अमेरिका-ईरान जंग: ट्रंप ने बढ़ाया सीजफायर, ईरान ने बताया ‘युद्ध की चाल’, इस्लामाबाद वार्ता पर संकट के बादल

वॉशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच शांति की उम्मीदों को करारा झटका लगा है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ‘सीजफायर’ (युद्धविराम) को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ाने के फैसले को ईरान ने सिरे से खारिज कर दिया है। तेहरान ने इसे अमेरिका की एक “एकतरफा चाल” करार देते हुए साफ कर दिया है कि वह अपनी सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के आधार पर ही सैन्य कदम उठाएगा।

ट्रंप का यू-टर्न: आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की अपील का दिया हवाला

बता दें कि 8 अप्रैल को दोनों देशों के बीच 14 दिनों का युद्धविराम हुआ था, जिसकी समयसीमा 22 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही थी। पहले कड़ा रुख अपनाने वाले ट्रंप ने अचानक अपना फैसला बदलते हुए सीजफायर को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया।

  • मध्यस्थता: ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने यह फैसला पाकिस्तान के फील्ड मार्शल आसिम मुनीर और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के विशेष अनुरोध पर लिया है।

  • शर्त: अमेरिकी राष्ट्रपति ने स्पष्ट किया कि जब तक इस्लामाबाद में शांति प्रस्ताव पर चर्चा पूरी नहीं होती, तब तक युद्धविराम जारी रहेगा। हालांकि, उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) पर समुद्री नाकेबंदी जारी रखने की बात कही है।

ईरान का पलटवार: “हारने वाला पक्ष शर्तें नहीं थोप सकता”

ईरान ने अमेरिका के इस कदम को शांति की पहल मानने के बजाय एक रणनीतिक साजिश करार दिया है।

  • सैन्य कार्रवाई के संकेत: ईरानी संसद के सलाहकार महदी मोहम्मदी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि “घेराबंदी जारी रखना बमबारी से अलग नहीं है।” उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रंप केवल अचानक हमला करने के लिए समय जुटा रहे हैं।

  • वार्ता से इनकार: ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक अमेरिका होर्मुज की नाकेबंदी नहीं हटाता और धमकियां बंद नहीं करता, तब तक किसी भी वार्ता का कोई मतलब नहीं है।

इस्लामाबाद वार्ता अधर में: जेडी वेंस का दौरा टला

पाकिस्तान के इस्लामाबाद में होने वाले दूसरे दौर की शांति वार्ता पर अब पूरी तरह अनिश्चितता के बादल छा गए हैं।

  1. प्रतिनिधिमंडल: अमेरिका अपना डेलिगेशन भेजने को तैयार है, लेकिन ईरान ने बातचीत में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

  2. जेडी वेंस: तनावपूर्ण स्थितियों और ईरान के अड़ियल रुख को देखते हुए अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का इस्लामाबाद दौरा फिलहाल टाल दिया गया है।

होर्मुज स्ट्रेट बना तनाव का केंद्र

सारा विवाद होर्मुज स्ट्रेट की नाकेबंदी को लेकर अटका हुआ है। भारत समेत दुनिया भर के तेल व्यापार के लिए यह मार्ग जीवन रेखा (Lifeline) है। ईरान का मानना है कि अमेरिका नाकेबंदी के जरिए उसकी आर्थिक घेराबंदी कर रहा है, जबकि अमेरिका इसे सुरक्षा के लिए जरूरी बता रहा है। फिलहाल, 22 अप्रैल के बाद भी यह क्षेत्र युद्ध की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है।

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