
फेसबुक और इंस्टाग्राम के मार्केट प्लेस पर कोई विज्ञापन देखकर उसे खरीदना या बेचने की सोच रहे है तो आप ठगी का शिकार हो सकते है। साइबर ठगों ने सोशल नेटवर्किंग की इन साइटों को अपना नया ठिकाना बना लिया है। नोएडा में बीते एक महीने में 10 से ज्यादा मामले सोशल मीडिया के जरिए ठगी के सामने आए है। जिन्होंने इंस्टाग्राम और फेसबुक की मार्केट प्लेस पर जाकर विज्ञापन में अपनी इंट्रेस्ट दिखाया था।ट्रोजन और रेट से रहे सावधान
साइबर एक्सपर्ट अनुज अग्रवाल ने बताया कि एक ट्रोजन हॉर्स या ट्रोजन ये एक कोड या एक प्रोग्राम होता है। जो दिखने में तो लीगल दिखाई देता है। लेकिन एक बार इंस्टॉल होने के बाद यह आपके पूरे सिस्टम को कंट्रोल कर सकता है। ट्रोजन आपको धोखा देने के लिए एक फाइल या एप्लीकेशन के रूप में कार्य करता है।
मसलन यदि आपको किसी पर्सन या कंपनी के नेम से कोई मेल , लिंक आता है और आप उसे एक सामान्य ईमेल लिंक समझकर ओपन कर देते हैं । जिससे आपका फोन या सिस्टम हैक हो जाता है। अब ओटीपी आएगा जो ठग को पता चलेगा। इसी तरह रिमोट एक्सेस ट्रोजन यानी रेट भी काम करता है। ये एक वर्चुअल बैकडोर का निर्माण करता है। यह बैकडोर आपके कंप्यूटर के रिमोट को हैकर्स को प्रोवाइड करता है।
ये बरतें सावधानी
- यदि इन सोशल साइट पर कोई खरीद और फरोख्त की साइट है तो वह कब बनी इसकी जांच करे
- जिस व्यक्ति से सामान खरीद से बेच रहे है उसकी पूरी जानकारी हासिल करे
- किसी भी लिंक और बारकोड को स्कैन न करे
- कोई पहले से पैसा मांगता है तो उससे डील न करे
- कोई संदिग्ध एप को कभी भी डाउनलोड नहीं करे
- सोशल मीडिया पर जारी एडवाइजरी को जरुर देखे
तीनों सोशल मीडिया पर ऐसे होता है फ्रॉड
ठगों ने हाल ही में इंस्टाग्राम मार्केटप्लेस पर आईफोन बेचने के बहाने 3.44 लाख रुपए की ठगी हो गई। ये फ्राड सेक्टर-45 निवासी पुष्पेंद्र के साथ हुआ। ऑनलाइन भुगतान के चक्कर में उनकी मां के खाते से पैसे निकल गए। इसी तरह साइबर ठग अपने को आर्मी का बताकर भी ठगी कर रहे है। विद्युत निगम के एमडी के फोटो व नाम का प्रयोग कर व्हाट्सएप पर मैसेज भेजकर गाजियाबाद के सुपरिटेंडेंट इंजीनियर से सवा लाख रुपये की ठगी कर ली। आरोपियों ने एमडी की तरफ से फर्जी मैसेज भेजकर इंजीनियर से सवा लाख रुपये के गिफ्ट वाउचर खरीदवा लिये। इसी तरह सेक्टर 75 में तनिष्का ओएलएक्स ऐप पर एक फर्नीचर बेचने के लिए विज्ञापन दिया था। इसके कुछ समय बाद एक व्यक्ति ने उनसे फोन पर संपर्क किया और फर्नीचर खरीदने की बात कही। फर्नीचर के रुपए ऑनलाइन लिंक भेजा जिसे खोलते हीर 70 हजार रुपए कट गए।














