ईरान से जंग के बीच ट्रंप का बड़ा खुलासा: ‘परमाणु हथियारों’ के इस्तेमाल पर कही ये बात, बताया क्यों नहीं फोड़े ईरान के तेल कुएं!

वॉशिंगटन: मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव और इजराइल-ईरान के बीच छिड़ी जुबानी जंग के बीच अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का एक बेहद महत्वपूर्ण बयान सामने आया है। ट्रंप ने उन कयासों को सिरे से खारिज कर दिया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि इजराइल, ईरान के खिलाफ परमाणु हथियारों का उपयोग कर सकता है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए ट्रंप ने बड़े ही आत्मविश्वास के साथ कहा, “मुझे नहीं लगता कि इजराइल ऐसा कदम उठाएगा। इजराइल कभी ऐसा नहीं करेगा।”

क्यों उठी परमाणु हमले की चर्चा?

दरअसल, यह चर्चा तब शुरू हुई जब हाल ही में व्हाइट हाउस में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और क्रिप्टो मामलों के प्रमुख डेविड सैक्स ने एक इंटरव्यू में चिंता जताई थी। सैक्स ने आगाह किया था कि दुनिया को इस बात की फिक्र होनी चाहिए कि इजराइल युद्ध को और भीषण बनाने के लिए परमाणु विकल्पों पर विचार कर सकता है। ट्रंप की ताजा टिप्पणी ने फिलहाल इन आशंकाओं पर विराम लगाने की कोशिश की है।

सैन्य तालमेल पर ट्रंप का स्टैंड

ट्रंप ने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका और इजराइल के सैन्य लक्ष्य काफी हद तक एक जैसे हैं, हालांकि उन्होंने यह स्वीकार करने में संकोच नहीं किया कि दोनों देशों के उद्देश्य शत-प्रतिशत समान नहीं हो सकते। एयर फोर्स वन विमान में चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि हमारी सेनाओं के बीच बेहतरीन तालमेल है और संबंध बहुत मजबूत हैं।

खर्ग द्वीप: तबाही से क्यों बचाए तेल के पाइप?

ईरान की आर्थिक कमर कहे जाने वाले खर्ग द्वीप (Kharg Island) को लेकर भी ट्रंप ने बड़ा खुलासा किया। उन्होंने बताया कि अमेरिकी कार्रवाई में द्वीप की अन्य सुविधाओं को तो निशाना बनाया गया, लेकिन तेल के बुनियादी ढांचे यानी ‘पाइपों’ को जानबूझकर छोड़ दिया गया। ट्रंप के मुताबिक, “हमने पाइपों को सुरक्षित रखा क्योंकि हम भविष्य में ईरान के पुनर्निर्माण की गुंजाइश रखना चाहते थे। मुझे लगता है कि हमने सही किया, लेकिन यह स्थिति हमेशा ऐसी ही रहे, यह जरूरी नहीं।”

5 मिनट का अल्टीमेटम और ईरान की आर्थिक जीवनरेखा

डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अगर जरूरत पड़ी तो इन तेल क्षेत्रों को नष्ट करने में महज 5 मिनट का वक्त लगेगा। बता दें कि खर्ग द्वीप ईरान के लिए कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ईरान के कुल कच्चे तेल का लगभग 90% निर्यात इसी छोटे से द्वीप से होता है। अगर यहां हमला होता है, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और मध्य-पूर्व की स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

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