अयोध्या / लखनऊ: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भव्य राम मंदिर से आस्था को ठेस पहुंचाने वाला एक बेहद हैरान करने वाला मामला सामने आया है। राम मंदिर के दानपात्रों (डोनेशन बॉक्स) से श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये की चोरी का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। यह पूरा मामला तब उजागर हुआ, जब महज 18 से 20 हजार रुपये महीने की तनख्वाह पाने वाले मंदिर के मामूली कर्मचारियों के पास करोड़ों रुपये की बेनामी संपत्तियों, कीमती जमीनों और आलीशान प्लॉटों का पता चला। मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार ने आनंद-फानन में हाई-लेवल एसआईटी (SIT) का गठन कर दिया है, जो इस पूरे घोटाले की कड़ियों को खंगालने में जुट गई है।
अखिलेश यादव के ट्वीट से मची हलचल, बोले- ‘दोषी का पता लगाने में पुलिस अक्षम तो हम करें सहायता’
राम मंदिर के चढ़ावे में भ्रष्टाचार का यह बड़ा मुद्दा तब देश भर की सुर्खियों में आया, जब उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर इस घोटाले को प्रमुखता से उठाया। अखिलेश यादव इस पूरे मामले को जनता के सामने लाने वाले शुरुआती नेताओं में से हैं। उनके इस खुलासे के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हड़कंप मच गया।
शनिवार को उन्होंने दोबारा ‘एक्स’ पर तीखा हमला बोलते हुए लिखा, “इस षड्यंत्र का मूल दूर नहीं है, इसलिए सच में कार्रवाई करने के लिए कहीं दूर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। यदि दोषी के बारे में पता करने में पुलिस अक्षम है तो हम सहायता कर दें।” उनके इस स्टैंड के बाद सरकार पर चौतरफा दबाव बढ़ गया।
गोबर के ढेर और अलमारी में छिपाए थे ₹10 लाख, आरोपी लवकुश मिश्रा के घर जब पहुंची टीम
इस पूरे महाघोटाले में सबसे पहला और प्रमुख नाम लवकुश मिश्रा का सामने आया है। लवकुश अयोध्या के पास रुदौली थाना क्षेत्र के शुजागंज स्थित मीनापुर फगौली गांव का रहने वाला है। उसे राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा दानपात्रों से पैसे निकालने और उनकी गिनती करने की बेहद जिम्मेदारी वाली ड्यूटी पर लगाया गया था।
जब एसओजी (SOG) और पुलिस की 6 सदस्यीय संयुक्त टीम (जिसमें दो वर्दी में और चार सादे कपड़ों में थे) ने लवकुश के पैतृक आवास पर छापेमारी की, तो वहां का नजारा देखकर अधिकारियों के होश उड़ गए। तलाशी के दौरान घर से 10 लाख रुपये की भारी-भरकम नकदी बरामद हुई। शातिर आरोपी ने कुछ पैसे तो घर की अलमारी में रखे थे, जबकि बाकी की रकम पुलिस से बचाने के लिए घर के बाहर बने गोबर के ढेर में छिपाकर रखी थी। गांव वालों के मुताबिक, राम मंदिर में नौकरी मिलने के बाद से लवकुश का रहन-सहन और आर्थिक स्थिति जादुई तरीके से बदल गई थी।
कम सैलरी पर खरीदी डेढ़ करोड़ की जमीन, पिता बोले- ‘जमीन गिरवी रखकर जुटाए पैसे’
जांच एजेंसियों के अनुसार, पकड़े गए कर्मचारियों की आधिकारिक आमदनी और उनकी वास्तविक संपत्ति के बीच जमीन-आसमान का अंतर है। महज 18 से 20 हजार रुपये मासिक वेतन पाने वाले एक कर्मचारी ने करीब ₹1.5 करोड़ की कीमती जमीन खरीद डाली, जबकि दूसरे संदिग्ध कर्मचारी ने ₹40 लाख का प्लॉट अपने नाम करवा लिया।
दूसरी ओर, हिरासत में लिए गए मुख्य आरोपी लवकुश मिश्रा के पिता बच्चूलाल ने अपने बेटे को पूरी तरह निर्दोष बताते हुए उसका बचाव किया है। पिता ने घर से 10 लाख रुपये नकद मिलने की बात तो स्वीकार की, लेकिन दावा किया कि यह रकम उन्होंने अपनी खेती की जमीन को गिरवी रखकर जुटाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि फैजाबाद में बन रहे नए मकान से उनके बेटे का कोई वास्ता नहीं है। फिलहाल पुलिस लवकुश और एक अन्य हिरासत में लिए गए कर्मचारी से कड़ाई से पूछताछ कर रही है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर SIT गठित, 7 दिनों में सौंपनी होगी रिपोर्ट
राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने इस मामले की संवेदनशीलता और करोड़ों राम भक्तों की आस्था को देखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल (SIT) से जांच कराने की लिखित मांग की थी। मुख्यमंत्री के निर्देश पर गृह विभाग ने तुरंत उच्च स्तरीय एसआईटी का गठन कर दिया है।
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एसआईटी अध्यक्ष: लखनऊ के मंडलायुक्त (Commissioner) विजय विश्वास पंत।
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एसआईटी सदस्य: वरिष्ठ आईपीएस (IPS) अधिकारी किरन एस और विशेष सचिव (वित्त) नील रतन।
इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी को 7 दिनों के भीतर अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट और 15 दिनों के भीतर पूरी विस्तृत अंतिम रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपने का कड़ा अल्टीमेटम दिया गया है। जांच टीमें वर्तमान में राम मंदिर परिसर के कई महीनों के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज और वित्तीय खातों के ऑडिट रिकॉर्ड को खंगाल रही हैं।
विनय कटियार और पवन पांडे ने जताई कड़ी नाराजगी, ट्रस्ट के पदाधिकारियों से मांगा इस्तीफा
राम मंदिर आंदोलन के अग्रदूत और भाजपा के वरिष्ठ नेता विनय कटियार ने इस घटना पर गहरा आक्रोश व्यक्त किया है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा, “राम मंदिर करोड़ों लोगों के संघर्ष, जेल जाने और पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह की कुर्सी के बलिदान का प्रतीक है। यहां किसी भी तरह का भ्रष्टाचार बिल्कुल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।” उन्होंने कहा कि वे स्वयं एसएसपी और डीआईजी से मिलकर दोषियों को कठोरतम सजा दिलाने की मांग करेंगे। दूसरी तरफ, यूपी के कैबिनेट मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि ट्रस्ट नियमों के अनुसार सख्त कदम उठा रहा है और किसी भी श्रद्धालु की आस्था के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा।
वहीं, राजनीतिक मोर्चे पर समाजवादी पार्टी के नेता और अयोध्या के पूर्व विधायक तेज नारायण पांडे उर्फ पवन पांडे ने मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने मांग की है कि निष्पक्ष जांच के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के बड़े पदाधिकारियों को तुरंत नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए अपने पदों से इस्तीफा दे देना चाहिए। उन्होंने याद दिलाया कि ट्रस्ट के सदस्य महिपाल सिंह ने पहले भी चढ़ावे में धांधली की आशंका जताई थी, जिसे तब दबा दिया गया था।












