‘शांति दूत’ बनने की कोशिश में लड़खड़ाए पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री: विदेशी मेहमानों के सामने फिसला पैर, फर्श पर गिरे इशाक डार

इस्लामाबाद। पश्चिम एशिया में गहराते सैन्य तनाव और ईरान-अमेरिका के बीच जारी जुबानी जंग को शांत करने के लिए पाकिस्तान इन दिनों ‘मध्यस्थ’ की भूमिका निभाने की पुरजोर कोशिश कर रहा है। इसी सिलसिले में इस्लामाबाद में रविवार को एक महत्वपूर्ण चार-पक्षीय शिखर सम्मेलन का आयोजन किया गया। हालांकि, इस गंभीर कूटनीतिक प्रयास के बीच एक ऐसी असहज घटना घटी जिसने सुर्खियां बटोर लीं। बैठक के दौरान पाकिस्तान के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार विदेशी मेहमानों की अगवानी करते समय अचानक लड़खड़ा कर जमीन पर गिर पड़े।

स्वागत के दौरान फिसला पैर, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल

यह वाकया पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के कार्यालय में उस समय हुआ जब इशाक डार मिस्र के विदेश मंत्री बदर अब्देलअती का स्वागत कर रहे थे। चलते-चलते अचानक डार का संतुलन बिगड़ गया और वे फर्श पर गिर पड़े। वहां मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने तुरंत उन्हें सहारा देकर उठाया। गनीमत रही कि उन्हें कोई गंभीर चोट नहीं आई और अधिकारियों ने उनके पूरी तरह स्वस्थ होने की पुष्टि की है। इस घटना का वीडियो इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसे लेकर सोशल मीडिया यूजर्स तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं।

चार देशों का महामंथन: मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब पहुंचे इस्लामाबाद

राजनयिक दृष्टिकोण से यह बैठक अत्यंत महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसमें पाकिस्तान के अलावा मिस्र, तुर्की और सऊदी अरब के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। सऊदी अरब के विदेश मंत्री फैसल बिन फरहान अल सऊद रविवार को इस चर्चा में शामिल होने पहुंचे, जबकि मिस्र और तुर्की के प्रतिनिधि शनिवार को ही इस्लामाबाद पहुंच गए थे। इस बैठक का मुख्य एजेंडा अमेरिका और ईरान के बीच सीधी बातचीत का रास्ता साफ करना और क्षेत्र में जारी संघर्ष को रोकना था।

क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा, लेकिन आधिकारिक बयान का इंतजार

पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के अनुसार, चारों देशों के प्रतिनिधियों ने क्षेत्रीय सुरक्षा और शांति बहाली के उपायों पर गहन मंथन किया। इस दौरे का मकसद रणनीतिक मुद्दों पर साझा सहमति बनाना था। हालांकि, घंटों चली लंबी चर्चा के बाद भी अभी तक किसी आधिकारिक संयुक्त बयान की घोषणा नहीं की गई है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञ इस बैठक को पाकिस्तान की वैश्विक मंच पर अपनी कूटनीतिक प्रासंगिकता साबित करने की कोशिश के तौर पर देख रहे हैं।

क्या सफल होगी पाकिस्तान की मध्यस्थता?

अमेरिका और ईरान के बीच मिसाइल हमलों और बढ़ते तनाव के बीच पाकिस्तान की यह ‘पीस डिप्लोमेसी’ कितनी कारगर होगी, इस पर दुनिया की नजरें टिकी हैं। घरेलू आर्थिक चुनौतियों और सीमा पर जारी तनाव के बीच इस्लामाबाद के लिए यह राह काफी कठिन नजर आ रही है। फिलहाल, पूरी दुनिया इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या इस गुफ्तगू से मिडिल ईस्ट में शांति का कोई ठोस रास्ता निकल पाएगा।

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