‘लोकतंत्र की हत्या’ या ‘नियमों की सुरक्षा’? बंगाल में स्ट्रॉन्ग रूम विवाद पर TMC और चुनाव आयोग आमने-सामने

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों से पहले बंगाल की राजनीति में उबाल आ गया है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) और भाजपा पर मिलकर “बड़े चुनावी फ्रॉड” का गंभीर आरोप लगाया है। पार्टी का दावा है कि उनके प्रतिनिधियों की अनुपस्थिति में ही बैलेट बॉक्स खोले जा रहे हैं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक कड़ा प्रहार करते हुए TMC ने इसे “दिन-दहाड़े लोकतंत्र की हत्या” करार दिया। पार्टी ने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि डराने-धमकाने और केंद्रीय बलों के इस्तेमाल के बाद अब वे ईवीएम (EVM) से छेड़छाड़ जैसी हताशापूर्ण कोशिशों पर उतर आए हैं।

ECI की 9-बिंदुओं वाली सफाई: “सभी स्ट्रॉन्ग रूम सुरक्षित और सील हैं”

TMC के तीखे हमलों के बाद चुनाव आयोग ने मोर्चा संभाला और 9 बिंदुओं में विस्तृत स्पष्टीकरण जारी कर स्थिति साफ की। आयोग ने स्पष्ट किया कि:

  • खुदीराम अनुशीलन केंद्र के सभी 7 स्ट्रॉन्ग रूम उम्मीदवारों और एजेंटों की मौजूदगी में विधिवत सील किए गए हैं।

  • जिस प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं, वह दरअसल पोस्टल बैलेट्स को अलग करने (Segregation) का काम था, जो स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर गलियारे में चल रहा था।

  • इस प्रक्रिया की सूचना सभी राजनीतिक दलों को पहले ही ईमेल के जरिए दे दी गई थी।

  • मुख्य स्ट्रॉन्ग रूम, जिनमें मतदान वाली ईवीएम रखी हैं, वे पूरी तरह सुरक्षित और ताले में बंद हैं।

कलकत्ता हाई कोर्ट से TMC को झटका

एक तरफ जहां सड़कों पर विरोध प्रदर्शन जारी है, वहीं कानूनी मोर्चे पर भी सरगर्मी तेज रही। TMC ने काउंटिंग स्टाफ की तैनाती को लेकर कलकत्ता हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। कोर्ट के इस फैसले के बाद चुनाव आयोग की तैयारियों को और मजबूती मिली है, जबकि विपक्षी दल इसे प्रशासनिक पक्षपात के रूप में देख रहे हैं।

मैदान में उतरीं ममता बनर्जी: कार्यकर्ताओं को ’24 घंटे पहरे’ का आदेश

विवाद बढ़ता देख मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद कमान संभाल ली है। उन्होंने नेताजी इनडोर स्टेडियम और अन्य काउंटिंग सेंटरों का जायजा लिया। अपनी नेता शशि पांजा और कुणाल घोष के धरने का समर्थन करते हुए ममता ने कार्यकर्ताओं को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे अगले 4 दिनों तक स्ट्रॉन्ग रूम के बाहर चौबीसों घंटे पहरा दें। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा, “बंगाल, महाराष्ट्र या बिहार जैसा नहीं है; हम अपने लोकतंत्र की लूट चुपचाप नहीं देखेंगे।”

4 मई की मतगणना पर टिकी देश की नजरें

एग्जिट पोल्स में भाजपा की बढ़त के अनुमानों और अब स्ट्रॉन्ग रूम को लेकर छिड़े इस विवाद ने 4 मई 2026 के नतीजों को और भी ज्यादा संवेदनशील बना दिया है। जहां एक तरफ चुनाव आयोग पारदर्शिता का दावा कर रहा है, वहीं TMC इसे सरकार बचाने की आखिरी लड़ाई की तरह लड़ रही है। भारी सुरक्षा और सीसीटीवी की निगरानी के बीच, बंगाल के जनादेश का ऊंट किस करवट बैठेगा, यह मतगणना के दिन ही स्पष्ट होगा।

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