नई दिल्ली, ब्यूरो। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 पेपर लीक मामले में अब तक का सबसे सनसनीखेज और बड़ा खुलासा सामने आया है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने इस पूरे रैकेट के मुख्य सूत्रधार यानी ‘किंगपिन’ को दबोच लिया है। सीबीआई ने महाराष्ट्र के पुणे से एक जाने-माने केमिस्ट्री लेक्चरर पी.वी. कुलकर्णी को गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसियों का बेहद चौंकाने वाला दावा है कि कुलकर्णी की नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की आंतरिक परीक्षा प्रक्रिया और गोपनीय प्रणाली तक सीधी पहुंच (Direct Access) थी। उसने इसी का फायदा उठाकर परीक्षा से पहले ही असली प्रश्नपत्र चुराए और उन्हें छात्रों तक पहुंचाया। नीट धांधली मामले में देश के अलग-अलग हिस्सों से अब तक कुल 8 गिरफ्तारियां हो चुकी हैं, जिनमें पी.वी. कुलकर्णी की गिरफ्तारी को सबसे बड़ी कामयाबी माना जा रहा है।
सीबीआई की तफ्तीश में सामने आया है कि कुलकर्णी ने पुणे स्थित अपने आलीशान घर को ही ‘सीक्रेट ऑपरेशन सेंटर’ बना रखा था। उसने वहां एक ‘स्पेशल कोचिंग क्लास’ चलाई, जहां चुनिंदा छात्रों को परीक्षा से ठीक पहले हूबहू वही सवाल और उनके जवाब रटवाए गए, जो बाद में NEET-UG 2026 के असली क्वेश्चन पेपर में पूछे गए थे। इस खुलासे ने देश के लाखों ईमानदार छात्रों को झकझोर कर रख दिया है और मेडिकल प्रवेश परीक्षा की पारदर्शिता, सुरक्षा और एनटीए की साख पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं।
कौन है मास्टरमाइंड पी.वी. कुलकर्णी, जिसने पूरे देश की व्यवस्था को हिलाया?
पकड़ा गया आरोपी पी.वी. कुलकर्णी मूल रूप से महाराष्ट्र के लातूर का रहने वाला है, जो लंबे समय से शिक्षा के हब माने जाने वाले पुणे में एक केमिस्ट्री लेक्चरर के तौर पर काम कर रहा था। सीबीआई की शुरुआती जांच के मुताबिक, कुलकर्णी एनटीए (NTA) की ओर से आयोजित होने वाली परीक्षा प्रक्रिया के प्रशासनिक या गोपनीय विंग से किसी न किसी रूप में जुड़ा हुआ था। इसी वजह से उसे लॉकर या स्ट्रॉन्ग रूम में रखे प्रश्नपत्रों तक पहुंचने का मौका मिल गया। जांच अधिकारियों के अनुसार, कुलकर्णी पिछले कई सालों से मेडिकल एंट्रेंस कोचिंग के एक बड़े और सीक्रेट सिंडिकेट नेटवर्क से जुड़ा हुआ था। छात्रों और स्थानीय कोचिंग संचालकों के बीच उसकी पकड़ बेहद मजबूत थी, जिसका फायदा उठाकर उसने इस बड़े घोटाले को अंजाम दिया।
पुणे के घर में चल रही थीं ‘सीक्रेट कोचिंग क्लास’, हाथ से लिखे गए थे लीक सवाल
सीबीआई के आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, यह घिनौना खेल अप्रैल 2026 के आखिरी हफ्ते में खेला गया था। कुलकर्णी ने इस रैकेट की एक और मुख्य आरोपी मनीषा वाघमारे की मदद से ऐसे रईस छात्रों और अभिभावकों को इकट्ठा किया जो पेपर के लिए मोटी रकम देने को तैयार थे। इसके बाद पुणे स्थित कुलकर्णी के घर पर ‘स्पेशल और सीक्रेट’ क्लास आयोजित की गई।
इस क्लास के नियम बेहद कड़े थे। यहां कुलकर्णी ने लीक हुए प्रश्नपत्र के सभी सवाल, उनके चारों विकल्प और सही उत्तरों को एक-एक कर छात्रों को मुंहजुबानी डिक्टेट (नोट) कराया। छात्रों ने किसी भी डिजिटल सबूत से बचने के लिए उन सवालों को अपनी पर्सनल नोटबुक में हाथ से लिखा और वहीं बैठकर रातभर रट्टा मारा। बाद में जब परीक्षा के दिन NEET-UG 2026 का असली पेपर खुला, तो छात्रों की नोटबुक में लिखे सवाल और असली पेपर के सवाल सौ फीसदी हूबहू मैच कर गए।
देशभर से अब तक 8 गिरफ्तारियां, दिल्ली लाए जा रहे आरोपी
नीट पेपर लीक मामले की कड़ियां देश के कई राज्यों से जुड़ी हुई हैं। सीबीआई ने इस महाघोटाले में अब तक कुल 8 आरोपियों को बेनकाब करते हुए गिरफ्तार किया है। ये गिरफ्तारियां देश के प्रमुख शहरों जैसे जयपुर, गुरुग्राम, नासिक, पुणे और अहिल्यानगर (अहमदनगर) से की गई हैं।
जांच एजेंसी ने बताया कि गिरफ्तार किए गए आरोपियों में से 5 को कोर्ट में पेश कर 7 दिनों की सख्त पुलिस रिमांड पर ले लिया गया है, जिनसे आमने-सामने बिठाकर पूछताछ की जा रही है। वहीं, मुख्य सरगना कुलकर्णी सहित 2 अन्य आरोपियों को पुणे कोर्ट में पेश करने के बाद ट्रांजिट रिमांड के जरिए विशेष विमान से दिल्ली लाया जा रहा है। छापेमारी के दौरान आरोपियों के ठिकानों से दर्जनों इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस, वीआईपी मोबाइल फोन, लैपटॉप और कई बेहद संवेदनशील सरकारी दस्तावेज जब्त किए गए हैं, जिनकी फॉरेंसिक और टेक्निकल जांच जारी है।
करोड़ों के लेनदेन और बड़े कोचिंग सेंटर्स पर CBI का फोकस
सीबीआई की विशेष टीमें अब इस पूरे लीक कांड में शामिल बड़े बिचौलियों, नामी गिरामी कोचिंग सेंटर्स के मालिकों और हवाला ऑपरेटरों के नेटवर्क को खंगालने में जुटी हैं। जांच एजेंसी का मानना है कि इस ‘स्पेशल क्लास’ में शामिल होने के लिए प्रत्येक छात्र से कथित तौर पर 40 से 50 लाख रुपये तक वसूले गए थे। सीबीआई अब बैंक खातों, डिजिटल ट्रांजैक्शन और जमीन के सौदों की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस खेल में इकट्ठा हुआ करोड़ों रुपये का काला धन और किन-किन रसूखदार लोगों, अधिकारियों या नेताओं की जेब तक पहुंचा है।














