भोपाल/रायसेन। मध्य प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी और चिलचिलाती धूप के साथ-साथ जल संकट का ऐसा दौर शुरू हो चुका है, जो अब मासूम जिंदगियों पर भारी पड़ने लगा है। प्रदेश के कई हिस्सों में पानी की किल्लत इस कदर गहरा गई है कि लोग अपनी जान जोखिम में डालकर पानी का इंतजाम करने को मजबूर हैं। ऐसा ही एक दिल दहला देने वाला मामला रायसेन जिले से सामने आया है, जहां पीने का पानी भरने गई तीन आदिवासी छात्राओं की कुएं में डूबने से दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है और गांव में मातम पसरा हुआ है।
एक किलोमीटर दूर कुएं से पानी लाने की मजबूरी
यह दर्दनाक हादसा रायसेन जिले की गैरतगंज तहसील के अंतर्गत आने वाले सगौर गांव का है। ग्रामीणों के मुताबिक, गांव में लंबे समय से पेयजल का गंभीर संकट बना हुआ है। सरकारी दावे हवा-हवाई साबित हो रहे हैं और ग्रामीणों को अपनी प्यास बुझाने के लिए गांव से करीब एक किलोमीटर दूर स्थित एक कुएं पर निर्भर रहना पड़ता है। शनिवार की सुबह भी रोज की तरह गांव की चार छात्राएं पानी भरने के लिए इसी कुएं पर पहुंची थीं। भीषण गर्मी के कारण बच्चियां कुएं के पास नहाने लगीं, लेकिन उन्हें क्या पता था कि यह पानी उनके लिए काल बन जाएगा। नहाने के दौरान अचानक एक छात्रा का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चली गई। अपनी सहेली को डूबता देख उसे बचाने के लिए दूसरी और फिर तीसरी छात्रा ने भी कुएं में छलांग लगा दी। पानी गहरा होने के कारण तीनों बच्चियां खुद को संभाल नहीं पाईं और डूब गईं।
सगी बहनों सहित तीन मासूमों ने तोड़ा दम
इस हादसे में जान गंवाने वाली बच्चियों की पहचान बेहद दर्दनाक है। मृत छात्राओं में राधा (12 वर्ष) और उसकी सगी बहन तनु (13 वर्ष) शामिल हैं, जो हलके राम की बेटियां थीं। वहीं, तीसरी बच्ची उनकी चचेरी बहन अमृता (12 वर्ष) थी, जिसके पिता का नाम रामगोपाल है। राधा और अमृता कक्षा पांचवीं में पढ़ती थीं, जबकि तनु आठवीं कक्षा की छात्रा थी। एक ही परिवार की तीन बेटियों की मौत से माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल है। घटना के वक्त कुएं पर चौथी छात्रा अमीना भी मौजूद थी, जो इस हादसे को देखकर सहम गई। उसने तुरंत दौड़कर गांव की तरफ रुख किया और परिजनों व ग्रामीणों को इस अनहोनी की जानकारी दी।
अस्पताल पहुंचने से पहले ही थम गईं सांसें
अमीना की बात सुनते ही गांव में चीख-पुकार मच गई। बदहवास परिजन और ग्रामीण फौरन कुएं की तरफ भागे। ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद तीनों बच्चियों को कुएं के गहरे पानी से बाहर निकाला। उस वक्त बच्चियों की सांसें बेहद कमजोर चल रही थीं। ग्रामीण बिना वक्त गंवाए उन्हें लेकर नजदीकी अस्पताल पहुंचे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। अस्पताल में डॉक्टरों ने स्वास्थ्य परीक्षण के बाद तीनों मासूम बच्चियों को मृत घोषित कर दिया। इस घटना के बाद से ही प्रशासनिक अमले और स्थानीय नेताओं के खिलाफ ग्रामीणों में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। लोगों का कहना है कि अगर गांव में पानी की सही व्यवस्था होती, तो आज इन मासूमों की जान नहीं जाती।














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