मुंबई देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में मानसून की दस्तक के साथ ही प्रशासनिक दावों और तैयारियों की पोल पूरी तरह खुल गई है। महानगर में हो रही रुक-रुक कर भारी बारिश के बीच बीते तीन दिनों के भीतर हुए पांच अलग-अलग हादसों में एक मासूम बच्चे समेत पांच लोगों की दर्दनाक मौत हो गई है। इन मौतों को लेकर अब मुंबई की सड़कों से लेकर महाराष्ट्र विधानसभा तक सियासत पूरी तरह गरमा गई है। विपक्ष ने जहां मुंबई महानगरपालिका (BMC) और राज्य सरकार को भ्रष्टाचार के मुद्दे पर आड़े हाथों लिया है, वहीं सरकार ने आनन-फानन में बड़ी कार्रवाई करते हुए बीएमसी के चार वरिष्ठ अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है।
साकीनाका में खुला मैनहोल बना काल, 60 वर्षीय बुजुर्ग की डूबने से मौत
मुंबई को शर्मसार करने वाली ताजा घटना साकीनाका इलाके से सामने आई है। गुरुवार (2 जुलाई) को खैराणी रोड पर दोपहर करीब 12:30 बजे भारी जलभराव के बीच सड़क किनारे एक मैनहोल खुला हुआ था। पानी भरे होने के कारण रास्ता दिखाई नहीं दिया और 60 वर्षीय असलम इसाक शेख नाम के बुजुर्ग सीधे उस गहरे मैनहोल में समा गए, जिससे दम घुटने और डूबने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। इस घटना से पहले मंगलवार (30 जून) को चेंबूर इलाके में एक चलती स्कूल बस पर भारी-भरकम पेड़ गिर गया था, जिसकी चपेट में आने से मासूम बच्चे विहान श्रीवास्तव की जान चली गई थी।
“जोड़-तोड़ की राजनीति में व्यस्त है सरकार…” विधानसभा में बरसे नाना पटोले
मुंबई में लगातार हो रही इन मौतों की गूंज महाराष्ट्र विधानसभा के मानसून सत्र में भी सुनाई दी। विपक्ष ने शून्यकाल के दौरान इस मुद्दे को उठाते हुए सरकार और बीएमसी के प्री-मानसून दावों को सफेद झूठ करार दिया। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता नाना पटोले ने सदन में सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा, “मौजूदा सरकार प्रशासन चलाने और जनता की सुरक्षा करने के बजाय सिर्फ जोड़-तोड़ की राजनीति और सत्ता बचाने में व्यस्त है। मुंबई में लगातार लापरवाही के कारण निर्दोष नागरिकों की जान जा रही है, लेकिन सरकार का ध्यान व्यवस्था सुधारने पर बिल्कुल नहीं है। आखिर सरकार को और कितनी मौतों का इंतजार है?” उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार में डूबे प्रशासन की वजह से ही मुंबई की जनता आज अपनी जान गंवाने को मजबूर है।
विधानसभा अध्यक्ष का कड़ा रुख: जिम्मेदारों पर दर्ज हो गैर-इरादतन हत्या का केस
मामले की गंभीरता और विपक्ष के भारी हंगामे को देखते हुए विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ने कड़ा रुख अख्तियार किया। उन्होंने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिए कि साकीनाका मैनहोल हादसे और चेंबूर पेड़ हादसे में जिन भी ठेकेदारों या अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है, उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता के तहत सीधे गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मुकदमा (FIR) दर्ज किया जाए। उन्होंने कहा कि जनता की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
‘L’ वार्ड के असिस्टेंट कमिश्नर समेत 4 सस्पेंड, 7 दिन में मांगी जांच रिपोर्ट
विधानसभा अध्यक्ष के कड़े तेवरों और चौतरफा घिरने के बाद बीएमसी (BMC) प्रशासन तुरंत हरकत में आया। बीएमसी कमिश्नर अश्विनी भिड़े ने तत्काल कार्रवाई करते हुए लापरवाही के आरोप में ‘L’ वार्ड के असिस्टेंट म्यूनिसिपल कमिश्नर (वार्ड ऑफिसर) समेत चार जिम्मेदार अधिकारियों को जांच पूरी होने तक सस्पेंड (निलंबित) कर दिया है। इसके साथ ही, बीएमसी कमिश्नर ने एडिशनल म्यूनिसिपल कमिश्नर (पश्चिमी उपनगर) की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन किया है। इस समिति को आदेश दिए गए हैं कि वे पूरे घटनाक्रम की बारीकी से तकनीकी जांच करें और अगले 7 दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट सौंपें, ताकि दोषियों के खिलाफ आगे की दंडात्मक कानूनी कार्रवाई की जा सके।















