राज्यसभा में बड़ा उलटफेर: AAP के 7 सांसदों का भाजपा में विलय, सचिवालय ने जारी की अधिसूचना, जानें क्यों नहीं गिरी सदस्यता

नई दिल्ली: देश की राजनीति में एक बड़ा धमाका करते हुए आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसदों ने आधिकारिक तौर पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थाम लिया है। राज्यसभा सचिवालय ने इस संबंध में अधिसूचना जारी कर सातों बागी सांसदों के भाजपा में विलय को मंजूरी दे दी है। इस नाटकीय घटनाक्रम के साथ ही उच्च सदन में भाजपा की ताकत बढ़ गई है और उसके सदस्यों की संख्या अब 113 पर पहुंच गई है।

AAP को पंजाब चुनाव से पहले लगा करारा झटका, दिग्गज हुए बागी

पंजाब में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से ठीक पहले यह घटनाक्रम मुख्यमंत्री भगवंत मान और अरविंद केजरीवाल के लिए किसी बड़े झटके से कम नहीं है। बागी होने वाले सांसदों में राघव चड्ढा और संदीप पाठक जैसे दिग्गज नाम शामिल हैं, जिन्होंने 2022 के पंजाब चुनाव में पार्टी की जीत में मुख्य रणनीतिकार की भूमिका निभाई थी। अब 10 में से केवल 3 सांसद ही आम आदमी पार्टी के पाले में बचे हैं, जिससे संसद में पार्टी की आवाज कमजोर पड़ गई है।

दल-बदल कानून के बावजूद क्यों सुरक्षित रही सदस्यता?

आम आदमी पार्टी ने इन सांसदों के खिलाफ राज्यसभा चेयरमैन को अर्जी देकर सदस्यता खत्म करने की मांग की थी। AAP की दलील थी कि यह दल-बदल कानून (Anti-Defection Law) का उल्लंघन है। हालांकि, तकनीकी पेंच ने बागियों का साथ दिया। संविधान की दसवीं अनुसूची के अनुसार, यदि किसी विधायी दल के दो-तिहाई (2/3) या उससे अधिक सदस्य एक साथ किसी दूसरी पार्टी में विलय करते हैं, तो उनकी सदस्यता अयोग्य नहीं मानी जाती। चूंकि AAP के 10 में से 7 सांसद (जो कि दो-तिहाई से अधिक है) एक साथ भाजपा में शामिल हुए, इसलिए उन पर कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकी।

इन 7 सांसदों ने छोड़ी झाड़ू, थामा कमल का साथ

भाजपा में शामिल होने वाले सांसदों की सूची में पार्टी के कई बड़े चेहरे और सेलिब्रिटी शामिल हैं। सचिवालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के बाद अब राघव चड्ढा, स्वाति मालीवाल, पूर्व क्रिकेटर हरभजन सिंह, संदीप पाठक, अशोक मित्तल, विक्रमजीत सिंह साहनी और राजिंदर गुप्ता आधिकारिक तौर पर भाजपा के सदस्य बन गए हैं। यदि इनमें से राघव चड्ढा या कोई भी सांसद अकेला पार्टी छोड़ता, तो उन्हें अपनी सदस्यता गंवानी पड़ती, लेकिन सामूहिक विलय ने उन्हें सुरक्षा कवच प्रदान कर दिया।

राज्यसभा का नया गणित: किस पार्टी के पास कितनी ताकत?

इस विलय के बाद राज्यसभा का समीकरण पूरी तरह बदल गया है। वर्तमान में भाजपा 113 सदस्यों के साथ सबसे बड़ी शक्ति बनी हुई है। वहीं, विपक्ष की बात करें तो कांग्रेस के पास 29, तृणमूल कांग्रेस (TMC) के 13, और द्रमुक (DMK) के 8 सांसद हैं। अन्य दलों में जेडीयू और एनसीपी के पास 4-4, समाजवादी पार्टी के 4, राजद के 3 और जेएमएम के पास 2 सदस्य हैं। AAP अब महज 3 सांसदों के साथ निचले पायदान पर आ गई है।

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