ट्रंप सरकार को बड़ा झटका: नेशनल इंटेलिजेंस डायरेक्टर तुलसी गबार्ड का इस्तीफा, जानिए अचानक क्यों लिया फैसला

वाशिंगटन डीसी।  अमेरिकी राजनीति और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की कैबिनेट से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। अमेरिकी संसद की पहली हिंदू सांसद और नेशनल इंटेलिजेंस की डायरेक्टर तुलसी गबार्ड (Tulsi Gabbard) ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने यह चौंकाने वाला और भावुक निर्णय किसी राजनीतिक मतभेद के कारण नहीं, बल्कि अपने पति अब्राहम विलियम्स की गंभीर बीमारी के चलते लिया है। तुलसी गबार्ड का यह इस्तीफा ट्रंप प्रशासन के लिए एक बहुत बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि वह कैबिनेट के सबसे महत्वपूर्ण और शक्तिशाली पदों में से एक का नेतृत्व कर रही थीं।

पति को हुआ दुर्लभ बोन कैंसर, मुश्किल घड़ी में साथ देने के लिए छोड़ा पद

फॉक्स न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, तुलसी गबार्ड ने अपने त्याग पत्र में बेहद भावुक वजह का खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि उनके पति अब्राहम विलियम्स को हाल ही में एक बेहद दुर्लभ और गंभीर प्रकार का हड्डी का कैंसर (Bone Cancer) होने का पता चला है। गबार्ड ने स्पष्ट किया है कि जीवन की इस सबसे कठिन परीक्षा और लड़ाई में अपने पति के साथ चौबीसों घंटे खड़े रहने के लिए ही उन्होंने नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर (DNI) के पद को छोड़ने का फैसला किया है।

ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति ट्रंप से की मुलाकात, इस तारीख को होगा आखिरी दिन

तुलसी गबार्ड ने शुक्रवार को व्हाइट हाउस के ओवल ऑफिस में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ एक विशेष बैठक की और उन्हें अपनी इस व्यक्तिगत परिस्थिति से अवगत कराते हुए इस्तीफे की जानकारी दी। ‘ऑफिस ऑफ द डायरेक्टर ऑफ नेशनल इंटेलिजेंस’ (ODNI) में उनका आखिरी दिन 30 जून, 2026 होने की उम्मीद है।

राष्ट्रपति ट्रंप को लिखा धन्यवाद पत्र: गबार्ड ने अपने इस्तीफे में लिखा, “आपने मुझ पर जो अटूट भरोसा दिखाया और पिछले डेढ़ साल से नेशनल इंटेलिजेंस के डायरेक्टर के ऑफिस का नेतृत्व करने का जो ऐतिहासिक मौका दिया, उसके लिए मैं आपकी सदैव आभारी रहूंगी। लेकिन दुर्भाग्य से, मुझे अपनी पारिवारिक परिस्थितियों के कारण यह इस्तीफा देना पड़ रहा है, जो 30 जून, 2026 से प्रभावी होगा। मेरे पति अब्राहम को आने वाले हफ्तों और महीनों में चिकित्सा के स्तर पर बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।”

‘अब्राहम हमेशा मेरी ताकत रहे, अब अकेले इस लड़ाई को लड़ने नहीं दे सकती’

अपने रेजिग्नेशन लेटर में तुलसी गबार्ड ने अपने और पति के मजबूत रिश्ते का जिक्र करते हुए लिखा कि हमारी शादी के 11 सालों में अब्राहम हमेशा मेरे लिए एक सबसे मजबूत सहारा बनकर खड़े रहे हैं। चाहे वह पूर्वी अफ्रीका में एक ‘जॉइंट स्पेशल ऑपरेशंस मिशन’ पर मेरी सैन्य तैनाती का समय रहा हो, मेरे कई कठिन राजनीतिक अभियान रहे हों, या फिर खुफिया विभाग के इस सर्वोच्च पद पर मेरी सेवाएं रही हों— उन्होंने हर मोड़ पर मेरा साथ दिया है। उनकी इसी ताकत और प्यार ने मुझे हर चुनौती से लड़ना सिखाया है। इसलिए, मेरी अंतरात्मा मुझे इसकी गवाही नहीं देती कि मैं इस बेहद व्यस्त और जिम्मेदारी वाले पद पर बनी रहूं और मेरे पति अकेले इस जानलेवा बीमारी का सामना करें। इस समय मेरा सार्वजनिक सेवा से हटकर उनके साथ रहना सबसे ज्यादा जरूरी है।

बतौर डायरेक्टर गबार्ड ने किए थे कई क्रांतिकारी बदलाव, बचाए करोड़ों डॉलर

तुलसी गबार्ड ने अपने पत्र के अंत में लिखा कि अमेरिकी खुफिया समुदाय (Intelligence Community) के प्रमुख के तौर पर देश की सेवा करने का जो गहरा सम्मान उन्हें मिला, उसके लिए वह हमेशा राष्ट्रपति ट्रंप और अमेरिकी जनता की आभारी रहेंगी।

गौरतलब है कि डीएनआई (DNI) के रूप में अपने छोटे से कार्यकाल में गबार्ड ने अमेरिकी खुफिया तंत्र को पूरी तरह से नया रूप देने के लिए कई क्रांतिकारी कदम उठाए थे। उन्होंने एजेंसी के अनावश्यक खर्चों और आकार को छोटा करके टैक्सपेयर्स के हर साल 700 मिलियन डॉलर (करीब 5800 करोड़ रुपये) से ज्यादा बचाए थे। इसके अलावा उन्होंने इंटेलिजेंस कम्युनिटी में चल रहे विवादित डीईआई (DEI – Diversity, Equity, and Inclusion) प्रोग्राम्स को भी पूरी तरह खत्म कर दिया था।

इतना ही नहीं, इस महीने तक गबार्ड ने अमेरिकी इतिहास के कई बड़े राजों से पर्दा उठाते हुए सरकारी रिकॉर्ड के 5 लाख से ज्यादा पन्नों को सार्वजनिक (Declassify) कर दिया था। इन दस्तावेजों में बहुचर्चित ट्रंप-रूस जांच, जेएफके (JFK) और आरएफके (RFK) की हत्याओं से जुड़े बेहद संवेदनशील रिकॉर्ड शामिल थे, जिसकी वजह से वह लगातार अंतरराष्ट्रीय मीडिया की सुर्खियों में बनी हुई थीं।

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