राम मंदिर चोरी मामले में SIT की  रिपोर्ट से बड़ा खुलासा: नियमों की उड़ाई गईं धज्जियां, बड़े अफसरों और प्रभारी पर भी गिरेगी गाज

अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में रामलला के चढ़ावे की चोरी और गबन के मामले में उत्तर प्रदेश शासन को सौंपी गई विशेष जांच दल (SIT) की 9 पन्नों की प्रारंभिक रिपोर्ट ने कई और चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ किया है कि यह सिर्फ चंद कर्मचारियों की चोरी का मामला नहीं है, बल्कि ट्रस्ट की ओर से जारी एसओपी (SOP) और सुरक्षा व्यवस्था के पालन में बेहद गंभीर और अक्षम्य चूक हुई है। रिपोर्ट के अनुसार, बैंक और ट्रस्ट के बीच तय सुरक्षा प्रोटोकॉल का जमीन पर कोई पालन नहीं हो रहा था और गणना कक्ष में तैनात पर्यवेक्षकों व प्रभारियों ने आंखें मूंद रखी थीं, जिससे चोरों के हौसले बुलंद हुए।

डॉ. अनिल मिश्रा और प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका पर गंभीर सवाल

एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में निचले स्तर के चोरों के साथ-साथ ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों पर भी सीधा निशाना साधा है। रिपोर्ट में ट्रस्ट के पूर्व वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. अनिल मिश्रा और गणना कक्ष के प्रभारी सुभाष श्रीवास्तव की भूमिका को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए हैं। विशेष जांच दल के मुताबिक, मंदिर परिसर में सुरक्षा उपायों को सख्ती से लागू करने, नोटों की गिनती पर पैनी नजर रखने और एसओपी का शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित कराने की सीधी जिम्मेदारी इन्हीं के कंधों पर थी, लेकिन इनके स्तर पर घोर प्रशासनिक लापरवाही और पर्यवेक्षण विफलता (Supervision Failure) सामने आई है।

इन धाराओं के तहत FIR दर्ज करने की सिफारिश, अंतिम रिपोर्ट में होंगे और बड़े खुलासे

एसआईटी ने अपनी इस कड़क रिपोर्ट में साफ तौर पर संस्तुति की है कि चोरी में लिप्त पाए गए कर्मचारियों के खिलाफ केवल साधारण चोरी नहीं, बल्कि आपराधिक विश्वासघात, आपराधिक षड्यंत्र और अपराध को सुगम बनाने जैसी बेहद संगीन धाराओं में प्राथमिकी (FIR) दर्ज की जाए। इसके साथ ही, लापरवाही बरतने वाले जिम्मेदार अधिकारियों और पर्यवेक्षकों के खिलाफ भी कर्तव्य में लापरवाही और अपराध को बढ़ावा देने के आरोपों में सख्त कार्रवाई की सिफारिश की गई है। एसआईटी ने स्पष्ट किया है कि यह अभी सिर्फ प्रारंभिक रिपोर्ट है; आरोपियों से बरामदगी, फॉरेंसिक परीक्षण, बैंक खातों की विस्तृत स्क्रूटनी और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर अंतिम रिपोर्ट बाद में पेश की जाएगी, जिसमें कई और बड़े चेहरों पर फंदा कस सकता है।

कलयुगी कर्मचारियों का खेल: 70 बार कपड़ों और जूतों में छिपाए गए नोट

रिपोर्ट के मुताबिक, 27 अप्रैल से 5 जून 2026 के बीच के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज खंगालने पर गबन का एक खौफनाक पैटर्न सामने आया है। इस दौरान लगभग 70 ऐसी संदिग्ध घटनाएं कैमरे में कैद हुईं, जहां नोट गिनने वाले कर्मचारी नोटों की पूरी-पूरी गड्डियां और खुले पैसे अपने कपड़ों, अंतःवस्त्रों, जेबों और यहां तक कि जूतों के अंदर छिपाते हुए रंगे हाथों दिखाई दिए। एसआईटी का कहना है कि यह कोई अचानक हुई चोरी नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी कार्यप्रणाली थी जिसे लगातार दोहराया जा रहा था। इस खेल में अविनाश शुक्ला, अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा, मनीष कुमार यादव, करुणेश पाण्डेय और रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू को मुख्य रूप से प्रथम दृष्टया संलिप्त और दोषी माना गया है।

सिफारिशों पर होती थीं बैकडोर नियुक्तियां, तलाशी का नियम था गायब

जांच में एक और बेहद परेशान करने वाला तथ्य यह सामने आया है कि इन दागी गणनाकर्मियों की नियुक्तियां बिना किसी कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के, सिर्फ रसूखदारों की सिफारिशों पर की जा रही थीं। मुख्य आरोपियों में से एक मनीष कुमार यादव की नियुक्ति भी रामाशंकर यादव उर्फ टिन्नू की मजबूत सिफारिश पर हुई थी। एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में उन 4 बड़ी वजहों को रेखांकित किया है, जिनके कारण यह घोटाला संभव हो पाया:

  • तलाशी की कमी: गणना कक्ष (Counting Room) में प्रवेश करते समय और बाहर निकलते वक्त कर्मचारियों की कोई शारीरिक तलाशी (Frisking) नहीं ली जाती थी।

  • ड्रेस कोड का उल्लंघन: बिना जेब वाली निर्धारित वर्दी का नियम सिर्फ कागजों पर था, प्रैक्टिकल में कर्मचारी अपनी मर्जी के कपड़ों में आ रहे थे।

  • निजी सामान पर छूट: कक्ष के भीतर मोबाइल फोन, बैग और निजी सामान ले जाने पर कोई प्रभावी प्रतिबंध नहीं था।

  • कमजोर सीसीटीवी मॉनिटरिंग: कैमरे चालू तो थे, लेकिन उनकी लाइव मॉनिटरिंग और प्रभावी उपयोग करने वाला कोई नहीं था।

फिलहाल, इन सभी आरोपियों के बैंक खातों में उनकी वैध आय से कई गुना अधिक नकदी जमा होने के पुख्ता सबूत मिल चुके हैं, जिसकी गहन जांच जारी है।

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