
पर्यावरणविद ग्रेटा थनबर्ग इन दिनों चर्चा में हैं. चर्चा में इसलिए क्योंकि उन्होंने भारत में चल रहे किसान आंदोलन के समर्थन में ऐसा ट्वीट किया कि उन पर भारत सरकार के खिलाफ साजिश रचने का आरोप लगा है. अब दिल्ली पुलिस ने नफरत फैलाने के आरोप में उनके खिलाफ अलग-अलग धराओं में केस दर्ज किया है. ग्रेटा थनबर्ग दुनियाभर में जलवायु परिवर्तन को लेकर जागरुकता फैलाने के लिए जानी जाती हैं. इससे पहले ग्रेटा अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भी आलोचना कर चुकी है. तो अब हम आपको बताते हैं कि ग्रेटा थनबर्ग कौन हैं और दुनिया में क्यों है इतना नाम?
बता दें कि ग्रेटा थनबर्ग का जन्म 3 जनवरी 2003 में स्वीडन में हुआ था. उनके पिता स्वांते थनबर्ग अभिनेता हैं और मां मेलेना अर्नमैन ओपेरा सिंगर है. इनके दादा भी अभिनेता रह चुके हैं. 8 साल की उम्र में ग्रेटा ने जलवायु परिवर्तन के बारे में सुना और इसे लेकर उसने काम शुरू कर दिया. पहली बार वे इसी वजह से चर्चा में आई थी.
ग्रेटा थनबर्ग सितंबर 2019 में संयुक्त राष्ट्र में स्पीच दी थी. उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा,‘आपकी हिम्मत कैसे हुई? मुझे यहां नहीं होना चाहिए था बल्कि अभी स्कूल में होना चाहिए था. अपने खोखले शब्दों से आपने मेरा बचपन और मेरे सपने चुरा लिए हैं.’ ग्रेटा थनबर्ग को टाइम मैगजीन पर्सन ऑफ द ईयर भी घोषित कर चुकी है. अब ग्रेटा थनबर्ग का नाम नोबेल शांति पुरस्कार के लिए भी चल रहा है.
ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने 2019 में थनबर्ग की स्पीच को लेकर कहा कि वे ऑस्ट्रेलियाई बच्चों की ‘गैरजरूरी चिंता’ में डाल रहीं हैं. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भी उन पर निशाना साधा था. उन्होंने कहा था कि अगर बच्चे पर्यावरण के मुद्दों पर ध्यान दे रहे हैं, तो उनका समर्थन करना चाहिए, लेकिन अगर कोई बच्चों का इस्तेमाल निजी फायदे के लिए करें, तो उसकी निंदा होनी चाहिए. उनके अलावा ट्रंप और ब्राजील के राष्ट्रपति जैर बोलसोनारो ने भी उन्हें स्पीच के लिए घेरा था
पर्यावरण को बेहतर बनाने की दिशा में ग्रेटा की इस पहल से उसका यह विश्वास पक्का हो गया कि अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो बदलाव लाया जा सकता है. 2018 में 15 वर्ष की उम्र में ग्रेटा ने स्कूल से छुट्टी ली और स्वीडन की संसद के सामने प्रदर्शन किया. उसके हाथ में एक बड़ी सी तख्ती थी, जिस पर बड़े अक्षरों में ‘स्कूल स्ट्राइक फॉर क्लाइमेट’ लिखा था. देखते ही देखते उसके अभियान में हजारों लोग शामिल हो गए. स्कूलों के बच्चे पर्यावरण संरक्षण की इस मुहिम में ग्रेटा के साथ हो गए. उसके बोलने का लहजे और शब्दों के चयन ने उसे अन्तरराष्ट्रीय पर्यावरण कार्यकर्ता बना दिया.
दरअसल, ग्रेटा ने हाल ही में एक ट्वीट किया था, जिसमें कहा था कि सभी भारत के किसानों के प्रति एकजुट हैं. खास बात है कि इस दौरान एक दस्तावेज भी शेयर किया था. इसमें भारत सरकार पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर दबाव बनाने की योजना लिखी हुई थी. इस योजना को पांच स्तरों पर भी बांटा गया था. विवाद बढ़ने के बाद उन्होंने ट्वीट को डिलीट कर दिया था. थनबर्ग के इस ट्वीट का भारत में जमकर विरोध हुआ है.














