क्या टल जाएगा तेल का संकट? ईरान-इजरायल युद्ध के बीच भारत की बड़ी कूटनीतिक चाल…..जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री को किया फोन….

नई दिल्ली: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बारूद की ढेर पर बैठी दुनिया के बीच भारत ने अपनी शांति दूत की भूमिका सक्रिय कर दी है। ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच छिड़े भीषण सैन्य संघर्ष ने जहां वैश्विक अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी है, वहीं भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने मोर्चा संभाल लिया है। इसी कड़ी में जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से टेलीफोन पर लंबी और विस्तृत बातचीत की है। यह चर्चा ऐसे नाजुक मोड़ पर हुई है जब समंदर से लेकर जमीन तक सिर्फ जंग के बादल छाए हुए हैं।

मोजतबा खामेनेई के दौर में पहली बड़ी बातचीत

ईरान में सत्ता परिवर्तन और अयातुल्ला अली खामेनेई की एक सैन्य हमले में मृत्यु के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता नियुक्त किया गया है। इस बड़े बदलाव के बाद भारत और ईरान के बीच यह पहली उच्च स्तरीय वार्ता है। इजरायल और अमेरिका के संयुक्त हमलों के बाद पैदा हुए हालातों पर दोनों नेताओं के बीच यह तीसरी महत्वपूर्ण चर्चा थी। ईरानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, इस बातचीत का केंद्र बिंदु न केवल युद्ध था, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी रहा।

समुद्री सुरक्षा और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

ईरानी विदेश मंत्री अराघची ने बातचीत के दौरान समुद्री सुरक्षा का मुद्दा बेहद तल्खी के साथ उठाया। उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य और फारस की खाड़ी में पैदा हुई अस्थिरता के लिए सीधे तौर पर वाशिंगटन और तेल अवीव को जिम्मेदार ठहराया। ईरान ने दो टूक शब्दों में कहा है कि अमेरिका की आक्रामक नीतियों के कारण ही वैश्विक जलमार्ग असुरक्षित हुए हैं। दूसरी ओर, डॉ. जयशंकर ने सोशल मीडिया पर इस वार्ता की पुष्टि करते हुए संकेत दिया कि भारत क्षेत्र में शांति बहाली के लिए निरंतर संपर्क बनाए रखने के पक्ष में है।

भारत के लिए क्यों लगा है दांव पर बहुत कुछ?

पश्चिम एशिया का यह संकट सीधे तौर पर भारतीय रसोई और जेब पर असर डाल रहा है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% तेल आयात करता है। चूंकि होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया का 20% तेल व्यापार होता है और ईरान ने इस मार्ग को लगभग अवरुद्ध कर दिया है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में आग लग गई है। सप्लाई चेन टूटने का सीधा खतरा भारतीय अर्थव्यवस्था पर मंडरा रहा है। इसके अलावा, खाड़ी देशों में रहने वाले करीब एक करोड़ भारतीय नागरिकों की सुरक्षा मोदी सरकार के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता बनी हुई है।

दुनिया के अन्य दिग्गजों से भी साधा संपर्क

भारत केवल ईरान तक ही सीमित नहीं है। डॉ. जयशंकर ने वैश्विक स्तर पर दबाव बनाने के लिए जर्मनी के विदेश मंत्री जोहान वाडेफुल और दक्षिण कोरिया के विदेश मंत्री चो ह्यून से भी संवाद किया है। भारत का स्टैंड बिल्कुल साफ है कि व्यापारिक जहाजों पर हमले किसी भी कीमत पर स्वीकार्य नहीं हैं। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपील की है कि हिंसा को तत्काल रोककर केवल कूटनीति और बातचीत के जरिए ही इस महासंकट का हल निकाला जाना चाहिए।

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