गुरुग्राम दिल्ली से सटे हाईटेक शहर गुरुग्राम (Gurugram) से एक ऐसा दिल दहला देने वाला और रोंगटे खड़े कर देने वाला मामला सामने आया है, जिसने मानवीय संवेदनाओं को झकझोर कर रख दिया है। यहां एक 35 वर्षीय शादीशुदा शख्स ने अपनी 23 साल की प्रेमिका के साथ मामूली कहासुनी के बाद उसे जिंदा जलाकर मौत के घाट उतार दिया। मृतका को इस बात की भनक लग चुकी थी कि उसका प्रेमी पहले से शादीशुदा है और उसे धोखे में रख रहा था। इसी झूठ का विरोध करने की कीमत मासूम युवती को अपनी जान देकर चुकानी पड़ी। मृतका के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी को दबोच लिया है।
सोना खरीदने की दुकान पर हुआ था पहला विवाद
पुलिस से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, इस खौफनाक वारदात की पटकथा बीती 18 जून को लिखी गई थी। गुरुग्राम के बसई गांव की रहने वाली 23 वर्षीय दिव्या कटारिया 18 जून को अपने प्रेमी सुनील कुमार उर्फ नोनी (35 वर्ष) की सोना खरीदने वाली दुकान पर गई थी। सुनील मूल रूप से हरियाणा के झज्जर जिले के गुभाना गांव का रहने वाला है। दिव्या को हाल ही में पता चला था कि सुनील पहले से शादीशुदा है और उसके बच्चे भी हैं। इसी बात को लेकर दोनों के बीच दुकान पर ही तीखी बहस शुरू हो गई। गुस्से में पागल हुए सुनील ने बहस के दौरान ही दुकान में दिव्या के ऊपर केरोसिन (मिट्टी का तेल) छिड़क दिया।
‘सेंट्रल पार्क’ के फ्लैट में सुलह की कोशिश और फिर खूनी अंजाम
दुकान पर हुए इस खतरनाक विवाद के बाद दोनों ने आपस में बातचीत करने और मामला सुलझाने के इरादे से सोहना रोड पर स्थित ‘सेंट्रल पार्क’ (Central Park) सोसाइटी में एक फ्लैट बुक किया। दोनों विवाद को खत्म करने के लिए उस फ्लैट में रात भर रुके। लेकिन 19 जून की सुबह दोनों के बीच एक बार फिर उसी बात को लेकर विवाद और ज्यादा बढ़ गया। गुस्से से तमतमाए सुनील कुमार ने माचिस जलाकर दिव्या को आग के हवाले कर दिया। जब दिव्या आग की लपटों से घिरकर तड़पने लगी, तो सुनील घबरा गया और पकड़े जाने के डर से वह खुद ही उसे गंभीर हालत में गुरुग्राम के आर्टेमिस हॉस्पिटल लेकर पहुंचा।
धमकी के खौफ से मां-बेटी ने साध ली थी चुप्पी, सफदरजंग में हुआ रेफर
19 जून को आर्टेमिस हॉस्पिटल प्रबंधन की ओर से पुलिस को गंभीर रूप से झुलसी युवती के आने की सूचना दी गई। शुरुआती इलाज के बाद दिव्या की नाजुक हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल (Safdarjung Hospital) के लिए रेफर कर दिया। जब गुरुग्राम पुलिस ने सफदरजंग अस्पताल जाकर दिव्या और उसकी मां के बयान लेने की कोशिश की, तो दोनों ने लिखित में दे दिया कि वे इस मामले में कोई कानूनी कार्रवाई नहीं चाहती हैं। पुलिस को शुरुआत में यह एक घरेलू हादसा लगा, लेकिन असल में इसके पीछे आरोपी सुनील की वह खौफनाक धमकी थी, जिसने मां-बेटी की जुबान पर ताला लगा दिया था।
रिश्तेदार के सामने तोड़ा दम, बयां की सुनील की पूरी दरिंदगी
अस्पताल के बर्न वार्ड में जिंदगी और मौत से जूझ रही दिव्या ने आखिरकार 22 जून को अस्पताल पहुंचे अपने एक रिश्तेदार विकास के सामने पूरी सच्चाई उगल दी। उसने तड़पते हुए बताया कि सुनील ने ही उसे जिंदा जलाया है और धमकी दी है कि अगर पुलिस के सामने मुंह खोला तो वह अस्पताल से छूटते ही उसकी मां और छोटी बहन की भी हत्या कर देगा। इसी खौफ की वजह से मां-बेटी चुप थीं। सफदरजंग अस्पताल में कई दिनों तक जंग लड़ने के बाद आखिरकार 27 जून को दिव्या ने दम तोड़ दिया। दिव्या की मौत के बाद रिश्तेदार विकास ने हिम्मत दिखाई और 30 जून को सेक्टर-9ए थाने में सुनील के खिलाफ हत्या की नामजद शिकायत दर्ज कराई।
आरोपी सुनील पुलिस की कस्टडी में, 2 दिन की रिमांड पर खंगाले जा रहे सबूत
विकास की लिखित शिकायत मिलते ही सेक्टर-9ए थाने की पुलिस टीम ने तत्परता दिखाते हुए मुख्य आरोपी सुनील कुमार उर्फ नोनी को उसके ठिकाने से धर दबोचा। पुलिस ने आरोपी को स्थानीय कोर्ट में पेश किया, जहां से उसे दो दिन की पुलिस कस्टडी रिमांड पर भेज दिया गया है। पुलिस अब रिमांड के दौरान सोहna रोड स्थित सेंट्रल पार्क फ्लैट और आरोपी की दुकान से फॉरेंसिक सबूत जुटा रही है। साथ ही पुलिस इस बात की भी गहनता से जांच कर रही है कि क्या इस खौफनाक वारदात को अंजाम देने या दिव्या को धमकी देने में सुनील के साथ कोई और भी शामिल था।















