बाल दिवस पर कवियों ने किया चाचा नेहरू का स्मरण

आरत स्वर से बाल पुकारें चाचा नेहरू आओ

भास्कर समाचार सेवा
हाथरस/सासनी। नगर की बुजुर्गों व कवियों की सामाजिक साहित्यिक संस्था साहित्यानंद के तत्वावधान और योगेश त्रिवेदी की अध्यक्षता में आयोजित कवि गोष्ठी के माध्यम से कवियों ने भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं.जवाहर लाल नेहरू का काव्यात्मक स्मरण किया।रविराज सिंह के संजय कालौनी स्थित आवास पर हुई कवि गोष्ठी का शुभारंभ अध्यक्ष द्वारा मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन करने व पं.जवाहर लाल नेहरू के चित्र पर माल्यार्पण करने के बाद वीरेन्द्र जैन नारद की सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात उन्होंने सुनाया- जिनके आगे अंग्रेजों की गली कभी ना दाल आजादी के परवाने थे वीर जवाहर लाल
इसके बाद विष्णु कुमार शर्मा ने सुनाया-बाल दिवस पर बच्चों ने अपने ही बाल कटवा डाले
बाल कटिंग का दिवस समझ कर बाल सभी मुड़वा डाले
इसके बाद योगेश त्रिवेदी ने सुनाया- सुबह हो या शाम सभी को मिले दोस्तो काम ये चाचा नेहरू का पैगाम करो ना पल भर भी आराम क्योंकि आराम है हराम
इसके बाद कवि राम निवास उपाध्याय ने सुनाया-आरत स्वर से बाल पुकारें चाचा नेहरू आओ बाल श्रमिक आंदोलन क्या है सच्चा कर दिखलाओ
मुरारी लाल शर्मा मधुर ने सुनाया-आज भी सुयश के शरीर से सुजीवित है यद्यपि विनिष्ट हुआ भौतिक बदन है
इसके उपरांत वीरपाल सिंह वीर ने सुनाया-बाबा कह गए नाती से ऐसा कलियुग आएगा जो आनंद साली संग घरवाली को भूल जाएगा
इसके पश्चात रविराज सिंह ने सुनाया- आदमी को आदमी बनाने के लिए
स्याही नहीं आंखों वाला पानी चाहिए।
इसके बाद अध्यक्षीय उद्बोधन के साथ ही कविगोष्ठी का औपचारिक समापन हो गया।

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