वॉशिंगटन / नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप की हत्या की एक बेहद खतरनाक और बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश का सनसनीखेज भंडाफोड़ हुआ है। ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) द्वारा प्रशिक्षित एक खूंखार इराकी आतंकवादी ने इवांका ट्रंप को मौत के घाट उतारने की कसम खाई थी। हाल ही में गिरफ्तार किए गए इस खूंखार आतंकी के पास से फ्लोरिडा में स्थित इवांका ट्रंप के आलीशान आवास का बकायदा एक नक्शा भी बरामद हुआ है, जिससे सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गई हैं।

कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने की थी खौफनाक जिद
इस पूरी खौफनाक साजिश की परतें खोलते हुए जांच एजेंसियों ने बताया कि यह सब कुछ करीब छह साल पहले बगदाद में हुए अमेरिकी ड्रोन हमले में मारे गए ईरानी सैन्य प्रमुख कासिम सुलेमानी की मौत का बदला लेने के लिए रचा गया था। गिरफ्तार किया गया इराकी आतंकवादी मोहम्मद बाकिर साद दाऊद अल-सादी, सुलेमानी को अपने पिता के समान मानता था। बदले की आग में अंधे अल-सादी ने सोशल मीडिया पर इवांका ट्रंप और उनके पति जैरेड कुशनर के फ्लोरिडा वाले घर का नक्शा तक शेयर कर दिया था। उसने खुलेआम धमकी दी थी कि अमेरिकी सीक्रेट सर्विस भी उन्हें उसकी पहुंच से नहीं बचा पाएगी और यह बदला बस समय की बात है। बताया जा रहा है कि शादी से पहले यहूदी धर्म अपनाने वाली इवांका ट्रंप इस पूरी खतरनाक साजिश का मुख्य निशाना थीं।
तुर्की में गिरफ्तारी के बाद अमेरिका हुआ प्रत्यर्पण
अमेरिकी न्याय विभाग की ओर से मिली आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, अल-सादी को 15 मई 2026 को तुर्की में उस समय दबोचा गया, जब वह वहां से रूस भागने की फिराक में था। तुर्की में गिरफ्तारी के तुरंत बाद उसे कानूनी प्रक्रिया के तहत अमेरिका प्रत्यर्पित कर दिया गया है। अमेरिका लाते ही उस पर शिकंजा कस दिया गया है। इस आतंकी पर यूरोप और अमेरिका में एक या दो नहीं, बल्कि कुल 18 आतंकी हमलों और उनकी कोशिशों के बेहद गंभीर आरोप दर्ज हैं। इन आरोपों में मार्च 2026 में एम्स्टर्डम के एक बैंक पर बमबारी, टोरंटो में अमेरिकी वाणिज्य दूतावास पर अंधाधुंध गोलीबारी, लंदन में यहूदियों पर चाकू से जानलेवा हमला और बेल्जियम व रॉटरडैम में धार्मिक स्थलों पर आगजनी जैसी कई खौफनाक वारदातें शामिल हैं।
इराकी प्रधानमंत्री की सहमति वाला ‘VIP पासपोर्ट’ देख अधिकारी दंग
जांच में सबसे ज्यादा चौंकाने वाला खुलासा आरोपी के पासपोर्ट को लेकर हुआ है। खतरनाक आतंकी संगठन कताइब हिजबुल्लाह और आईआरजीसी (IRGC) के सक्रिय गुर्गे अल-सादी के पास से गिरफ्तारी के वक्त इराक का ‘आधिकारिक सर्विस पासपोर्ट’ बरामद हुआ। यह एक ऐसा वीआईपी पासपोर्ट है जो केवल इराकी प्रधानमंत्री की विशेष सहमति से ही वहां के सरकारी कर्मचारियों को जारी किया जाता है। इसी रसूखदार वीआईपी पासपोर्ट का फायदा उठाकर वह हर देश की सुरक्षा जांच से आसानी से बच जाता था और उसे कहीं का भी वीजा बेहद आराम से मिल जाता था।
सोशल मीडिया पर पिस्तौल की तस्वीरें और ट्रैवल एजेंसी का मुखौटा
आतंकी अल-सादी ने अपने काले कारनामों और टेरर नेटवर्क को दुनिया की नजरों से छिपाने के लिए बाकायदा एक ट्रैवल एजेंसी भी खोल रखी थी, जिसकी आड़ में वह अपना आतंकी नेटवर्क चलाता था। वह सोशल मीडिया पर भी काफी एक्टिव रहता था। वह दुनिया के मशहूर और आलीशान पर्यटन स्थलों पर अपनी तस्वीरें पोस्ट करता था, लेकिन इन्हीं तस्वीरों के साथ वह साइलेंसर लगी पिस्तौल की तस्वीरें भी शेयर करके अपने पीड़ितों को डराता-धमकाता था। फिलहाल, इस बड़े खुलासे के बाद अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियों ने राहत की सांस ली है और अल-सादी को ब्रुकलिन की सबसे सुरक्षित जेल के एकांत कारावास (solitary confinement) में कड़े पहरे के बीच रखा गया है।















