देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर बेहद सख्त रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी को नोटिस जारी करते हुए परीक्षा व्यवस्था में किए जा रहे सुधारों पर अब तक की प्रगति का पूरा ब्योरा मांगा है। कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा है कि केवल कागजी या अस्थायी उपायों से काम नहीं चलेगा, बल्कि परीक्षा प्रणाली में ऐसे पुख्ता और स्थायी बदलाव करने होंगे जो भविष्य में इस तरह की गड़बड़ियों को पूरी तरह रोक सकें।
सुप्रीम कोर्ट के तीखे सवाल और मुख्य बिंदु
न्यायालय की पीठ ने सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार से कई गंभीर और अहम मुद्दों पर जवाब तलब किया है। कोर्ट ने साफ किया है कि परीक्षा सुधारों को केवल अल्पकालिक राहत के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। सरकार को यह बताना होगा कि एक स्थायी और फूलप्रूफ व्यवस्था स्थापित करने के लिए जमीन पर क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। उच्च स्तरीय समिति द्वारा चिन्हित किए गए 10 प्रमुख क्षेत्रों, जिनमें डिजिटल ढांचा, सुरक्षा प्रोटोकॉल, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, पारदर्शिता और मानव संसाधन प्रबंधन शामिल हैं, को लागू करने की वर्तमान स्थिति क्या है, इस पर भी जवाब मांगा गया है।
वायुसेना की मदद और कंप्यूटर आधारित परीक्षा पर चर्चा
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि पेपर लीक के बाद प्रश्न पत्रों की सुरक्षित आवाजाही के लिए भारतीय वायुसेना की मदद लेना केवल एक आपातकालीन और अस्थायी कदम हो सकता है, इसे भविष्य का स्थायी समाधान नहीं माना जा सकता। इसके साथ ही, भविष्य में परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए कंप्यूटर आधारित परीक्षा प्रणाली अपनाने और उसके डेटा सुरक्षा उपायों पर भी विस्तार से चर्चा हुई। कोर्ट ने यह भी जानना चाहा कि क्या उम्मीदवारों की पहचान की अचूक पुष्टि के लिए आधुनिक तकनीकों का उपयोग किया जा सकता है।
सोमवार को होगी अगली सुनवाई, अदालत रखेगी कड़ी नजर
मामले की गंभीरता को देखते हुए सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को आश्वस्त किया है कि सरकार की ओर से इन सभी बिंदुओं पर एक नया और विस्तृत हलफनामा जल्द ही दाखिल किया जाएगा। वहीं, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि वह इस पूरे मामले की लगातार निगरानी करेगा ताकि परीक्षा व्यवस्था को पूरी तरह संस्थागत और सुरक्षित बनाया जा सके। इस मामले की अगली सुनवाई अब आगामी सोमवार को होगी, जिस पर पूरे देश के लाखों छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की निगाहें टिकी हुई हैं।















