ईरान-इजराइल जंग का भारत पर बड़ा असर: पेट्रोल-डीजल की सप्लाई को लेकर तेल कंपनियों ने बदला नियम, अब बिना एडवांस नहीं मिलेगा तेल

ईरान और इजराइल के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने अब भारत की रसोई से लेकर सड़कों तक खलबली मचा दी है। एलपीजी गैस की सप्लाई पर मंडराते संकट के बाद अब इसकी तपिश पेट्रोल पंपों तक पहुंच गई है। देश की प्रमुख सरकारी तेल कंपनियों ने पेट्रोल पंप मालिकों के लिए सप्लाई के नियमों में बड़ा बदलाव करते हुए ‘क्रेडिट सिस्टम’ को पूरी तरह खत्म कर दिया है। इस फैसले के बाद अब पेट्रोल पंपों को तेल की सप्लाई तभी मिलेगी जब वे पहले भुगतान करेंगे। विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनियों का यह सख्त रुख आने वाले दिनों में आम आदमी की जेब और ईंधन की उपलब्धता पर भारी पड़ सकता है।

सप्लाई चेन पर मंडराया खतरा, कंपनियों ने खींचे हाथ

दरअसल, पश्चिम एशिया में जारी युद्ध के कारण ओमान की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों पर भारी तनाव है। भारत अपनी जरूरत का लगभग 40 प्रतिशत तेल इसी रूट से मंगवाता है। सप्लाई चेन में पैदा हुई इसी अनिश्चितता को देखते हुए भारत पेट्रोलियम (BPCL) और हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) ने पिछले हफ्ते से ही एडवांस पेमेंट सिस्टम लागू कर दिया था। वहीं, देश की सबसे बड़ी तेल कंपनी इंडियन ऑयल (IOCL) ने भी सोमवार से अपनी 5 दिनों की क्रेडिट पॉलिसी को सस्पेंड कर दिया है। अब पंप मालिकों को तेल मंगवाने के लिए ‘पहले पैसा, फिर तेल’ के सिद्धांत पर काम करना होगा।

एक लाख पेट्रोल पंपों पर सीधा असर, बढ़ सकती है किल्लत

तेल कंपनियों के इस औचक फैसले का असर देश भर के करीब एक लाख से ज्यादा पेट्रोल पंपों पर पड़ने वाला है। अब तक पेट्रोल पंप डीलर्स को शॉर्ट टर्म क्रेडिट मिलता था, जिससे वे तेल बेचने के बाद भुगतान कर पाते थे। लेकिन अब वर्किंग कैपिटल की कमी के चलते छोटे पेट्रोल पंप मालिकों के सामने स्टॉक बनाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई है। भारतीय पेट्रोलियम डीलर्स संगठन के मुताबिक, क्रेडिट लाइन बंद होने से डीलर्स पर आर्थिक दबाव बढ़ गया है। अगर डीलर्स समय पर एडवांस फंड नहीं जुटा पाए, तो कई इलाकों में पेट्रोल-डीजल की किल्लत भी देखने को मिल सकती है।

केवल पेट्रोल पंप ही नहीं, उद्योगों और खेती पर भी मार

सरकारी तेल कंपनियों ने अपनी सख्ती केवल रिटेल पेट्रोल पंपों तक ही सीमित नहीं रखी है। रिपोर्ट के अनुसार, अब एग्रीकल्चर सेक्टर के थोक खरीदारों, बड़े ट्रांसपोर्टर्स और औद्योगिक इकाइयों को भी उधारी पर तेल देना बंद कर दिया गया है। भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल उपभोक्ता देश है और अगले वित्त वर्ष में यहां तेल की खपत 26 करोड़ टन तक पहुंचने का अनुमान है। ऐसे में युद्ध के कारण उपजे इस वित्तीय और लॉजिस्टिक संकट ने सरकार की चिंताएं बढ़ा दी हैं। हालांकि, पेट्रोलियम मंत्रालय ने अभी तक इस पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है, लेकिन जमीनी स्तर पर डीलर्स ने इस नए सिस्टम की पुष्टि कर दी है।

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