बंगाल चुनाव 2026: क्या ममता के अभेद्य दुर्ग में सेंध लगा पाएगी बीजेपी? 142 सीटों पर ‘महासंग्राम’ आज, इन 10 हॉट सीटों पर टिकी हैं निगाहें

कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए आज का दिन ‘कयामत की रात’ से कम नहीं है। सूबे की 142 विधानसभा सीटों पर आज मतदान होने जा रहा है, जिसे 2026 के चुनाव का सबसे बड़ा ‘गेमचेंजर’ माना जा रहा है। सियासी गलियारों में चर्चा है कि जिस दल ने इस चरण को फतह कर लिया, नबान्न (सचिवालय) की कुर्सी उसी के नाम होगी। हालांकि ये सीटें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का सबसे मजबूत गढ़ रही हैं, लेकिन बदलते समीकरणों ने इस बार मुकाबले को बेहद रोमांचक बना दिया है। 2021 के आंकड़ों पर गौर करें तो टीएमसी ने इन 142 में से रिकॉर्ड 123 सीटें जीती थीं, जबकि बीजेपी को सिर्फ 18 सीटों से संतोष करना पड़ा था। क्या इस बार इतिहास खुद को दोहराएगा या बंगाल की सत्ता में कोई बड़ा उलटफेर होगा? आइए जानते हैं उन 10 सीटों का हाल, जहां कांटे की टक्कर है।

फाल्टा में भारी बवाल: क्या IPS की कार्रवाई बदलेगी समीकरण?

इस चरण में सबसे ज्यादा सुर्खियां फाल्टा विधानसभा सीट बटोर रही है। यहां मुकाबला त्रिकोणीय है—टीएमसी के जहांगीर खान, बीजेपी के देबांग्शु पांडा और कांग्रेस के अब्दुर रज्जाक मोल्ला आमने-सामने हैं। लेकिन चर्चा उम्मीदवारों से ज्यादा आईपीएस अजयपाल शर्मा की कार्रवाई और उनके बयानों को लेकर है। फाल्टा में जबरदस्त राजनीतिक तनाव देखा जा रहा है, जिससे यहां हिंसा की आशंका भी जताई जा रही है। पिछले चुनाव में टीएमसी ने यह सीट 40 हजार से अधिक वोटों से जीती थी, लेकिन इस बार पुलिसिया कार्रवाई और सियासी टकराव ने माहौल बदल दिया है।

भवानीपुर और कोलकाता पोर्ट: दिग्गजों की साख का सवाल

सूबे की सबसे हाई-प्रोफाइल सीट भवानीपुर पर सबकी नजरें हैं, जहां खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मैदान में हैं। बीजेपी ने उनके खिलाफ एक बड़ा चेहरा उतारकर मुकाबले को ‘प्रतिष्ठा की लड़ाई’ बना दिया है। वहीं, कोलकाता पोर्ट सीट पर टीएमसी के कद्दावर नेता और मंत्री फिरहाद हकीम का मुकाबला बीजेपी के राकेश सिंह और सीपीआईएम के फैयाज़ खान से है। इन दोनों ही सीटों पर टीएमसी का दशकों से दबदबा रहा है, जिसे हिलाना विपक्ष के लिए बड़ी चुनौती है।

टॉलीगंज और बालीगंज: टॉलीवुड से लेकर कद्दावर नेताओं तक की जंग

टॉलीगंज में टीएमसी के मंत्री अरूप बिस्वास 2001 से अजेय रहे हैं, लेकिन इस बार उन्हें बीजेपी और वाम दलों से कड़ी चुनौती मिल रही है। बालीगंज सीट पर भी कुछ ऐसा ही हाल है, जहां वरिष्ठ मंत्री सोवनदेब चट्टोपाध्याय मैदान में हैं। हालांकि ये सीटें टीएमसी का सुरक्षा कवच मानी जाती हैं, लेकिन इस बार विपक्ष ने पूरी ताकत झोंक दी है।

दमदम और पानीहाटी: शिक्षा मंत्री और वित्त मंत्री की कड़ी परीक्षा

दमदम इलाके की दो सीटें—दमदम और दमदम उत्तर—इस बार हॉट सीट बनी हुई हैं। दमदम से शिक्षा मंत्री ब्रत्य बसु त्रिकोणीय मुकाबले में फंसे हैं, जबकि दमदम उत्तर से वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य अपनी साख बचाने की कोशिश कर रही हैं। वहीं, पानीहाटी सीट पर टीएमसी ने नया चेहरा उतारकर सबको चौंका दिया है, जिसका फायदा उठाने की कोशिश में बीजेपी और वाम दल जुटे हैं।

रासबिहारी और नौपाड़ा: दलबदल और गढ़ बचाने की चुनौती

रासबिहारी सीट पर 1998 से टीएमसी का कब्जा है, लेकिन बीजेपी के मजबूत उम्मीदवार ने मुकाबले को कांटे का बना दिया है। वहीं, नौपाड़ा सीट पर ‘दलबदल’ के मास्टर माने जाने वाले अर्जुन सिंह बीजेपी के टिकट पर ताल ठोक रहे हैं। अर्जुन सिंह का टीएमसी से बीजेपी और फिर बीजेपी से टीएमसी होकर वापस बीजेपी में आना इस सीट के मतदाताओं के लिए सबसे बड़ा चर्चा का विषय है। उनके सामने टीएमसी के त्रिनकुर भट्टाचार्य और सीपीएम की गार्गी चटर्जी हैं।

निष्कर्ष: सत्ता की चाबी किसके हाथ?

आज की 142 सीटें तय करेंगी कि बंगाल में सत्ता का ऊंट किस करवट बैठेगा। एक तरफ ममता बनर्जी का पुराना और मजबूत किला है, तो दूसरी तरफ बीजेपी का आक्रामक अभियान और एंटी-इंकंबेंसी का डर। 29 अप्रैल की यह वोटिंग बंगाल की राजनीति का नया भविष्य लिखने वाली है। क्या टीएमसी अपना 2021 वाला प्रदर्शन दोहरा पाएगी या ‘खेला’ कुछ और ही होगा? यह तो वक्त ही बताएगा।

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