
•महाराजपुर के नजफगढ़ गांव की हृदय विदारक घटना।
•मैनपुरी के करहल क्षेत्र में थी ससुराल।
•तीन वर्ष पूर्व हुआ था तलाक।
सरसौल,कानपुर। अलग – अलग रहने के फैसले के बाद जीवन में पति से अलग होने के बाद मायके लौटकर बच्चियों के भविष्य की चिंता के साथ नए संघर्ष में नई जिंदगी शुरू करने की कोशिश कर रही एक महिला के अरमान टूट गए। मानसिक प्रताड़ना व आर्थिक तंगी से तंग आकर मायके में अपनी दो मासूम बेटियों के साथ जहरीला पदार्थ खा लिया जिससे तीनों की मौत हो गई। घटना के बाद गांव मातम पसर गया है। बताया जा रहा है कि महिला का करीब तीन वर्ष पूर्व पति से अलग – अलग रहने का फैसला हुआ था, जिसके बाद वह पिता के घर रह रही थी।घरेलू तनाव और बेटियों के भविष्य की चिंता के चलते उसने यह खौफनाक कदम उठाया। पुलिस ने शवों को कब्जे में लेकर जांच शुरू कर दी है।
प्राप्त जानकारी के मुताबित थाना महाराजपुर क्षेत्र अंतर्गत नजफगढ़ निवासी रामपाल पासवान गुजरात में नौकरी करते है। परिवार में पत्नी शांति देवी, बेटा प्रताप, धर्मेंद्र, जितेंद्र व इकलौती बेटी चांदनी थी।

मृतक चांदनी की फाइल फोटो

मृतक ब्यूटी की फाइल फोटो

मृतक पायल की फाइल फोटो
भाई धर्मेंद्र और जितेंद्र ने बताया कि उसकी बहन चांदनी का विवाह 12 वर्ष पूर्व मैनपुरी, करहल के नगला सीताराम निवासी मजदूर राकेश से हुई थी। चांदनी और राकेश की दो बेटियां पायल (6) व ब्यूटी (4) थीं।
धर्मेंद्र ने बताया कि पति शराब का लती होने से प्रायः नशे में धुत होकर बहन के साथ मारपीट करता था, जिससे तंग आकर चांदनी बेटियों संग 5 साल पहले मायके रहने चली आई थी। 3 साल पहले गांव में पंचायत के बाद दोनों अलग–अलग रहने लगे थे। धर्मेेंद्र ने बताया कि परिवार के एक हिस्से में वह पत्नी धीरेंद्र व दो बेटियों दिव्यांशी और दिव्या के साथ रहते है। दूसरे हिस्से में भाई जितेंद्र पत्नी संध्या, बेटा लकी और बेटी अदिति के साथ रहता है।
जबकि चांदनी, मां शांति देवी व बेटियों के साथ अलग रहती थी। भाई जितेंद्र के मुताबिक रोजाना की तरह वह मंगलवार सुबह 4 बजे सोकर उठे और शौचक्रिया के लिए गांव के किनारे बने शौचालय गए थे। सुबह 6 बजे वह वापस लौटे तो घर के बाहर ग्रामीण इकट्ठा थे। अंदर जाकर देखा तो बहन चांदनी व भांजी पायल व ब्यूटी जमीन पर पड़ी हुई थी।
आनन–फानन में परिजनों ने गंभीर हालत में तीनों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल लेकर पहुंचे, जहां से चिकित्सकों ने गंभीर हालत समझ हैलट रेफर कर दिया गया जहां पहुंचने पर डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
तीनों की मौत के बाद परिजन दोनों मासूम बेटियों के शव लेकर गांव पहुंचे तो मातम फैल गया।परिजन चीख पुकार कर रहे थे तभी स्थानीय महाराजपुर पुलिस व अपर पुलिस उपायुक्त शिवा सिंह गांव पहुंची।उन्होंने शवों का पंचनामा कर पोस्ट मार्टम के लिए भेजा दिया है।
डाक्टर के काल पर भी नहीं पहुंची एंबुलेंस
घटना के बाद स्वास्थ्य विभाग की पोल खुलकर सामने आ गई। मृतका के भाई धर्मेंद्र ने बताया कि उन्होंने डॉयल–108 पर कई फोन किए, लेकिन कोई भी रिस्पांस नहीं मिला। जिसके बाद वह गांव के ही युवक ने तीनों को लेकर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सरसौल पहुंचे, जहां तैनात डाॅक्टरों ने करीब 7 बार डॉयल–108 पर कॉल किया था। जिसके करीब एक घंटे बाद एबुंलेंस मुहैया कराई गई, जब तक वह हैलट अस्पताल पहुंचे तब तक बहन व भांजियों की मौत हो चुकी थी। परिजनों ने कहा कि अगर समय पर वह अस्पताल पहुंच जाती तो शायद उनकी जान बच जाती।
घटना की जानकारी पर डीसीपी पूर्वी सत्यजीत गुप्ता ने बताया कि सुबह 11 बजे हैलट अस्पताल से महाराजपुर को फौती जानकारी मिली थी। जानकारी पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों से घटना की जानकारी ली। प्रारंभिक जांच में आत्महत्या का कारण स्पष्ट नहीं हो सका है। परिजन बच्चियों के शवों को घर ले गए थे, शवों को पोस्टमार्टम के लिए लाया जा रहा है। परिजनों की तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।












