अब मंगल पर नहीं चांद पर पहली मानव बस्ती बसाने में जुटे एलन मस्क…जानें क्यों बदला दुनिया के सबसे अमीर शख्स ने अपना इरादा

वॉशिंगटन/टेक्सास। अंतरिक्ष की दुनिया में क्रांति लाने वाले स्पेसएक्स (SpaceX) के संस्थापक एलन मस्क ने अपने सबसे बड़े सपने ‘मिशन मार्स’ को लेकर रणनीति में हैरान करने वाला बदलाव किया है। मंगल ग्रह पर मानव बस्ती बसाने की जिद पर अड़े मस्क ने अब अपना पूरा फोकस चंद्रमा (Moon) की ओर मोड़ दिया है। मस्क का मानना है कि मंगल की तुलना में चांद पर इंसानी शहर बसाना न केवल अधिक व्यावहारिक है, बल्कि यह बेहद कम समय में संभव हो सकता है। मस्क के इस यू-टर्न ने ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री में हलचल मचा दी है।

मंगल की तुलना में चांद पर 10 साल पहले बसेगी बस्ती

एलन मस्क ने अपने हालिया संबोधन में स्पष्ट किया कि जहां मंगल ग्रह पर एक आत्मनिर्भर शहर विकसित करने में कम से कम 20 साल का वक्त लग सकता है, वहीं चांद पर यह लक्ष्य अगले 10 वर्षों में हासिल किया जा सकता है। मस्क के मुताबिक, मंगल की दूरी और वहां की विषम परिस्थितियां फिलहाल एक बड़ी चुनौती हैं, जबकि चांद पृथ्वी के इतना नजदीक है कि वहां हर 10 दिन में मिशन भेजा जा सकता है। तकनीकी और आर्थिक दोनों मोर्चों पर चंद्र मिशन अब मस्क की पहली प्राथमिकता बन गया है।

क्यों पिछड़ गया ‘लाल ग्रह’? ये हैं 3 बड़ी वजहें

मस्क ने मंगल मिशन की राह में आने वाली बाधाओं का जिक्र करते हुए बताया कि वहां का वातावरण न केवल जहरीला है, बल्कि तापमान भी हड्डियों को जमा देने वाला होता है।

  • दूरी और समय: पृथ्वी और मंगल के बीच लॉन्च विंडो हर 26 महीने में सिर्फ एक बार खुलती है, जिससे रसद और मानव भेजना सीमित हो जाता है।
  • खतरनाक वातावरण: मंगल पर ऑक्सीजन की कमी और घातक रेडिएशन इंसानों के लिए बड़ा खतरा हैं।
  • आसान पहुंच: इसके विपरीत, चांद पर आना-जाना आसान है और वहां से पृथ्वी के साथ संपर्क साधना कहीं ज्यादा सरल है।

“सेल्फ-ग्रोन सिटी”: रोबोट्स तैयार करेंगे इंसानों के लिए घर

एलन मस्क की नई योजना के अनुसार, चांद पर एक “सेल्फ-ग्रोन सिटी” (Self-Grown City) विकसित की जाएगी। पहले मस्क ने मंगल पर ह्यूमनॉइड रोबोट्स भेजने की बात कही थी, लेकिन अब ये रोबोट्स चांद की सतह पर बुनियादी ढांचा तैयार करेंगे। मस्क का मानना है कि चांद पर शहर बसाने का अनुभव आगे चलकर मंगल मिशन के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ का काम करेगा। हालांकि, उन्होंने साफ किया कि मंगल पर 2050 तक 10 हजार लोगों को बसाने का सपना अभी टूटा नहीं है, बस उसकी प्राथमिकता बदली गई है।

मानवता के भविष्य के लिए ‘प्लान-बी’ है जरूरी

मस्क ने दोहराया कि मानव सभ्यता की दीर्घकालिक सुरक्षा के लिए पृथ्वी के अलावा अन्य ग्रहों पर आत्मनिर्भर बस्तियां होना अनिवार्य है। स्पेसएक्स की हालिया रिपोर्टों से संकेत मिलते हैं कि कंपनी अब अपने सबसे शक्तिशाली रॉकेट ‘स्टारशिप’ का इस्तेमाल चंद्र अभियानों के लिए तेज करेगी। मस्क का यह फैसला नासा (NASA) के ‘आर्टिमिस मिशन’ के साथ भी मेल खाता दिख रहा है, जिससे चांद पर इंसानी चहल-पहल बढ़ने की उम्मीद और पुख्ता हो गई है। 

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