सूर्यास्त के बाद भूलकर भी न करें ये 4 काम, रूठ सकती हैं मां लक्ष्मी, घर में पैर पसारती है दरिद्रता

क्या आपके घर में भी दिन-रात कड़ी मेहनत करने के बाद भी पैसा पानी की तरह बह जाता है? क्या कमाई अच्छी होने के बावजूद तिजोरी हमेशा खाली रहती है और बिना किसी वजह के परिवार में क्लेश और मानसिक तनाव बना रहता है? यदि हां, तो ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इसकी वजह आपकी कुंडली के ग्रह-नक्षत्र ही नहीं, बल्कि आपकी कुछ ऐसी अनजानी आदतें भी हो सकती हैं जिन्हें आप रोज शाम के समय दोहराते हैं।

सनातन परंपरा में शाम यानी प्रदोष काल का समय बेहद पवित्र और मां लक्ष्मी के आगमन का माना गया है। शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद अनजाने में की गई कुछ गलतियां धन की देवी लक्ष्मी को नाराज कर सकती हैं, जिससे घर की बरकत रुक जाती है और सुख-समृद्धि का नाश होता है। आइए जानते हैं ज्योतिष के अनुसार शाम होते ही आपको किन कामों से पूरी तरह दूरी बना लेनी चाहिए।

1. सूर्यास्त के बाद भूलकर भी न दें किसी को उधार

अक्सर लोग शाम के समय या अंधेरा होने के बाद किसी को पैसे, दूध, दही या नमक जैसी जरूरी चीजें उधार देने से बचते हैं। इसके पीछे गहरा ज्योतिषीय और धार्मिक कारण है। मान्यता है कि शाम का समय मां लक्ष्मी के स्वागत का होता है और इस वक्त यदि आप अपने घर से धन या वैभव किसी और को उधार देते हैं, तो आप अपने घर की ‘बरकत’ और लक्ष्मी को दूसरे के घर भेज देते हैं। ज्योतिष में इसे आर्थिक अस्थिरता और कर्ज बढ़ने का सबसे बड़ा कारण माना गया है।

2. शाम या रात के वक्त नाखून और बाल काटना है वर्जित

पुरानी मान्यताओं और शास्त्रों के अनुसार, सूर्यास्त के बाद या रात के समय अपने नाखून काटना, बाल कटवाना या शेविंग करना बेहद अशुभ माना जाता है। ज्योतिष शास्त्र कहता है कि ऐसा करने से घर में नकारात्मक ऊर्जा (Negative Energy) तेजी से बढ़ती है और मां लक्ष्मी उस घर से विमुख हो जाती हैं। पुराने जमाने में इस नियम को सुरक्षा और स्वास्थ्य से भी जोड़ा जाता था क्योंकि तब बिजली नहीं होती थी और अंधेरे में धारदार औजारों से चोट लगने का खतरा रहता था।

3. शाम के समय घर के कोनों में न रहने दें अंधेरा

ज्योतिष और वास्तु शास्त्र के मुताबिक, सूर्यास्त के ठीक बाद घर के किसी भी हिस्से में अंधेरा रखना बेहद दोषपूर्ण माना जाता है। कहा जाता है कि जिन घरों में शाम होते ही मुख्य द्वार या कमरों में घोर अंधेरा रहता है, वहां नकारात्मक शक्तियां और दरिद्रता अपने पैर पसारने लगती हैं। यही वजह है कि हिंदू धर्म में सदियों से शाम होते ही घर के मुख्य द्वार और तुलसी के पौधे के पास घी या सरसों के तेल का दीपक जलाने और पूरे घर की लाइटें ऑन करने की परंपरा चली आ रही है।

4. शाम के समय सोने और रोने से बचें

शास्त्रों में स्पष्ट उल्लेख है कि शाम का समय सोने (निद्रा), भोजन करने या क्रोध-रुदन के लिए बिल्कुल नहीं है। जो लोग सूर्यास्त के समय सोते हैं, उनका स्वास्थ्य तो खराब होता ही है, साथ ही उनका भाग्य भी सो जाता है। इस समय घर में चीखने-चिल्लाने या रोने-धोने से वहां का वातावरण दूषित होता है और अलक्ष्मी (दरिद्रता की देवी) का वास होता है।

क्या कहते हैं ज्योतिष विशेषज्ञ?

ज्योतिष विद्वानों के अनुसार, शाम का समय संधि काल होता है, जो ध्यान, पूजा-पाठ, आरती और सकारात्मक आत्मचिंतन के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इस समय यदि व्यक्ति शांत मन से भगवान का स्मरण करे, कपूर जलाकर पूरे घर में उसका धुआं दिखाए और घर का माहौल खुशनुमा व पवित्र रखे, तो कुंडली के बुरे ग्रहों का प्रभाव भी समाप्त हो जाता है। इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है, जिससे आर्थिक तंगी दूर होती है और जीवन में सुख, शांति व संतुलन वापस लौट आता है।

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