
पांच हजार साल गुजरने के बाद मंदिर परिसर में मौजूद है खिरनी के पेड़
भास्कर समाचार सेवा
मेरठ। सूरजकुंड स्थित बाबा मनोहरनाथ मंदिर की प्राचीनता और ऐतिहासिकता सदियों पुरानी है। किवदंती है, अज्ञातवाश के दौरान पांडव यहां रूके थे। इस दौरान पांडवों ने मंदिर परिसर में सात खिरनी के पौधे लगाए थे, जो आज विशालकाय पेड़ के रूप में खड़े हैं। महामंडलेश्वर पीठाधीश्वर श्रीश्री 108 नीलिमानंद महाराज बताती हैं, इतिहास के पन्नों को पलटकर देखे तो सामने आएगा कि अंग्रेजों ने सैकड़ों क्रांतिकारियों को इन्हीं पेड़ों पर फांसी दी थी। क्रांतिकारी इन पेड़ों के नीचे बैठकर रणनीति बनाते थे।
दैनिक भास्कर से विशेष बातचीत के दौरान मां नीलिमानंद महाराज ने बताया, अज्ञातवाश के दौरान पांडव हस्तिनापुर से निकलकर मेरठ की धरती पर आए थे। वे यहां कई स्थानों पर रूके थे। सैनी गांव में भी पांडवों ने अपना पड़ाव किया था। बताया जाता है, सैनी में भी पांडवों ने खिरनी के पेड़ लगाए थे और पांच शिव लिंग स्थापित किए थे। पांडव जहां भी रूके इस दौरान उन्होंने खिरनी के पौधे वहां जरूर लगाए। उन्होंने बताया, खिरनी पेड़ की विशेषता ये है कि जो इसका पौधा लगाता है, पेड़ होने पर वो खिरनी का फल नहीं खा सकता। क्योंकि फल आने में लगभग सौ साल लग जाते हैं। इसका फल काफी मीठा होता है। खिरनी के पेड़ पर सितम्बर से दिसम्बर के महीनों में फूल उगते हैं और मार्च-अप्रैल से जून के महीनें में फल लगते हैं। बारीश आने पर इसका मौसम पूरा होता है। बरसात की छीटे पड़ते ही इसके फल में कीड़े पड़ जाते हैं। खिरनी का पेड़ काफी सालों तक टिका रहता है। खिरनी के पेड़ कई जगहों हजारों साल पुराने तक देखे गये हैं। इसकी लकड़ी को बुढ़े लोग हाथ में लेकर चलने के लिए उपयोग करते हैं। खिरनी की टहनी से दूध निकलता हैं। बच्चे को कृमी होने पर इसका दूध चटाते हैं। माता को दूध कम होने पर खिरनी के फल खाने को देते हैं।
खिरनियों के पेड़ों पर क्रांतिकारियों को दी गई थी फांसी
मां नीलिमानंद महाराज ने बताया, सूरजकुंड मनोहर नाथ मंदिर का इतिहास हजारों साल पुराना है। जब पांडव अज्ञातवाश में थे, तब भी यह मंदिर था। क्योंकि इस दौरान पांडव यहां आए थे और मंदिर परिसर में खिरनी के पौधों को लगाया था। इन खिरनियों के पेड़ों को लगभग पांच हजार साल हो चुके हैं। ये पेड़ आज भी यहां खड़े हैं। उन्होंने बताया, 1857 की क्रांति का आगाज भी यहीं से हुआ था। सैकड़ों क्रांतिकारियों को इन्हीं पेड़ों पर अंग्रेजों ने फांसी पर लटकाया था।
मां नीलिमा ने बतायी खिरनी के पेड़ की खूबियां
खिरनी के पेड़ों की खूबियों के बारे में मां नीलिमानंद ने विस्तार से बताया, जिसका चंद्रमा कमजोर हो वह इस पेड़ की जड़ बांध ले उसे आराम मिल जाएगा। दांतों की समस्या के लिए इस पेड़ की छाल काफी फायदेमंद है, छाल को एक लीटर पानी में खूब उबाल ले, जब पानी का एक हिस्सा रह जाए तब उसको पिए। इन खूबियों के लिए अलावा भी कई फायदे मां नीलिमा ने खिरनी के बताए।













