
वॉशिंगटन/नई दिल्ली। दुनिया अभी कोरोना की मार से पूरी तरह उबर भी नहीं पाई थी कि वायरस के एक नए और घातक रूप ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों की नींद उड़ा दी है। अमेरिका में कोरोना वायरस का नया वेरिएंट BA.3.2, जिसे वैज्ञानिकों ने ‘सिकाडा’ (Cicada) नाम दिया है, बेहद तेजी से पांव पसार रहा है। रोग नियंत्रण एवं रोकथाम केंद्र (CDC) की ताजा रिपोर्ट ने हड़कंप मचा दिया है क्योंकि यह वेरिएंट न केवल अमेरिका के 20 से अधिक राज्यों में फैल चुका है, बल्कि दुनिया के 22 अन्य देशों में भी इसकी दस्तक हो चुकी है। वैज्ञानिकों की सबसे बड़ी चिंता इस वेरिएंट की ‘इम्यून एस्केप’ क्षमता को लेकर है, यानी यह शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को चकमा देने में माहिर माना जा रहा है।
क्या है ‘सिकाडा’ वेरिएंट और क्यों है यह इतना रहस्यमयी?
BA.3.2 वेरिएंट असल में ओमिक्रॉन परिवार का ही एक हिस्सा है। शोधकर्ताओं के अनुसार, यह सबसे पहले नवंबर 2024 में दक्षिण अफ्रीका में पाया गया था, लेकिन साल 2025 की शुरुआत से इसने अपनी रफ्तार पकड़ी। इसे ‘सिकाडा’ नाम इसलिए दिया गया है क्योंकि माना जाता है कि यह वायरस लंबे समय तक सुप्त (Inactive) अवस्था में रहने के बाद अचानक सक्रिय हुआ है। यह BA.3 लीनिएज का एक अपग्रेड वर्जन है, जो साल 2022 के बाद से लगभग गायब सा हो गया था। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका दबे पांव दोबारा लौटकर आना एक बड़ी चेतावनी है।
अमेरिका के 25 राज्यों में फैला जाल, नीदरलैंड से आए यात्री ने बढ़ाई मुसीबत
CDC के आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में इस वेरिएंट का पहला मामला जून 2025 में दर्ज किया गया था, जब नीदरलैंड से लौटा एक यात्री संक्रमित पाया गया। इसके बाद देखते ही देखते कैलिफोर्निया, फ्लोरिडा, न्यूयॉर्क, टेक्सास और वर्जीनिया समेत करीब 25 राज्यों में इसके मामले सामने आ चुके हैं। इतना ही नहीं, सीवेज (अपशिष्ट जल) के नमूनों और जहाजों पर की गई जांच में भी इस स्ट्रेन की मौजूदगी की पुष्टि हुई है, जो यह दर्शाता है कि यह वेरिएंट समाज में गहराई तक पैठ बना चुका है।
75 म्यूटेशन ने बढ़ाई टेंशन, क्या फेल हो जाएगी वैक्सीन?
वैज्ञानिकों के लिए सबसे चौंकाने वाली बात इस वेरिएंट के स्पाइक प्रोटीन में हुए 75 म्यूटेशन हैं। यह संख्या पिछले वेरिएंट्स की तुलना में काफी अधिक है। इतने ज्यादा बदलावों के कारण वायरस का स्पाइक प्रोटीन अपनी संरचना बदल लेता है, जिससे वैक्सीन द्वारा बनाई गई एंटीबॉडी उसे पहचान नहीं पातीं। नेशनल फाउंडेशन फॉर इंफेक्शियस डिजीज के निदेशक रॉबर्ट एच. हॉपकिंस जूनियर के अनुसार, म्यूटेशन की भारी संख्या को देखते हुए मौजूदा टीकों का प्रभाव कम हो सकता है। हालांकि, राहत की बात यह है कि अभी तक इसके मरीजों में बहुत ज्यादा गंभीर लक्षण या मृत्यु दर में उछाल नहीं देखा गया है।
गले में खराश और थकान जैसे लक्षणों को न करें नजरअंदाज
विशेषज्ञों के मुताबिक, सिकाडा वेरिएंट के लक्षण भी काफी हद तक पिछले वेरिएंट्स जैसे ही हैं। संक्रमित व्यक्तियों में गले में खराश, नाक बहना, लगातार खांसी, तेज बुखार, शरीर में दर्द, और स्वाद-गंध का चले जाना जैसे लक्षण प्रमुखता से देखे जा रहे हैं। कुछ मामलों में मतली, उल्टी और सांस लेने में तकलीफ की शिकायत भी मिली है। डॉक्टरों की सलाह है कि अगर इनमें से कोई भी लक्षण दिखे, तो इसे सामान्य फ्लू मानकर नजरअंदाज न करें और तुरंत जांच कराएं।
दुनियाभर में अलर्ट, भारत की भी टिकी हैं नजरें
यूरोप में पिछले साल सितंबर में इस वेरिएंट ने भारी तबाही मचाई थी, जहां डेनमार्क और जर्मनी जैसे देशों में 30 प्रतिशत मामले इसी स्ट्रेन के थे। फिलहाल भारत में स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन वैश्विक आवाजाही को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग अलर्ट पर है। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक हमारे पास और अधिक डेटा नहीं आता, तब तक मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे बचाव के उपाय ही सबसे बड़े हथियार हैं।














