
देश में आगामी त्योहारों से पहले मिठास कड़वी न हो, इसके लिए केंद्र सरकार ने एक अहम फैसला लिया है। सरकार ने ड्यूटी-फ्री कच्ची चीनी के आयात (इम्पोर्ट) से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए कारोबारियों को बड़ी राहत दी है। नए आदेश के तहत अब इम्पोर्टर्स को कच्ची चीनी को रिफाइंड करके घरेलू बाजार में बेचने के लिए तय 31 अक्टूबर की समय सीमा के बजाय ‘बिल ऑफ एंट्री’ दाखिल करने की तारीख से पूरे दो महीने (60 दिन) का वक्त मिलेगा। सरकार के इस कदम का सीधा मकसद त्योहारों के सीजन में चीनी की घरेलू किल्लत को दूर करना और इसकी बढ़ती कीमतों को नियंत्रित करना है।
आखिर क्या बदला है चीनी इम्पोर्ट का नियम?
हाल ही में 20 अगस्त को सरकार ने टैरिफ रेट कोटा (TRQ) के तहत 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की अनुमति दी थी। पहले के प्रावधानों के अनुसार, इम्पोर्ट की गई कच्ची चीनी को रिफाइंड करके सफेद चीनी बनाने और उसे 31 अक्टूबर तक घरेलू बाजार में बेचने की सख्त समय सीमा तय की गई थी। अब इस बाध्यता को खत्म कर दिया गया है। नए नियम के तहत, यदि कोई कारोबारी 25 अगस्त को बिल ऑफ एंट्री दाखिल करता है, तो उसे उस तारीख से चीनी प्रोसेस करके बेचने के लिए पूरे दो महीने का समय मिलेगा। इससे कारोबारियों पर एक तय तारीख का दबाव खत्म होगा।
उत्पादन में 11% की गिरावट के बाद लिया गया फैसला
चालू चीनी सीजन में देश के भीतर उत्पादन को लेकर लगातार चिंता बनी हुई है। शुरुआत में जहां 343 लाख टन चीनी उत्पादन का अनुमान जताया गया था, वहीं अब इसके गिरकर महज 306 लाख टन रहने की आशंका है। यानी चीनी उत्पादन में अनुमान से लगभग 11 फीसदी की भारी कमी आई है। मौसम की मार और गन्ने की कम पैदावार के कारण घरेलू बाजार में स्टॉक घट रहा है, जिससे बीते कुछ महीनों में कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। अगस्त से नवंबर के दौरान देश में बड़े त्योहार मनाए जाते हैं, जिससे चीनी की मांग चरम पर होती है। इसी मांग को पूरा करने और बाजार में सप्लाई सुचारू बनाए रखने के लिए सरकार ने यह ढील दी है।
कारोबारियों और आम उपभोक्ताओं को कैसे मिलेगा फायदा?
नियमों में आए इस लचीलेपन से चीनी इंपोर्टर्स और प्रोसेसर्स को बड़ी राहत मिलेगी। हर बिल ऑफ एंट्री के हिसाब से अलग-अलग दो महीने की समय सीमा मिलने से चीनी को रिफाइंड करने और बाजार तक पहुंचाने की पूरी लॉजिस्टिक्स प्रक्रिया बेहद आसान हो जाएगी। जब आयातित चीनी समय पर और बिना किसी हड़बड़ी के बाजार में पहुंचेगी, तो आपूर्ति सुधरेगी। इसका सीधा फायदा आम जनता को मिलेगा क्योंकि त्योहारों के दौरान चीनी के दामों में होने वाली संभावित बढ़ोतरी पर प्रभावी रोक लग सकेगी।
थोक खरीदारों और स्टॉक रखने की सीमा पर नया चाबुक
बाजार में चीनी की जमाखोरी और कालाबाजारी को रोकने के लिए सरकार ने सख्त रुख भी अपनाया है। 10 टन से अधिक चीनी की मासिक खपत करने वाले थोक खरीदारों और व्यावसायिक संस्थानों के लिए स्टॉक सीमा लागू कर दी गई है। 1 सितंबर से 30 नवंबर के बीच ये कारोबारी केवल 15 दिनों की खपत के बराबर ही स्टॉक अपने पास रख सकेंगे। इसके अलावा, सरकार ने 20 अगस्त तक वास्तव में आयात हो चुकी कच्ची चीनी के लिए एडवांस ऑथराइजेशन (SION E-52) के तहत जारी कुछ अनुमतियों को एक बार के लिए TRQ व्यवस्था में बदलने की सुविधा भी प्रदान की है।














