पटना। बिहार की सियासत में आज एक नया इतिहास रच गया है। भारतीय जनता पार्टी (BJP) विधायक दल की बैठक में सम्राट चौधरी को सर्वसम्मति से नेता चुन लिया गया है, जिसके साथ ही उनके बिहार के 24वें मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त हो गया है। करीब दो दशकों तक नीतीश कुमार के इर्द-गिर्द घूमने वाली बिहार की राजनीति अब एक नए नेतृत्व की ओर बढ़ चली है।
विरासत से शिखर तक: शकुनी चौधरी के लाल का कमाल
सम्राट चौधरी को राजनीति विरासत में मिली है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार के दिग्गज समाजवादी नेता और पूर्व सांसद रहे हैं। सम्राट ने अपनी सियासी पारी की शुरुआत उसी ‘आरजेडी की पाठशाला’ से की थी, जिसके खिलाफ आज वे सबसे मुखर आवाज माने जाते हैं। लालू प्रसाद यादव के करीबी रहे शकुनी चौधरी के नक्शेकदम पर चलते हुए सम्राट ने सत्ता के गलियारों में अपनी पहचान बनाई और आरजेडी, जेडीयू होते हुए अंततः भाजपा के ‘सम्राट’ बने।
महज 19 की उम्र में मंत्री और फिर बर्खास्तगी का विवाद
सम्राट चौधरी के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है जो बहुत कम राजनेताओं के पास है। उन्होंने महज 19 साल की उम्र में राबड़ी देवी सरकार में कृषि राज्य मंत्री पद की शपथ ली थी। हालांकि, यह उपलब्धि विवादों में भी रही। 1999 में तत्कालीन राज्यपाल सूरजभान ने उनकी उम्र कम होने (संवैधानिक रूप से 25 वर्ष से कम) और दस्तावेजों में विसंगतियों के कारण उन्हें मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया था। उस समय उन पर धोखाधड़ी के आरोप भी लगे थे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और कानूनी व राजनीतिक लड़ाई जारी रखी।
कर्पूरी ठाकुर के बाद दूसरे ऐसे नेता, जो डिप्टी CM से बने CM
सम्राट चौधरी ने बिहार की राजनीति का एक बड़ा मिथक तोड़ दिया है। जननायक कर्पूरी ठाकुर के बाद सम्राट चौधरी राज्य के दूसरे ऐसे नेता हैं, जो पहले उपमुख्यमंत्री रहे और अब मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचे हैं। बिहार के राजनीतिक इतिहास में सुशील कुमार मोदी जैसे कई कद्दावर नेता उपमुख्यमंत्री तो रहे, लेकिन कभी मुख्यमंत्री पद तक नहीं पहुंच सके। सम्राट ने इस उपलब्धि के साथ अपना नाम इतिहास के पन्नों में दर्ज करा लिया है।
दल-बदल नहीं, विचारधारा का विस्तार
सम्राट चौधरी का सफरनामा किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है:
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आरजेडी: शुरुआती राजनीतिक दीक्षा और पहली बार मंत्री बने।
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जेडीयू: 2014 में जीतन राम मांझी की सरकार में मंत्री पद संभाला।
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भाजपा: 2017 में भाजपा में शामिल हुए और अपनी आक्रामक कार्यशैली से पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और अब मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे।
व्यक्तिगत जीवन और कद
16 नवंबर 1968 को जन्मे 57 वर्षीय सम्राट चौधरी अपनी बेबाक बयानबाजी और सिर पर बंधी ‘मुरैठा’ (पगड़ी) के लिए मशहूर हैं, जिसे उन्होंने नीतीश कुमार को सत्ता से हटाने तक न खोलने का संकल्प लिया था। उनके परिवार में पत्नी ममता कुमारी, एक बेटा और एक बेटी है। अब देखना यह होगा कि ‘सम्राट’ के नेतृत्व में बिहार के विकास की गाड़ी कितनी तेजी से दौड़ती है।













