नेपाल-तिब्बत बाढ़ का तांडव: लाशों से पटे मुर्दाघर, 592 मौतों की पुष्टि; 320 भारतीय अब भी लापता, कैलाश मानसरोवर के 21 तीर्थयात्री सुरक्षित दिल्ली पहुंचे

 

नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती इलाकों में आई कुदरती आफत के बाद हालात बेहद भयावह बने हुए हैं। भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद राहत एवं बचाव कार्य युद्ध स्तर पर जारी है। नेपाल में मरने वालों की संख्या बढ़कर 587 हो गई है, जबकि तिब्बत में 5 मौतों की पुष्टि के साथ कुल आधिकारिक मृतक संख्या 592 पहुंच गई है। इस बीच नेपाल-तिब्बत सीमा पर एक और ग्लेशियल झील में जलस्तर बढ़ने से भोटेकोशी, त्रिशूली और नारायणी नदी के तटीय इलाकों में दूसरी बार बाढ़ आने का गंभीर खतरा मंडरा रहा है। प्रशासन ने आसपास की बस्तियों को खाली करने के निर्देश जारी कर दिए हैं।

मुर्दाघरों में जगह खत्म, भरतपुर में तैयार हो रहा 250 शवों की क्षमता वाला अस्थायी सेंटर

आपदा के बाद नदियों के तेज बहाव में बहकर आए शवों की संख्या इतनी अधिक है कि नेपाल के कई जिलों के मुर्दाघर पूरी तरह से भर चुके हैं। रसुवा, नुवाकोट, चितवन, तनहुं और नवलपरासी में शवों को रखने के लिए जगह नहीं बची है, जिससे परिजनों को अपनों की पहचान करने में भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आपातकालीन स्थिति को देखते हुए अधिकारियों ने चितवन के भरतपुर में स्थित ‘इंडस्ट्रियल एंटरप्राइज डेवलपमेंट इंस्टीट्यूट’ की खाली इमारत को अस्थायी शवगृह (मॉर्च्युरी) में बदलने का फैसला किया है। यहां एयर कंडीशनर और ‘ड्राई आइस’ (बर्फ) की मदद से 250 शवों को सुरक्षित रखने का इंतजाम किया जा रहा है।

दिल्ली पहुंचे तमिलनाडु के 21 तीर्थयात्री, विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जानी आपबीती

नेपाल के बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे तमिलनाडु के 21 कैलाश मानसरोवर तीर्थयात्रियों को नेपाली सेना ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। शुक्रवार को दिल्ली पहुंचने पर विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने उनसे मुलाकात कर उनकी कुशलक्षेम पूछी और आपबीती सुनी। विदेश मंत्री ने राहत और बचाव कार्य में त्वरित सहयोग के लिए नेपाल सरकार और नेपाली सेना का आभार व्यक्त किया। विदेश मंत्रालय ने फंसे हुए अन्य भारतीयों की सहायता और जानकारी जुटाने के लिए 24 घंटे काम करने वाला कंट्रोल रूम सक्रिय कर दिया है।

320 भारतीय नागरिक अब भी लापता, कनाडा की भारतीय इंजीनियर स्वाती बागरेचा की तलाश तेज

आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, इस त्रासदी के बाद करीब 320 भारतीय नागरिकों से संपर्क नहीं हो पा रहा है, जिनकी तलाश के लिए खोजी अभियान चलाया जा रहा है। लापता लोगों में मध्य प्रदेश के विदिशा की रहने वाली और कनाडा में कार्यरत इंजीनियर स्वाती बागरेचा भी शामिल हैं, जिनसे 26 अगस्त के बाद से कोई संपर्क नहीं हो सका है। उनकी आखिरी लोकेशन चीन सीमा के पास ट्रेस हुई है। नेपाल में अब तक 85 भारतीयों और 16 चीनी नागरिकों समेत कुल 121 विदेशी नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।

एक और झील फटने का मंडराया खतरा, 13 हजार से ज्यादा जवान रेस्क्यू में तैनात

नेपाल-तिब्बत सीमा पर बनी एक और प्राकृतिक झील में पानी ओवरफ्लो होने की आशंका से रेस्क्यू ऑपरेशन में लगी टीमों की चुनौती दोगुनी हो गई है। नेपाली सेना, नेपाल पुलिस और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 13,295 सुरक्षाकर्मी दुर्गम इलाकों में हवाई और जमीनी स्तर पर खोज अभियान चला रहे हैं। मलबे, टूटी सड़कों और नष्ट हुए पुलों के कारण कई दुर्गम गांवों तक पहुंचना बेहद मुश्किल साबित हो रहा है, जिससे लापता लोगों का आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है।

 

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