पहलगाम नरसंहार में NIA का इंटरनेशनल खुलासा: अमेरिका में बना और चीन के रास्ते आतंकियों तक पहुंचा ‘GoPro’ कैमरा, पढ़ें  इनसाइड स्टोरी

श्रीनगर/नई दिल्ली। कश्मीर के खूबसूरत पर्यटन स्थल पहलगाम में पिछले साल हुए दिल दहला देने वाले आतंकी हमले को लेकर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट में एक ऐसा सनसनीखेज इंटरनेशनल कनेक्शन सामने आया है, जिसने भारत के दोनों पड़ोसी मुल्कों (पाकिस्तान और चीन) की नापाक साठगांठ को बेनकाब कर दिया है। 15 दिसंबर 2025 को दाखिल की गई इस चार्जशीट के मुताबिक, निर्दोष पर्यटकों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाने वाले आतंकियों ने जिस हाई-टेक ‘गो-प्रो’ (GoPro) एक्शन कैमरे का इस्तेमाल किया था, वह असल में अमेरिका में बना था और चीन के खुफिया रास्तों से होता हुआ कश्मीर में सक्रिय पाकिस्तानी आतंकियों के हाथों तक पहुंचा था।

सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इस डिजिटल डिवाइस के रूट की बारीकी से जांच करने पर आतंकियों के उस पूरे ओवरग्राउंड वर्कर्स (OGWs) और मददगारों के इंटरनेशनल नेटवर्क का पर्दाफाश हो जाएगा, जो सरहद पार से इस पूरी साजिश को हवा दे रहे थे।

दहशत का प्रोपेगैंडा फैलाने के लिए हो रहा ‘बॉडी कैम’ का इस्तेमाल

सुरक्षा मामलों के जानकारों और एनआईए के मुताबिक, आतंकी संगठन अब अपने हमलों को लाइव रिकॉर्ड करने के लिए बॉडी कैमरों और आधुनिक एक्शन डिवाइसेज का इस्तेमाल तेजी से कर रहे हैं। इस खूनी खेल के पीछे का मकसद बेहद क्रूर है—हमले की लाइव फुटेज को सोशल मीडिया और डार्क वेब पर वायरल कर प्रोपेगैंडा फैलाना और आम जनता के दिलों में खौफ पैदा करना। पहलगाम हमले में शामिल आतंकियों को भी यही टास्क दिया गया था। यह कैमरा पिछले साल जुलाई में दाचीगाम के जंगलों में सुरक्षाबलों के साथ हुई एक मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों के शवों के पास से बरामद किया गया था।

बैसरन घाटी में मजहब देखकर किया था कत्लेआम

तारीख थी 22 अप्रैल 2025, जब पहलगाम से महज 6 किलोमीटर दूर स्थित खूबसूरत बैसरन घाटी (Baisaran Valley) गोलियों की तड़तड़ाहट और मासूमों की चीख-पुकार से दहल उठी थी। इस टारगेटेड आतंकी हमले में 26 पर्यटकों की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी, जबकि 16 अन्य गंभीर रूप से घायल हुए थे। एनआईए की चार्जशीट में स्पष्ट कहा गया है कि आतंकियों ने वहां मौजूद लोगों को उनकी धार्मिक पहचान (मजहब) के आधार पर चुन-चुनकर निशाना बनाया था। यह देश के ताने-बाने पर चोट करने की एक बेहद घिनौनी और सुनियोजित साजिश थी।

अमेरिकी कंपनी ने किया कन्फर्म: ‘हमने तो माल चीन भेजा था’

इस हाई-टेक कैमरे का सुराग तलाशने के लिए NIA ने अमेरिका स्थित मूल निर्माता कंपनी GoPro Inc. से आधिकारिक संपर्क साधा था। अमेरिकी कंपनी से मिले लिखित जवाब ने भारतीय जांच एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। कंपनी ने अपने डेटा का मिलान कर पुष्टि की कि यह खास कैमरा यूनिट चीन में मौजूद उनके एक आधिकारिक कमर्शियल डिस्ट्रीब्यूटर को एक्सपोर्ट की गई थी।

