जोधपुर ओपन जेल में गूंजी शहनाई: हत्या के मामलों में उम्रकैद काट रहे दो कैदियों ने रचाई शादी, हाई कोर्ट के आदेश पर जेल प्रशासन बना बाराती

जोधपुर। राजस्थान के जोधपुर स्थित मंडोर ओपन जेल में प्रेम, पुनर्वसन और मानवीय संवेदनाओं की एक बेहद अनूठी और ऐतिहासिक मिसाल देखने को मिली है। हत्या के अलग-अलग मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे दो सजायाफ्ता कैदी— मूलाराम और सीमा— बाकायदा दूल्हा-दुल्हन के जोड़े में एक-दूसरे के परिणय सूत्र में बंध गए। दोनों ने हिंदू रीति-रिवाज से सात फेरे लेकर जीवन भर साथ निभाने का संकल्प लिया। राजस्थान हाई कोर्ट की मंजूरी और पैरोल मिलने के बाद आयोजित हुए इस सादगीपूर्ण विवाह में जेल प्रशासन के अधिकारी और पुलिसकर्मी खुद बाराती बने।

ओपन जेल में मुलाकात और प्यार, फिर पहुंचे हाई कोर्ट

नागौर निवासी मूलाराम को वर्ष 2017 के एक हत्या के मामले में अगस्त 2023 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। वहीं, मुंबई की रहने वाली सीमा को वर्ष 2016 में अपने पति की हत्या के जुर्म में 2019 में आजीवन कारावास की सजा मिली थी। जेल में अच्छे आचरण के चलते राजस्थान हाई कोर्ट ने दोनों को मंडोर की खुली जेल (ओपन जेल) में स्थानांतरित कर दिया था। करीब डेढ़ साल पहले ओपन जेल में रहने के दौरान दोनों एक-दूसरे के संपर्क में आए और जीवन साथ बिताने का फैसला किया। इसके बाद विवाह की अनुमति के लिए दोनों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था।

हाई कोर्ट ने दिया ऐतिहासिक आदेश, मिला पैरोल

राजस्थान हाई कोर्ट के न्यायाधीश पुष्पेंद्र सिंह भाटी और न्यायाधीश प्रवीर भटनागर की खंडपीठ ने बंदियों के पुनर्वास, मानवाधिकारों और सकारात्मक बदलाव को ध्यान में रखते हुए इस विवाह को हरी झंडी दिखाई और आवश्यक पैरोल प्रदान की। कोर्ट के ऐतिहासिक आदेश के बाद जेल प्रशासन ने विवाह की तमाम तैयारियां पूरी कीं। सुरक्षा और आयोजन का जिम्मा ओपन जेल प्रभारी हापू राम ने संभाला, जबकि सेंट्रल जेल अधीक्षक प्रमोद सिंह शेखावत ने पूरे कार्यक्रम की मॉनिटरिंग की।

21 बाराती, पुलिस बनी गवाह और फलोदी के शख्स ने किया कन्यादान

इस अनोखे विवाह समारोह में कुल 21 मेहमान शामिल हुए, जिनमें मुख्य रूप से जेल प्रशासन के अधिकारी, कर्मचारी और सुरक्षा में तैनात जवान मौजूद रहे। दुल्हन सीमा का परिवार महाराष्ट्र से नहीं आ सका, तो जेल में बनी उसकी एक सहेली के पिता (फलोदी निवासी राधाकिशन वागेला) ने पिता का फर्ज निभाते हुए कन्यादान की रस्म निभाई।

सुधारात्मक न्याय व्यवस्था का बना प्रतीक

जोधपुर की खुली जेल में हुआ यह विवाह इस बात का बड़ा उदाहरण बना है कि आधुनिक न्याय प्रणाली केवल सजा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह बंदियों के चरित्र सुधार, उनके पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा में सम्मानपूर्वक जीने का अवसर प्रदान करने की दिशा में भी काम कर रही है।

 

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