई बदलाव किए गए हैं। वर्तमान में बेहद कड़े पहरे और नई गाइडलाइंस के बीच 39 कर्मचारियों को नोटों की गिनती के काम में लगाया गया है।
आपको बता दें कि इस घोटाले के सामने आने से ठीक पहले गणना कक्ष में 45 कर्मी कार्यरत थे, जबकि शुरुआत में बेहद कम यानी सिर्फ 22 कर्मियों के भरोसे इतनी बड़ी राशि की गणना की जा रही थी। नए सिस्टम में सुरक्षा और पारदर्शिता को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है।














