107 दिन बाद थमी ‘महाजंग’: अमेरिका-ईरान में हुआ ऐतिहासिक शांति समझौता, 19 जून को स्विट्जरलैंड में होंगे दस्तखत, सामने आईं बड़ी शर्तें!

वाशिंगटन/तेहरान। पश्चिम एशिया (मिडल ईस्ट) से इस वक्त की सबसे बड़ी और राहत भरी वैश्विक खबर आ रही है। पिछले 107 दिनों से अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा भीषण युद्ध आखिरकार खत्म हो गया है। दोनों महाशक्तियों ने आधिकारिक रूप से ऐलान कर दिया है कि उनके बीच शांति समझौते (Peace Treaty) को लेकर चल रही बातचीत पूरी तरह फाइनल हो चुकी है। इस ऐतिहासिक महासमझौते पर आगामी शुक्रवार, 19 जून को स्विट्जरलैंड की सरजमीं पर दोनों देशों के शीर्ष प्रतिनिधि आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करेंगे। अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के जानकार इसे पश्चिम एशिया में स्थायी शांति की दिशा में अब तक का सबसे बड़ा और क्रांतिकारी कदम मान रहे हैं, क्योंकि इस फैसले से पिछले कई महीनों से पूरी दुनिया को डरा रहे युद्ध के बादल छंट जाएंगे।

सामने आया 14 सूत्रीय शांति समझौते का मसौदा: ईरानी मीडिया का बड़ा दावा

हालांकि, दोनों देशों की सरकारों ने अभी तक इस समझौते की सभी आधिकारिक शर्तों को पूरी तरह सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन ईरानी मीडिया ने इस गुप्त मसौदे (ड्राफ्ट) की सबसे अहम और चौंकाने वाली बातें दुनिया के सामने रख दी हैं। ईरान के सरकारी और अर्ध-सरकारी मीडिया संस्थान ‘मेहर न्यूज एजेंसी’ के मुताबिक, अमेरिका और ईरान के बीच कुल 14 बिंदुओं वाले एक बेहद महत्वपूर्ण समझौता ज्ञापन (MoU) पर सहमति बनी है। इस ड्राफ्ट में युद्ध को हमेशा के लिए रोकने और दोनों देशों के रिश्तों को पूरी तरह बदलने की बड़ी रूपरेखा तैयार की गई है।

लेबनान समेत सभी मोर्चों पर तुरंत सीजफायर, अमेरिकी नौसेना हटेगी पीछे

ईरानी मीडिया द्वारा लीक किए गए इस मसौदे के मुताबिक, समझौते के लागू होते ही लेबनान सहित सभी युद्धग्रस्त मोर्चों पर स्थायी युद्धविराम (Permanent Ceasefire) लागू कर दिया जाएगा। इसके साथ ही अमेरिका ने यह बड़ा लिखित वादा किया है कि वह भविष्य में कभी भी ईरान के आंतरिक राजनीतिक मामलों में किसी भी तरह का हस्तक्षेप या दखलअंदाजी नहीं करेगा। वैश्विक व्यापार के लिहाज से सबसे बड़ी शर्त यह है कि अमेरिका अगले 30 दिनों के भीतर सामरिक रूप से बेहद संवेदनशील ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ (Hormuz Strait) से अपनी नौसैनिक नाकेबंदी को पूरी तरह से हटा लेगा और अपनी सेनाओं को ईरान की सीमाओं से वापस बुलाएगा।

प्रतिबंध होंगे खत्म, ईरान के पुनर्निर्माण के लिए अमेरिका देगा 300 अरब डॉलर

इस शांति समझौते के मसौदे में ईरान की अर्थव्यवस्था को दोबारा पटरी पर लाने के लिए बेहद कड़े प्रावधान किए गए हैं। लीक हुई शर्तों के अनुसार, ईरान के तेल और ऊर्जा उत्पादों के निर्यात पर दुनिया भर में लगे सभी तरह के कड़े प्रतिबंधों को तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया जाएगा। इतना ही नहीं, अमेरिका और उसके सहयोगी पश्चिमी देश युद्ध से तबाह हुए ईरान के पुनर्निर्माण (Reconstruction) के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर (लगभग 25 लाख करोड़ रुपये) का भारी-भरकम फंड और विकास योजनाएं पेश करेंगे। इसके बदले में ईरान दुनिया के सामने दोबारा यह कड़ा संकल्प दोहराएगा कि वह कभी भी परमाणु हथियार (Nuclear Weapons) नहीं बनाएगा। वहीं, अमेरिका भी क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी न बढ़ाने और ईरान पर कोई नया प्रतिबंध न लगाने की गारंटी देगा।

UN सुरक्षा परिषद की मुहर और 12 बिलियन डॉलर की ‘अग्रिम शर्त’

‘मेहर न्यूज एजेंसी’ ने अपनी खोजी रिपोर्ट में इस बात का भी खुलासा किया है कि इस समझौते पर अंतिम मुहर लगाने से पहले ईरान ने अमेरिका के सामने एक बेहद सख्त शर्त रखी थी। ईरान का साफ कहना था कि जब तक विदेशों में जब्त की गई उसकी कुल संपत्ति (Frozen Funds) का कम से कम आधा हिस्सा यानी 12 बिलियन डॉलर (12 अरब डॉलर) तुरंत रिलीज नहीं किया जाता, तब तक वह अंतिम टेबल पर नहीं बैठेगा। इसके साथ ही ईरानी तेल से प्रतिबंध हटाने और नौसैनिक नाकेबंदी को तुरंत खत्म करने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी। इस ऐतिहासिक अंतिम समझौते को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वैध बनाने के लिए संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक विशेष प्रस्ताव के जरिए आधिकारिक मंजूरी दी जाएगी।

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