अयोध्या: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी का मामला इस वक्त देश की सबसे बड़ी सुर्खियों में शुमार हो चुका है। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की बैठकों और प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद अब ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की एक रहस्यमयी चिट्ठी ने इस पूरे विवाद में घी का काम किया है। इस चिट्ठी ने साफ कर दिया है कि ट्रस्ट के भीतर सब कुछ ठीक नहीं है और ट्रस्टियों के बीच आपसी विश्वास की भारी कमी है। अब तक इस पूरे मामले पर चुप्पी साधे रखने वाले चंपत राय ने आखिरकार अपना पक्ष रखते हुए गंभीर साजिश की ओर इशारा किया है, जिसे एक बड़ी चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। हालांकि, चंपत राय ट्रस्ट से अपना इस्तीफा दे चुके हैं।
चंपत राय ने चिट्ठी में जताई हैरानी, SIT को भेजा कड़ा जवाब
सोशल मीडिया पर अपनी बात रखते हुए चंपत राय ने लिखा कि राम मंदिर चढ़ावा चोरी को लेकर देश में तरह-तरह की अफवाहें उड़ रही हैं और उन पर भी कई बेबुनियाद आरोप लगाए गए हैं। उन्होंने कहा कि वे फिलहाल सही समय का इंतजार कर रहे हैं और एसआईटी (SIT) की फाइनल रिपोर्ट आने के बाद हर एक आरोप का सिलसिलेवार जवाब देंगे। इसके साथ ही उन्होंने इस बात पर गहरी चिंता और आश्चर्य जताया कि एसआईटी की शुरुआती जांच रिपोर्ट, जो कि बेहद गोपनीय होनी चाहिए थी, वो आखिर लीक कैसे हो गई?
चिट्ठी के अलावा चंपत राय ने एसआईटी को अपना लिखित बयान भी भेजा है, जिसमें उन्होंने ट्रस्ट के ही सदस्य अनिल मिश्रा को सीधे कटघरे में खड़ा किया है। चंपत राय का आरोप है कि चढ़ावे की काउंटिंग के लिए 6 फरवरी 2025 को अनिल मिश्रा और एसबीआई (SBI) के बीच जो एमओयू (MoU) साइन हुआ था, उसके लिए उनसे कोई मंजूरी नहीं ली गई थी। चंपत राय ने सवाल उठाया कि इस एमओयू के बाद अचानक काउंटिंग रूम में बदलाव क्यों किए गए और नियमों में इतनी ढिलाई क्यों बरती गई? उनका मानना है कि बैंक के कड़े नियम यहां भी लागू होने चाहिए थे, लेकिन उनकी सरेआम अवहेलना की गई।
‘इस्तीफे की कॉपी तक नहीं दिखाई गई’ – ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास का बड़ा दावा
इस पूरे विवाद के बीच श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के ट्रस्टी महंत दिनेंद्र दास महाराज ने मीडिया से बातचीत में एक और विस्फोटक दावा कर दिया है। उन्होंने कहा, “ट्रस्ट की बैठक में चंपत राय के इस्तीफे की कोई कॉपी किसी को नहीं दिखाई गई। बस मौखिक रूप से लोगों ने कहा कि उन्होंने इस्तीफा दे दिया है। मैंने शुरुआत में इस इस्तीफे को मानने से साफ इनकार किया था, लेकिन जब सभी सदस्यों ने जोर दिया, तो हमें मानना पड़ा।” उन्होंने आगे आरोप लगाया कि ट्रस्ट में गोपाल राव और अनिल मिश्रा ही पूरा लेन-देन संभालते थे।
दूसरी तरफ, विश्व हिंदू परिषद (VHP) के प्रवक्ता सुरेंद्र जैन ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि अगर किसी के पास कोई ठोस सबूत है, तो उसे जांच अधिकारी के सामने पेश करना चाहिए, न कि समाज की आस्था को ठेस पहुंचानी चाहिए। वहीं, ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने भी यह स्वीकार किया कि व्यवस्था में खामियां थीं और गलत लोगों पर भरोसा करने की भूल हुई, लेकिन असली सच जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
9 पन्नों की SIT रिपोर्ट ने खोली पोल: जूतों और कपड़ों में छिपाकर ले जाते थे नोट
अब तक सिर्फ कयास लगाए जा रहे थे कि राम मंदिर में कितनी बड़ी चोरी हुई है, लेकिन एसआईटी की प्रारंभिक 9 पन्नों की रिपोर्ट ने इस पूरे भ्रम को साफ कर दिया है। एसआईटी के मुताबिक, अब तक आरोपियों के पास से 78.94 लाख रुपये बरामद किए जा चुके हैं। इस जब्त किए गए चढ़ावे में सिर्फ भारतीय कैश ही नहीं, बल्कि विदेशी करेंसी, कीमती गहने और अन्य बेशकीमती सामान भी शामिल हैं। रिपोर्ट के पेज नंबर 4, 5, 6 और 8 में चोरी के तरीकों और चोरों के नेटवर्क का पूरा कच्चा चिट्ठा है।
CCTV में 70 बार कैद हुई चोरी, ऐसे उड़ाते थे गर्भगृह का माल
