
भास्कर समाचार सेवा
मेरठ। विधि अध्ययन संस्थान, चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय व अंतर्राष्ट्रीय सहयोग परिषद के संयुक्त तत्वावधान में मूट कोर्ट हॉल में पूवोत्तर भारत और दक्षिण पूर्वी एशियाई देशों को मुगल सम्राज्य से बचाने में ‘लाचित बड़फूकन का योगदान’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ सरस्वती माँ के सम्मुख अतिथियों द्वारा दीप प्रज्जविलत कर किया गया। अनिल गुप्ता ने मंच का परिचय व विषय की रूपरेखा की जानकारी दी। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के क्षेत्र प्रचार प्रमुख पदम द्वारा लाचित बडफूकन के जन्म पर प्रकाश डालते हुए कहा, लाचित बड़फूकन ने सन 1671 में औरंगजेब की सेना को हराकर अपनी संस्कृति व सभ्यता को हानि होने से रोका तथा पूवोत्तर राज्य को सुरक्षित किया। उन्होंने लाचित बड़फूकन को पूर्वोत्तर राज्य का छत्रपति शिवाजी बताया। कैसे उन्होंने बड़फूकन की उपाधि प्राप्त की विषय पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम की विशिष्ट अतिथि प्रो. वाई विमला ने कहा, आज के समय में भारत बदल रहा है। जिन क्रांतिकारियों ने आजादी में योगदान दिया और जिनका वर्णन इतिहास में नहीं है, उन क्रांतिकारियों पर इस तरह की संगोष्ठी का आयोजन किया जाना चाहिए और आज की युवा पीढ़ी को उनके जीवन से प्रेरणा लेनी चाहिए। प्रो. रूप नारायण ने अपने अध्यक्षीय भाषण में कहा, जब व्यक्ति अपने संस्कृति व संस्कार को भूलता है तो वह देश पिछड़ जाता है। संस्थान के समन्वयक डा. विवेक कुमार ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों व विद्यार्थियों का धन्यवाद ज्ञापित किया। डॉ. अपेक्षा चौधरी ने संचालन किया। कार्यक्रम में शिक्षक सुदेशना, आशीष कौशिक, डॉ. विकास कुमार, डॉ. धनपाल सिंह, डॉ. महिपाल सिंह, डॉ. मीनाक्षी, शेख अरशद, अपूर्व मित्तल आदि उपस्थित रहें।














