लखनऊ की ‘सबमिट बिल्डिंग’ में 200 करोड़ का महाघोटाला: फर्राटेदार अंग्रेजी बोलने वाली नॉर्थ-ईस्ट की लड़कियां बिछाती थीं जाल; विदेशी नागरिकों को ऐसे बनाया शिकार

 लखनऊ उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के सबसे पॉश और वीआईपी इलाके में स्थित ‘सबमिट बिल्डिंग’ (Summit Building) से अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध का एक ऐसा खौफनाक और चौंकाने वाला सच सामने आया है, जिसने देश से लेकर विदेश तक की जांच एजेंसियों को हिलाकर रख दिया है। इस आलीशान बिल्डिंग के 11वें माले से एक फर्जी इंटरनेशनल कॉल सेंटर चलाया जा रहा था, जिसके जरिए अब तक 200 करोड़ रुपये से अधिक की डिजिटल डकैती को अंजाम दिया जा चुका है। इस हाईटेक गैंग का सबसे हैरान करने वाला पहलू यह है कि यहां काम करने वाली लड़कियां फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर सात समंदर पार बैठे अमेरिकी नागरिकों को अपनी बातों के जाल में फंसाती थीं।

शाम 7 बजते ही एक्टिव होते थे 119 शिकारी, सुबह 3 बजे तक लूटते थे विदेशी

लखनऊ के पुलिस कमिश्नर अमरेंद्र सिंह सेंगर ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा एक्शन बताया है। पुलिस की रेड के दौरान कॉल सेंटर से 119 युवक-युवतियों को रंगे हाथों गिरफ्तार किया गया। ये शातिर अपराधी भारतीय समय के अनुसार हर दिन शाम को 7 बजे एक्टिव होते थे (जब अमेरिका में सुबह होती थी) और सुबह के 3 बजे तक अमेरिकी नागरिकों को इन्वेस्टमेंट और टेक्निकल सपोर्ट के नाम पर लूटते थे। पकड़े गए शातिरों में देश के अलग-अलग राज्यों जैसे गुजरात, महाराष्ट्र, झारखंड, उत्तराखंड, राजस्थान और दिल्ली के मास्टरमाइंड भी शामिल हैं।

मात्र 25,000 की सैलरी और 10% कमीशन के लालच में बनीं ‘साइबर ठग’

ज्वाइंट पुलिस कमिश्नर बबलू कुमार के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए 119 लोगों में से 40 लड़कियां हैं, जो मूल रूप से भारत के नॉर्थ-ईस्ट (पूर्वोत्तर) राज्यों की रहने वाली हैं। ये सभी लड़कियां बेहद पढ़ी-लिखी हैं और इनकी अंग्रेजी पर जबरदस्त पकड़ है। इन्हें महज 25,000 रुपये प्रति माह की फिक्स सैलरी पर रखा गया था। पूछताछ में लड़कियों ने कुबूल किया कि उन्हें अच्छी तरह पता था कि वे ठगी के धंधे में हैं, लेकिन हर महीने मिलने वाले तगड़े टारगेट और ठगी गई रकम पर मिलने वाले 10% के भारी-भरकम इंसेंटिव (कमीशन) के लालच में वे लंबे समय से इस काले कारोबार का हिस्सा बनी हुई थीं।

Amazon, Apple और FBI के नाम पर अमेरिकी नागरिकों में पैदा करते थे खौफ

इस इंटरनेशनल रैकेट का पर्दाफाश तब हुआ जब अमेरिकी जांच एजेंसियों और नागरिकों की तरफ से भारत सरकार को शिकायतें मिलीं। ये ठग खुद को Amazon, Microsoft, Apple, PayPal, Netflix और Facebook जैसी दिग्गज ग्लोबल कंपनियों के कस्टमर केयर और टेक्निकल सपोर्ट अधिकारी बताते थे। एक बार जब अमेरिकी नागरिक इनके झांसे में आ जाता था, तो ये खुद को अमेरिकी खुफिया एजेंसी FBI, FTC या अन्य सरकारी अधिकारी बताकर उसे ‘डिजिटल अरेस्ट’ और कानूनी कार्रवाई का डर दिखाने लगते थे। केस रफा-दफा करने के नाम पर वे पीड़ितों से डॉलर वसूलते थे।

गिफ्ट कार्ड और क्रिप्टोकरेंसी में लेते थे पेमेंट, ऑफिस का खर्च था 3 करोड़ महीना

पुलिस को छापेमारी के दौरान मौके से हाईटेक VoIP कॉलिंग सिस्टम, Eyebeam Dialer, अमेरिकी नागरिकों का डेटाबेस, कॉलिंग स्क्रिप्ट और भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज बरामद हुए हैं। इस गिरोह ने पैसों की ट्रैकिंग से बचने के लिए एक फुलप्रूफ सिस्टम बना रखा था। ये ठगी की रकम सीधे बैंक खातों में मंगाने के बजाय गिफ्ट कार्ड, क्रिप्टोकरेंसी (Cryptocurrency) और डिजिटल वाउचर के जरिए लेते थे, ताकि मनी ट्रेल का पता न लगाया जा सके। गिरफ्तार ठगों ने बताया कि सबमिट बिल्डिंग के 11वें फ्लोर पर दो बड़े ऑफिस स्पेस का हर महीने का कुल खर्च (किराया, बिजली, सेटअप) करीब 3 करोड़ रुपये आता था, जिससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता है कि यह गिरोह हर महीने कितने बड़े पैमाने पर अरबों रुपये की ठगी कर रहा था। फिलहाल साइबर क्राइम थाने में BNS (भारतीय न्याय संहिता), आईटी एक्ट और टेलीकॉम एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।

 

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