एसआईटी की रिपोर्ट के पेज नंबर 4 के मुताबिक, जांच टीम को 27 अप्रैल से 5 जून तक के सीसीटीवी फुटेज मिले हैं, जिनमें एक या दो बार नहीं, बल्कि पूरे 70 बार चोरी की लाइव वारदात रिकॉर्ड हुई है। वीडियो में साफ दिख रहा है कि कुछ चुनिंदा कर्मचारी नोटों की गड्डियों को अपने कपड़ों और यहां तक कि अपने जूतों के भीतर छिपाकर काउंटिंग रूम से बाहर ले जा रहे थे। इस घिनौने खेल में अविनाश शुक्ला और मनीष यादव मुख्य रूप से चोरी करते पाए गए, जबकि अनुकल्प, लवकुश मिश्रा और करुणेश पांडेय इस पूरी साजिश में उनकी मदद कर रहे थे। फुटेज में रमाशंकर मिश्रा नामक शख्स भी नोटों की गड्डियां छिपाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया है।
नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां, चोरी की रकम से खरीदे मकान और FD
रिपोर्ट के पेज नंबर 5 में सुरक्षा और प्रबंधन की उन बड़ी लापरवाहियों का जिक्र है, जिसका फायदा इन चोरों ने उठाया:
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काउंटिंग रूम से बाहर जाते समय कर्मचारियों की कोई शारीरिक तलाशी नहीं ली जाती थी।
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बिना जेब वाली विशेष ड्रेस का नियम कागजों पर ही रह गया, उसे लागू नहीं किया गया।
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अलग-अलग दानपात्रों की अलग गिनती करने के बजाय सारी रकम को एक ही जगह मिक्स कर दिया जाता था।
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दान की गई कुल वैल्यू का कोई आधिकारिक रसीद या सर्टिफिकेट तैयार नहीं होता था।
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सबसे संवेदनशील ‘गिनती कक्ष’ की सीसीटीवी निगरानी में घोर लापरवाही बरती गई।
चोरी की रकम को कहां ठिकाने लगाया गया? एसआईटी ने अपनी जांच में पाया कि चढ़ावे की चोरी के पैसों को आरोपियों ने बेहद शातिर तरीके से ठिकाने लगाया। चोरों ने इस काले धन को सीधे बैंकों में जमा कराया, अपने और अपने सगे-संबंधियों के नाम पर मोटी एफडी (Fixed Deposit) करवाई और कुछ आरोपियों ने तो भगवान के चढ़ावे के पैसों से जमीन और आलीशान मकान तक खरीद डाले।
दान गिनती के लिए बनी SOP की उड़ी धज्जियां
राम मंदिर में आने वाले करोड़ों के दान की गिनती के लिए एक बेहद सख्त एसओपी (Standard Operating Procedure) बनाई गई थी, लेकिन एसआईटी के अनुसार, इसका रत्ती भर भी पालन नहीं हुआ। नियम के मुताबिक, पूरी गिनती प्रक्रिया की पारदर्शिता बनाए रखने की सीधी जिम्मेदारी ट्रस्ट की थी। नकद जमा पर्ची, चालान और रजिस्टरों पर हस्ताक्षर के जरिए लेन-देन की पुष्टि होनी थी।
इसके अलावा बैंक और ट्रस्ट की संयुक्त जिम्मेदारी थी कि प्रतिदिन तय अधिकारियों की मौजूदगी में ही दानपात्र खोले जाएं और इसकी पूरी वीडियो रिकॉर्डिंग हो। काउंटिंग रूम में किसी को भी बिना वर्दी या सोने-चांदी के गहने पहनकर एंट्री नहीं मिलनी थी, साथ ही आने-जाने वालों की सघन तलाशी और गेस्ट रजिस्टर में एंट्री अनिवार्य थी। अफसोस कि इन सभी नियमों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया।
चंदा चोरी पर थमा नहीं सियासी घमासान, अखिलेश का तंज तो सीएम योगी का पलटवार
इस महाघोटाले के सामने आने के बाद उत्तर प्रदेश से लेकर महाराष्ट्र तक की राजनीति गरमा गई है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा, “चढ़ावा-चंदा-दान चोरी के खुलने की वजह से बीजेपी की धर्म और धन दोनों की राजनीति का अंत हो गया है। बीजेपी अब कहीं की नहीं रही।” वहीं, कांग्रेस ने इसे लेकर लखनऊ में ‘सद्बुद्धि पदयात्रा’ निकाली और महाराष्ट्र के नासिक में ‘रघुपति राघव राजा राम आंदोलन’ चलाकर सरकार को घेरा।
विपक्ष के इन चौतरफा हमलों पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बेहद करारा पलटवार किया है। सीएम योगी ने दो टूक कहा, “एसआईटी की जांच ने दूध का दूध और पानी का पानी कर दिया है। जब ये लोग राम और कृष्ण को काल्पनिक बताते थे, तब हिंदुओं की आस्था आहत नहीं होती थी? आज वक्फ की लूट पर सपा-कांग्रेस पूरी तरह चुप हैं। असल में इनकी पीड़ा राम मंदिर का चढ़ावा नहीं है, बल्कि इनकी असली पीड़ा यह है कि जहां ये कभी बाबरी का गुलामी ढांचा देखना चाहते थे, आज वहां भव्य राम मंदिर खड़ा है।”











