नई दिल्ली। शिक्षा व्यवस्था में सुधार और अपनी प्रमुख मांगों को लेकर पिछले 26 दिनों से अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक ने अपना उपवास जरूर तोड़ दिया है, लेकिन उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि उनका केवल अनशन समाप्त हुआ है, आंदोलन नहीं। राष्ट्रीय राजधानी के ऐतिहासिक जंतर-मंतर पर विभिन्न छात्र और सामाजिक संगठनों का धरना-प्रदर्शन अनवरत जारी रहेगा। प्रदर्शनकारी केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और उनका कहना है कि जब तक सरकार सभी मांगें पूरी नहीं करती, तब तक विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा।
‘शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा आंदोलन’
सोनम वांगचुक ने अपने संबोधन में कहा कि देश में किसी भी प्रकार की हिंसा की आशंका को टालने और केंद्र सरकार के साथ हुई बहुस्तरीय वार्ता के बाद उन्होंने भूख हड़ताल समाप्त करने का फैसला लिया है। उन्होंने देश के युवाओं और अपने समर्थकों से भावुक अपील करते हुए कहा कि आंदोलन को किसी भी सूरत में भटकने न दें। उन्होंने सभी से पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और लोकतांत्रिक दायरे में रहकर अपनी मांगों के लिए आवाज बुलंद करते रहने का आह्वान किया।
मेदांता अस्पताल में केंद्रीय मंत्रियों ने कराया जलपान
भूख हड़ताल समाप्त होने से पहले केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा और केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल पहुंचकर सोनम वांगचुक का हालचाल जाना। डॉक्टरों की देखरेख में इलाज करा रहे वांगचुक के बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए दोनों केंद्रीय मंत्रियों ने उनसे उपवास खत्म करने का आग्रह किया और उन्हें जूस व सूप पिलाकर अनशन समाप्त कराया। इसके बावजूद जंतर-मंतर पर डटे आंदोलनकारी संगठनों ने साफ किया है कि वे जंतर-मंतर से पीछे नहीं हटेंगे।
CJP प्रमुख अभिजीत दीपके के आग्रह पर लिया फैसला
गौरतलब है कि इस व्यापक आंदोलन का बिगुल CJP के प्रमुख अभिजीत दीपके ने फूंका था, जिनके आह्वान पर सोनम वांगचुक ने सबसे पहले अपना समर्थन देते हुए 28 जून से भूख हड़ताल शुरू की थी। लगातार 26 दिनों तक चले उपवास के कारण जब वांगचुक का स्वास्थ्य बेहद नाजुक स्थिति में पहुंच गया, तो अभिजीत दीपके ने खुद उनसे अनशन समाप्त करने का विशेष अनुरोध किया था। आंदोलन से जुड़े नेताओं का कहना है कि वांगचुक की भूख हड़ताल का चरण पूरा हो गया है, लेकिन जंतर-मंतर पर सत्याग्रह तब तक जारी रहेगा जब तक कि शिक्षा मंत्रालय से जुड़ी उनकी मांगें पूरी नहीं हो जातीं।











