चंडीगढ़। पंजाब की सियासत में इन दिनों जबरदस्त उथल-पुथल देखने को मिल रही है। आम आदमी पार्टी (आप) के भीतर पनप रहे कथित असंतोष और दिग्गज नेताओं के पाला बदलने की खबरों ने भगवंत मान सरकार की स्थिरता पर सवालिया निशान लगा दिए हैं। राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा समेत सात सांसदों के भाजपा में शामिल होने की चर्चाओं ने राज्य के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है, जिसका फायदा उठाते हुए विपक्ष अब सरकार पर हमलावर है।
‘आप’ में बड़ी टूट का दावा: 27 विधायकों पर नजर
विपक्ष के नेताओं ने आप सरकार के भविष्य को लेकर बड़े दावे किए हैं। कांग्रेस नेता उदित राज ने कहा है कि पंजाब में सरकार पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। वहीं, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग ने पार्टी नेतृत्व को सचेत रहने की चेतावनी देते हुए आंतरिक असंतोष की ओर इशारा किया है। सबसे चौंकाने वाला दावा जयहिंद सेना प्रमुख नवीन जयहिंद ने किया है, जिनके अनुसार आप के करीब 27 विधायक पार्टी छोड़ने की तैयारी में हैं। यदि ऐसा होता है, तो यह मान सरकार के लिए बहुमत का संकट खड़ा कर सकता है।
“पंजाब के हित में लिया फैसला”: विक्रमजीत सिंह साहनी
हाल ही में आम आदमी पार्टी का साथ छोड़ भाजपा का दामन थामने वाले राज्यसभा सांसद विक्रमजीत सिंह साहनी के बयानों ने आग में घी डालने का काम किया है। साहनी ने स्पष्ट किया कि उन्होंने यह कदम ‘पंजाब के हित’ में उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी के भीतर राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे प्रभावशाली नेताओं को किनारे किया जा रहा था, जिससे कैडर में नाराजगी थी।
आंतरिक मतभेद और नेतृत्व पर सवाल
साहनी ने पार्टी नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पंजाब से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों और विकास कार्यों के सुझावों को लगातार नजरअंदाज किया गया। उनका कहना है कि उन्होंने पार्टी छोड़ने से पहले अरविंद केजरीवाल को संभावित टूट के बारे में आगाह किया था, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। साहनी के मुताबिक, पार्टी का ध्यान दीर्घकालिक विकास योजनाओं के बजाय केवल चुनावी रणनीति तक ही सीमित रह गया है, जिससे केंद्र और राज्य के बीच तालमेल बिगड़ गया।
क्या गिर जाएगी सरकार? क्या कहते हैं आंकड़े
हालांकि दावों और आरोपों की झड़ी लगी है, लेकिन अभी तक आधिकारिक तौर पर विधायकों के किसी बड़े समूह के टूटने की पुष्टि नहीं हुई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पंजाब में सरकार गिराना इतना आसान नहीं होगा। आंकड़ों के लिहाज से विपक्ष को एक बहुत बड़ी संख्या की जरूरत होगी, जो फिलहाल चुनौतीपूर्ण नजर आती है।
फिलहाल पंजाब की राजनीति ‘वेट एंड वॉच’ की स्थिति में है। क्या यह महज दावों की राजनीति है या पर्दे के पीछे कोई बड़ा ‘ऑपरेशन’ चल रहा है, यह आने वाले कुछ दिन साफ कर देंगे।