अब एनआईए इस बात की कड़ियों को जोड़ने में जुटी है कि आखिर वह डिवाइस चीनी डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम से निकलकर कश्मीर के जंगलों में छिपे आतंकियों तक कैसे आई? जांच अधिकारियों को तगड़ा शक है कि इस कैमरे की खरीददारी किसी अंडरग्राउंड या खुफिया चैनल के जरिए की गई, जिसमें अंतरराष्ट्रीय बिचौलिए या फिर चीनी सरकार/एजेंसियों से जुड़े लोग भी शामिल हो सकते हैं।

लाहौर में बैठा ‘लंगड़ा’ दे रहा था लाइव लोकेशन, दो स्थानीय गाइडों ने की गद्दारी

इस पूरे नरसंहार का मास्टरमाइंड लश्कर-ए-तैयबा का खूंखार कमांडर सैफुल्लाह उर्फ सैफुल्लाह साजिद जट्ट उर्फ ‘लंगड़ा’ है। साजिद फिलहाल पाकिस्तान के लाहौर (कसूर) में बैठकर भारतीय सुरक्षा एजेंसियों को चुनौती दे रहा है और उस पर 10 लाख रुपये का इनाम घोषित है। हमले के वक्त साजिद जट्ट ही आतंकियों का मेन हैंडलर था, जो उन्हें पाकिस्तान से वॉट्सऐप या अन्य एन्क्रिप्टेड ऐप्स के जरिए ‘रियल-टाइम डायरेक्शन’ (लाइव निर्देश) दे रहा था। उसने ही आतंकियों को बैसरन वैली की सटीक लोकेशन भेजी थी।

चार्जशीट में दो स्थानीय टूरिस्ट गाइडों—परवेज अहमद जोठार और बशीर अहमद जोठार की गद्दारी का भी जिक्र है। अगर इन दोनों ने वक्त रहते सुरक्षा एजेंसियों को सूचना दी होती, तो इस बड़े नरसंहार को टाला जा सकता था। इन दोनों ने आतंकियों को बैसरन में देखा था, लेकिन डर या मिलीभगत के चलते मुंह बंद रखा। फिलहाल दोनों गाइड्स को सलाखों के पीछे भेज दिया गया है।

हमले से पहले आतंकियों ने पेड़ के नीचे खाई थी रोटी-सब्जी

जांच में सामने आया कि हमले से ठीक एक दिन पहले तीनों पाकिस्तानी आतंकी गाइड परवेज की झोपड़ी में गए थे। वहां उन्होंने खुदा के नाम पर मदद मांगी और पेट भरकर खाना खाया। यही नहीं, वे जाते वक्त अपने साथ रास्ते के लिए रोटी-सब्जी भी पैक करवाकर ले गए थे। हमले वाले दिन, अंधाधुंध फायरिंग शुरू करने से ठीक पहले तीनों आतंकियों ने बैसरन घाटी में एक पेड़ के नीचे बैठकर वही खाना खाया था। इस कायरतापूर्ण कत्लेआम को अंजाम देने के बाद तीनों ने हवा में हर्ष फायरिंग की और मजहबी नारे लगाते हुए जंगलों की तरफ भाग निकले थे।

‘ऑपरेशन महादेव’ में ढेर हुए तीनों कसाई, भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से लिया बदला

एनआईए के मुताबिक, इस नरसंहार में शामिल तीनों पाकिस्तानी आतंकियों—फैसल जट्ट उर्फ सुलेमान, हबीब ताहिर उर्फ जिब्रान भाई और हमजा अफगानी को भारतीय जांबाजों ने 28 जुलाई 2025 को ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत दाचीगाम के जंगलों में घेरकर ढेर कर दिया था। इन्हीं के पास से वह अमेरिकी गो-प्रो कैमरा मिला था।

पहलगाम के शहीदों का बदला लेने के लिए भारत सरकार ने सेना को खुली छूट दी। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने 6-7 मई की रात ठीक 1:05 बजे पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में घुसकर एक बड़ी एयरस्ट्राइक को अंजाम दिया, जिसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया गया। भारत ने सीमा पार आतंकियों के लॉन्च पैड्स पर एक के बाद एक 24 घातक मिसाइलें दागीं। इस अचूक हमले में 9 प्रमुख आतंकी ठिकाने पूरी तरह तबाह हो गए और 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए। इस एयरस्ट्राइक में आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मौलाना मसूद अजहर के परिवार के 10 सदस्य और उसके 4 बेहद करीबी कमांडर भी जहन्नुम पहुंचा दिए गए थे।

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