अक्षय तृतीया और स्वर्ण निवेश: परंपरा और मुनाफे का अटूट संगम, क्या इस बार भी चमकेगा सोना?

नई दिल्ली। 19 अप्रैल 2026 को आने वाली अक्षय तृतीया के लिए सर्राफा बाजार सज चुका है, लेकिन इस बार निवेशकों के मन में एक बड़ा सवाल है—क्या 1.50 लाख के स्तर पर पहुंच चुका सोना अभी भी मुनाफे का सौदा है? पिछले साल के मुकाबले करीब 60% के उछाल और हालिया उतार-चढ़ाव ने इस चर्चा को और गर्म कर दिया है।

धार्मिक आस्था और आर्थिक सुरक्षा का संगम

भारत में अक्षय तृतीया पर सोना खरीदना केवल एक परंपरा नहीं, बल्कि भविष्य के लिए सुरक्षा कवच माना जाता है। मान्यताओं के अनुसार, इस दिन खरीदा गया सोना ‘अक्षय’ (जिसका कभी क्षय न हो) रहता है और सुख-समृद्धि लाता है। ऐतिहासिक डेटा गवाह है कि पिछले 9 सालों से अक्षय तृतीया पर किया गया निवेश घाटे का सौदा नहीं रहा है।

कीमतों का गणित: रिकॉर्ड हाई से 30,000 रुपये सस्ता

जनवरी 2026 में सोने ने 1,80,000 रुपये प्रति 10 ग्राम का ऐतिहासिक शिखर छुआ था। वर्तमान में कीमतें 1,50,000 रुपये के आसपास टिकी हुई हैं। बाजार विशेषज्ञों का विश्लेषण कुछ इस प्रकार है:

  • खरीदारी का मौका: रिकॉर्ड ऊंचाई से करीब 16% (30,000 रुपये) की गिरावट उन लोगों के लिए बेहतरीन अवसर है जो एंट्री का इंतजार कर रहे थे।

  • सपोर्ट लेवल: यदि बाजार में गिरावट आती है, तो पहला मजबूत सपोर्ट 1,36,200 रुपये और बेस लेवल 1,27,500 रुपये पर है।

  • ऊपरी लक्ष्य: तेजी आने पर विशेषज्ञों को उम्मीद है कि सोना फिर से 1,70,000 से 1,81,000 रुपये के स्तर को छू सकता है।

पोर्टफोलियो की स्थिरता के लिए निवेश

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि सोने को केवल ‘रिटर्न’ देने वाली मशीन न समझें। ग्लोबल स्तर पर जियो-पॉलिटिकल टेंशन (भू-राजनीतिक तनाव) और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों के बीच सोना आपके निवेश पोर्टफोलियो को स्थिरता देता है। हालांकि, एक्सपर्ट्स ने यह चेतावनी भी दी है कि पिछले साल जैसा 60% का रिटर्न इस बार दोहराना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

निवेश की सही रणनीति: एक साथ बड़ी रकम न लगाएं

अक्षय तृतीया पर खरीदारी करने जा रहे ग्राहकों के लिए विशेषज्ञों ने ‘धीरे चलो’ की नीति अपनाने की सलाह दी है:

  1. SIP का तरीका अपनाएं: एक साथ सारा पैसा लगाने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके सोना खरीदें।

  2. लंबी अवधि का नजरिया: अगर आप 1 साल में मोटा मुनाफा चाहते हैं, तो यह सही समय नहीं है। कम से कम 3-5 साल के लिए निवेश करें।

  3. सेंट्रल बैंक की खरीदारी: वैश्विक स्तर पर केंद्रीय बैंकों (विशेषकर चीन) द्वारा सोने की निरंतर खरीदारी कीमतों को नीचे गिरने से रोक रही है, जो लॉन्ग टर्म के लिए सकारात्मक संकेत है।

मांग में नरमी, पर उत्साह बरकरार

ऊंची कीमतों के कारण इस बार बाजारों में वैसी भीड़ नहीं दिख रही है जैसी पिछले सालों में होती थी। कई सर्राफा कारोबारियों का मानना है कि आम ग्राहक अभी ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। इसके बावजूद, अक्षय तृतीया के दिन डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड की मांग बढ़ने की पूरी उम्मीद है।

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