प्रयागराज। सोशल मीडिया के इस दौर में कभी-कभी एक तस्वीर बिना पूरी सच्चाई के वायरल हो जाती है और लोग अपने-अपने हिसाब से कयास लगाने लगते हैं। ऐसा ही कुछ इस समय समाजवादी पार्टी के मुखिया और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और वयोवृद्ध नेता कुंवर रेवती रमण सिंह की एक मुलाकात को लेकर हो रहा है। सोशल मीडिया पर दोनों नेताओं की एक तस्वीर जमकर वायरल है, जिसमें रेवती रमण सिंह अखिलेश यादव के सामने एक स्टूल (ऊंची टेबल) पर अपने दोनों पैर रखकर बातचीत करते नजर आ रहे हैं। इस तस्वीर को लेकर कुछ लोग इसे राजनीतिक शिष्टाचार और अपमान से जोड़कर तरह-तरह की कयासबाजी कर रहे हैं। लेकिन, जब इस तस्वीर के पीछे का असली सच सामने आया, तो आलोचकों की बोलती बंद हो गई।

राजनीति नहीं, गंभीर मेडिकल कंडीशन है स्टूल पर पैर रखने की वजह
वायरल हो रही इस तस्वीर की असल सच्चाई किसी राजनीतिक अहंकार या अपमान से नहीं, बल्कि पूरी तरह से बुजुर्ग नेता के स्वास्थ्य और मेडिकल कंडीशन से जुड़ी हुई है। दरअसल, 80 वर्ष से अधिक आयु के कुंवर रेवती रमण सिंह लंबे समय से पैरों की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। बढ़ती उम्र के कारण होने वाली इस शारीरिक दिक्कत की वजह से वे अपने पैरों को ज्यादा देर तक जमीन पर सीधा या नीचे लटकाकर नहीं रख सकते। डॉक्टरों की सख्त सलाह पर वे जब भी कहीं बैठते हैं, तो पैरों को आराम देने के लिए सामने स्टूल या किसी ऊंची जगह पर टिका कर रखते हैं। अखिलेश यादव खुद प्रयागराज में उनके अशोक नगर कोठी स्थित आवास पर उनका हाल-चाल लेने और आगामी यूपी विधानसभा चुनाव की रणनीति पर चर्चा करने पहुंचे थे।

कौन हैं कुंवर रेवती रमण सिंह? जिन्होंने मुरली मनोहर जोशी को चटाई थी धूल
कुंवर रेवती रमण सिंह का नाम उत्तर प्रदेश और विशेष रूप से प्रयागराज (इलाहाबाद) बेल्ट के सबसे कद्दावर और सम्मानित राजनेताओं में गिना जाता है। उनका राजनीतिक सफर बेहद शानदार रहा है। वे 8 बार विधायक, 2 बार लोकसभा सांसद और 1 बार राज्यसभा सांसद रह चुके हैं। उनकी सबसे बड़ी राजनीतिक जीतों में से एक साल 2004 का लोकसभा चुनाव था, जब उन्होंने बीजेपी के राष्ट्रीय स्तर के सबसे दिग्गज नेता डॉ. मुरली मनोहर जोशी को इलाहाबाद संसदीय सीट पर शिकस्त देकर सबको चौंका दिया था। वर्तमान में उनके बेटे उज्जवल रमण सिंह इलाहाबाद संसदीय सीट से कांग्रेस के टिकट पर सांसद हैं।

मुलायम सिंह यादव के ‘जय-वीरू’ जैसा था रेवती रमण का रिश्ता
कुंवर रेवती रमण सिंह का समाजवादी पार्टी और नेताजी मुलायम सिंह यादव के साथ नाता दशकों पुराना और बेहद अटूट रहा है। रेवती रमण सिंह उन चुनिंदा जमीनी नेताओं में शामिल रहे हैं, जिन्होंने मुलायम सिंह यादव के साथ कंधे से कंधा मिलाकर समाजवादी पार्टी की नींव रखी थी। वे पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक हैं और नेताजी के सबसे भरोसेमंद और घनिष्ठ राजनीतिक मित्रों में गिने जाते थे। जब-जब उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव के नेतृत्व में सरकार बनी, तब-तब रेवती रमण सिंह ने सरकार में बेहद महत्वपूर्ण और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री की जिम्मेदारी संभाली।
नाराजगी के बाद भी क्यों अखिलेश यादव करते हैं बेहद सम्मान?
अखिलेश यादव और सिंह परिवार के रिश्तों में कुछ समय पहले उतार-चढ़ाव भी देखने को मिला था। साल 2022 में राज्यसभा का टिकट न मिलने और फिर 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान गठबंधन में इलाहाबाद सीट कांग्रेस के खाते में चले जाने को लेकर सिंह परिवार अखिलेश यादव की कार्यशैली से नाराज हो गया था। इसी नाराजगी के चलते रेवती रमण सिंह के बेटे उज्जवल रमण सिंह ने पाला बदला और कांग्रेस का दामन थाम लिया था। हालांकि, इस ऐतिहासिक और पारिवारिक पृष्ठभूमि को देखते हुए अखिलेश यादव आज भी बुजुर्ग नेता रेवती रमण सिंह का दिल से बेहद सम्मान करते हैं। यही वजह है कि सारे गिले-शिकवे भुलाकर अखिलेश खुद उनके घर पहुंचे, जहां बुजुर्ग नेता अपनी शारीरिक लाचारी और डॉक्टरों की सलाह के मुताबिक स्टूल पर पैर रखकर बेहद सहज भाव से बातचीत करते नजर आए।













