
देश के कई राज्यों में महिलाओं को लेकर हिंसा का ग्राफ बढ़ता जा रहा है. हाथरस केस में जिस तरह से राज्य की योगी सरकार सख्त कदम उठाए हैं, उससे दूसरे राज्यों को भी संदेश गया है कि महिलाओं पर हो रही हिंसा को रोकना है तो इस तरह के निर्णय लेने ही होंगे. हाथरस केस को लेकर कांग्रेस समेत कई विपक्षी दल राजनीतिक रोटियां सेंकने में जुटे हैं जबकि योगी सरकार ने आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. साथ ही सीबीआई जांच के आदेश भी दिए हैं. इतना ही नहीं आरोपियों के नारको और पॉलीग्राफ टेस्ट कराने का भी आदेश दिया गया है. इस सब के बाद अब जब विपक्षी दल हो-हंगामा कर रहे हैं तो उन पर लोग सवाल खड़े कर रहे हैं. अब केंद्र की मोदी सरकार ने पूरे देश में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बड़ा फैसला लिया है.
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के लिए एडवाइजरी जारी की है. इसमें मंत्रालय ने महिला अपराध के मामलों में पुलिस की कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा है. ऐसे मामलों में सही तरीके से काम करने और मामलों में लापरवाही न बरतने का दिशा-निर्देश दिया गया है. माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, राजस्थान व कुछ अन्य राज्यों में महिलाओं के खिलाफ हालिया घटनाओं के मद्देनजर ऐसा किया गया है.
मोदी सरकार की ओर से राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को महिला अपराधों पर सख्त कार्रवाई करने के निर्देश जारी किए गए हैं. दुष्कर्म के मामलों में जल्द एफआइआर दर्ज करने, सबूत जुटाने और समय पर फॉरेंसिक जांच करने का निर्देश है. मंत्रालय ने कहा है कि महिला के खिलाफ अपराध यदि थाने के अधिकार क्षेत्र के बाहर हुआ है तो उस स्थिति में जीरो एफआइआर दर्ज की जाए.
दिशा-निर्देशों में साफ कहा गया है कि अगर महिलाओं के खिलाफ अपराधों में किसी भी तरह कि चूक होती है तो मामले में दोषियों के साथ-साथ अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी. भारतीय दंड संहिता की धारा 166 (A) के अनुसार FIR दर्ज न करने की स्थिति में पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की इजाज़त देता है. सीआरपीसी की धारा 173 के तहत दुष्कर्म के मामले में 2 महीने के भीतर जांच पूरी करना ज़रूरी है.
हालांकि ऐसा नहीं की इस तरह के फैसले पहली बार लिए गए हो, ऐसे ही कई फैसले निर्भया के वक्त भी लिया गया था. जैसे की निर्भया फण्ड, निर्भया पुलिस जैसी मुहीम चलाई गयी थी लेकिन मौजूदा आकड़ों के हिसाब से साफ़ दिखता है कि उनका कोई खास फ़ायदा नहीं हुआ रेप उसके बाद भी हुए. अब देखना होगा की क्या ये फैसला आने वाले समय में महिला सुरक्षा के मुद्दे पर क्रांति ला पाएगा या नहीं.















