राम मंदिर ट्रस्ट की बैठक में बड़ा फैसला: चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर, विहिप के बजरंग बागड़ा बन सकते हैं नए महासचिव

अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी और वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोपों के बीच आज ‘श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ की महाबैठक में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया गया है। चौतरफा दबाव और विवादों के बीच घिरे ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा का इस्तीफा सर्वसम्मति से मंजूर कर लिया गया है। राम मंदिर के चढ़ावे में कथित हेराफेरी का मामला सामने आने के बाद से ही महासचिव चंपत राय पर लगातार सवाल उठाए जा रहे थे, जिसके बाद उन्होंने अपना पद छोड़ने की पेशकश की थी। अब चंपत राय ट्रस्ट के महासचिव पद पर नहीं रहेंगे; हालांकि नियमों के अनुसार वह एक साधारण सदस्य बने रहेंगे, लेकिन उनके पास अब कोई महत्वपूर्ण प्रशासनिक अधिकार या जानकारी नहीं होगी।

बंद कमरे में हुई महाबैठक, चंपत और अनिल मिश्रा ने बनाई दूरी

आज दोपहर ठीक तीन बजे ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में यह अहम बैठक शुरू हुई। सूत्रों के मुताबिक, एक तरफ जहां परिसर के भीतर भूचाल लाने वाले फैसले लिए जा रहे थे, वहीं दूसरी तरफ चंपत राय और अनिल मिश्रा एक साथ मौजूद होने के बावजूद इस बैठक में शामिल नहीं हुए। बैठक की शुरुआत में ही अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास ने इस पूरे घटनाक्रम और विवाद पर गहरा खेद व्यक्त किया। इसके बाद कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने मीटिंग का मुख्य एजेंडा सामने रखते हुए दोनों वरिष्ठ पदाधिकारियों के इस्तीफे पर विचार करने का प्रस्ताव रखा।

‘हमसे बहुत बड़ी गलती हो गई…’ संतों ने जताई गहरी नाराजगी

ट्रस्ट की बैठक में शामिल साधु-संतों ने इस पूरे कांड को लेकर भारी नाराजगी और चिंता व्यक्त की। संतों ने दो टूक कहा कि इस विवाद की वजह से देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों की आस्था पर गहरा आघात लगा है और सवाल खड़े हुए हैं। कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने भी भावुक होते हुए स्वीकार किया कि व्यवस्था में बहुत बड़ी गलती हो गई है। कुछ जगहों पर गंभीर खामियां थीं, जिन पर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया, जिससे राम भक्तों की भावनाएं आहत हुईं। वहीं ट्रस्टी स्वामी परमानंद गिरी ने कहा कि धर्म की रक्षा करना हम सभी का पहला कर्तव्य है। जब लोग इतनी अटूट आस्था के साथ जुड़ते हैं, तो छोटी से छोटी बात का भी विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।

‘विश्वास जीतने के लिए बदलाव जरूरी’, जानिए क्यों दर्ज हुई FIR

बैठक के दौरान ट्रस्ट के सदस्य कृष्ण मोहन ने अचानक दर्ज कराई गई एफआईआर (FIR) के पीछे की असल वजह का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि शुरुआती जांच में ही बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितताएं और गड़बड़ी सामने आई थीं, जिसके बाद प्रथम दृष्टया मिले पुख्ता तथ्यों के आधार पर ही कानूनी कार्रवाई का कड़ा निर्णय लिया गया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने और जनता का खोया हुआ भरोसा वापस जीतने के लिए यह कदम उठाना और ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था में बदलाव करना बेहद जरूरी हो गया था।

गोपाल राव को मीटिंग से किया गया बाहर, ये चेहरे संभाल सकते हैं कमान

इस हाई-प्रोफाइल बैठक में उस वक्त बेहद असहज स्थिति पैदा हो गई जब विशेष आमंत्रित सदस्य गोपाल राव मीटिंग में शामिल होने पहुंचे, लेकिन ट्रस्ट के अन्य सदस्यों ने ‘ट्रस्टी न होने’ का तकनीकी हवाला देकर उन्हें बैठक से बाहर का रास्ता दिखा दिया। इस बीच, ट्रस्ट से जुड़े उच्च पदस्थ सूत्रों का कहना है कि चंपत राय की जगह अब विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कद्दावर नेता बजरंग बागड़ा को नया महासचिव बनाया जा सकता है। वहीं, अनिल मिश्रा की जगह नीरज दौनेरिया को नया ट्रस्टी नियुक्त किए जाने की प्रबल संभावना है। बताया जा रहा है कि शाम करीब 5:30 बजे तक ट्रस्ट इस पूरे मामले पर अपना आधिकारिक बयान (स्टेटमेंट) जारी कर सकता है।

 

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