विश्व युद्ध की आहट! अमेरिका-इजरायल का ईरान के परमाणु केंद्र ‘नतान्ज’ पर हमला, जवाब में ईरान का पलटवार

 तेहरान/वाशिंगटन। पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष अब नियंत्रण से बाहर होकर वैश्विक युद्ध की शक्ल लेता दिख रहा है। शनिवार सुबह ईरान की तस्नीम समाचार एजेंसी ने सनसनीखेज दावा किया कि अमेरिका और इजरायल की सेनाओं ने ईरान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ‘नतान्ज यूरेनियम संवर्धन केंद्र’ पर बड़ा हमला किया है। इस हमले के जवाब में ईरान ने भी आक्रामक रुख अपनाते हुए हिंद महासागर में स्थित अमेरिका और ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे ‘डिएगो गार्सिया’ पर मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दाग दी हैं।

नतान्ज परमाणु केंद्र पर हमला: क्या फैला है रेडियोएक्टिव रिसाव?

ईरान की सरकारी एजेंसियों के अनुसार, नतान्ज परमाणु सुविधा केंद्र को निशाना बनाकर किए गए इस हमले के बाद विशेषज्ञों की टीम ने तुरंत जांच शुरू कर दी है। राहत की बात यह है कि शुरुआती तकनीकी जांच में किसी भी तरह के रेडियोएक्टिव रिसाव (रेडियोधर्मी रिसाव) की पुष्टि नहीं हुई है। एजेंसी ने बयान जारी कर कहा, “सुविधा केंद्र के आसपास रहने वाले स्थानीय निवासियों को फिलहाल कोई खतरा नहीं है।” हालांकि, ईरान ने इस कार्रवाई को अंतरराष्ट्रीय परमाणु सुरक्षा और संरक्षा नियमों का घोर उल्लंघन करार दिया है।

हिंद महासागर में ईरान का पलटवार: डिएगो गार्सिया निशाने पर

ईरान ने इस हमले का बदला लेने के लिए अपनी सीमाओं के पार जाकर प्रहार किया है। एक अमेरिकी अधिकारी के मुताबिक, ईरान ने हिंद महासागर में स्थित अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण सैन्य बेस ‘डिएगो गार्सिया’ को निशाना बनाकर दो मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। यह सैन्य ठिकाना ईरान के तट से लगभग 3,810 किलोमीटर (2,370 मील) दूर है। हालांकि, रिपोर्ट के अनुसार ये मिसाइलें सीधे बेस पर नहीं गिरीं, लेकिन इस कदम ने वाशिंगटन में हड़कंप मचा दिया है।

अमेरिका के ‘भारी बमवर्षकों’ के घर को चुनौती

डिएगो गार्सिया अमेरिका के लिए रणनीतिक रूप से कितना महत्वपूर्ण है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहाँ अमेरिका के भारी बमवर्षक विमानों (Heavy Bombers) का बेड़ा तैनात रहता है। ईरान की अर्ध-सरकारी एजेंसी ‘मेहर’ ने इस हमले की पुष्टि करते हुए इसे “जालिमों के सैन्य ठिकाने पर कार्रवाई” बताया है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिमी एशिया की सीमाओं से बाहर जाकर अमेरिकी हितों को चुनौती देना ईरान की सैन्य रणनीति में एक बड़ा और जोखिम भरा बदलाव है।

वैश्विक स्तर पर बढ़ा तनाव, कूटनीतिक गलियारों में हलचल

परमाणु केंद्र पर हमले और जवाब में बैलिस्टिक मिसाइलों के प्रयोग ने वैश्विक शक्तियों को चिंता में डाल दिया है। अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) और संयुक्त राष्ट्र की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आने की संभावना है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह तनाव कम नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में तेल की कीमतों और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पर इसका विनाशकारी प्रभाव पड़ सकता है।

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