
दुबई/नई दिल्ली। पश्चिम एशिया (Middle East) में गहराते युद्ध के बादलों ने वैश्विक बुलियन मार्केट में खलबली मचा दी है। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का एक बेहद हैरान करने वाला असर दुबई के गोल्ड मार्केट में देखने को मिल रहा है। जहां एक ओर युद्ध के समय सोने की कीमतें आसमान छूती हैं, वहीं दुनिया के ‘गोल्ड हब’ कहे जाने वाले दुबई में सोना अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क कीमतों की तुलना में भारी डिस्काउंट पर बिक रहा है। ताजा रिपोर्ट्स के मुताबिक, दुबई के ट्रेडर्स वैश्विक कीमतों से करीब 30 डॉलर प्रति औंस (भारतीय मुद्रा में लगभग 2,700 से 2,800 रुपये) तक की छूट दे रहे हैं।
सप्लाई चेन टूटी तो ट्रेडर्स ने घटा दिए दाम
जानकारी के अनुसार, 8 मार्च की सुबह दुबई में सोने का भाव लगभग 5,173.73 डॉलर प्रति औंस दर्ज किया गया था। एक्सपर्ट्स का कहना है कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के कारण कई देशों ने अपना एयरस्पेस (हवाई क्षेत्र) आंशिक रूप से बंद कर दिया है, जिससे दर्जनों उड़ानें रद्द हो गई हैं। आमतौर पर सोने की इंटरनेशनल शिपमेंट यात्री विमानों के कार्गो होल्ड के जरिए भेजी जाती है। उड़ानों पर पाबंदी लगने से दुबई से होने वाला सोने का निर्यात पूरी तरह ठप पड़ गया है, जिसके चलते वहां स्टॉक जमा हो गया है और व्यापारी इसे निकालने के लिए भारी डिस्काउंट का सहारा ले रहे हैं।
शिपिंग और इंश्योरेंस लागत ने बढ़ाई टेंशन
युद्ध की स्थिति में केवल उड़ानें ही प्रभावित नहीं हुई हैं, बल्कि शिपिंग और इंश्योरेंस की लागत में भी भारी उछाल आया है। डिलीवरी में अनिश्चितता को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय खरीदार नए ऑर्डर देने से कतरा रहे हैं। दुबई के व्यापारियों पर स्टोरेज और फाइनेंसिंग का बोझ बढ़ता जा रहा है। इसी दबाव के कारण वे अपने पास मौजूद सोने के स्टॉक को अंतरराष्ट्रीय कीमतों से कम दर पर बेचने को मजबूर हैं। दुबई लंबे समय से स्विट्जरलैंड, ब्रिटेन और अफ्रीकी देशों से आने वाले सोने के लिए एक प्रमुख रिफाइनिंग और ट्रेडिंग सेंटर रहा है, लेकिन मौजूदा संकट ने इस पूरी चेन को हिलाकर रख दिया है।
भारतीय बाजार पर क्या होगा असर?
भारत जैसे दुनिया के सबसे बड़े स्वर्ण उपभोक्ता देश के लिए यह स्थिति दोधारी तलवार जैसी है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि फिलहाल भारत में स्थिति गंभीर नहीं है क्योंकि जनवरी के दौरान देश में सोने का आयात काफी अच्छा रहा था, जिससे पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। हालांकि, अगर दुबई से सप्लाई में यह बाधा लंबे समय तक बनी रहती है, तो आने वाले महीनों में भारतीय बाजार में भी भौतिक सोने की उपलब्धता कम हो सकती है और कीमतों पर दबाव बढ़ सकता है। फिलहाल भारतीय सर्राफा बाजार की नजरें पूरी तरह से मिडिल ईस्ट के घटनाक्रमों पर टिकी हुई हैं।














