नई दिल्ली: नीट-यूजी (NEET-UG), जेईई मेन (JEE Main) और यूजीसी-नेट (UGC-NET) जैसी देश की सबसे संवेदनशील और बड़ी प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करने वाली नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) एक बार फिर विवादों के घेरे में है। इस बार विवाद की वजह कोई पेपर लीक नहीं, बल्कि एजेंसी का ढांचागत संकट है। केंद्र सरकार ने राज्यसभा में खुलासा किया है कि करोड़ों छात्रों का भविष्य तय करने वाली इस राष्ट्रीय एजेंसी के पास इस समय महज़ 24 स्थायी (परमानेंट) कर्मचारी ही मौजूद हैं।
39 पद ही मंजूर, बाकी काम 73 कॉन्ट्रैक्ट और 124 आउटसोर्स कर्मचारियों के भरोसे
शिक्षा मंत्रालय द्वारा संसद में पेश किए गए आंकड़ों के मुताबिक, NTA में स्थायी कर्मचारियों के लिए स्वीकृत पदों की कुल संख्या ही केवल 39 है, जिनमें से 15 पद फिलहाल खाली पड़े हैं। इन 24 स्थायी अधिकारियों के अलावा एजेंसी का पूरा कामकाज गैर-स्थायी स्टाफ चला रहा है:
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कॉन्ट्रैक्ट स्टाफ (73): इनमें 44 कंसल्टेंट, 17 यंग प्रोफेशनल, 5 सीनियर कंसल्टेंट, 3 एडवाइजर और 1 सीनियर सॉफ्टवेयर डेवलपर शामिल हैं।
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आउटसोर्स कर्मचारी (124): इनमें डेटा एनालिस्ट, लीगल एसोसिएट, तकनीकी सहायक और हाउसकीपिंग स्टाफ जैसे पद शामिल हैं।
साल 2018 में गठन के बाद से अब तक 270 से अधिक राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाएं करा चुकी और 6.6 करोड़ से अधिक उम्मीदवारों का पंजीकरण संभाल चुकी एजेंसी की इस निर्भरता पर अब सवाल उठ रहे हैं।
सुधार की कवायद: NTA में बनाए जाएंगे 16 नए सीनियर पोस्ट
गैर-स्थायी कर्मचारियों के भरोसे इतना बड़ा तंत्र चलाने पर उठ रहे सवालों के बीच शिक्षा मंत्रालय ने NTA के पुनर्गठन और मजबूती की योजना साझा की है। सरकार ने बताया कि एजेंसी के प्रशासनिक और निगरानी ढांचे को बेहतर बनाने के लिए 16 नए वरिष्ठ पद सृजित किए जा रहे हैं। इनमें 8 डायरेक्टर और 8 जॉइंट डायरेक्टर के पद शामिल होंगे, जिन्हें जल्द ही डेप्युटेशन प्रक्रिया के जरिए भरा जाएगा।
‘नीट बंद करो, शिक्षा को राज्य सूची में लाओ’—स्टालिन और विजय ने खोला मोर्चा
NTA के स्टाफ संकट की खबर बाहर आते ही नीट परीक्षा को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो गई है। जंतर-मंतर पर CJP के अनशन के बीच दक्षिण की राजनीति में भी हड़कंप मच गया है:
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एमके स्टालिन (मुख्यमंत्री, तमिलनाडु): उन्होंने नीट को पूरी तरह खत्म करने की अपनी पुरानी मांग दोहराते हुए कहा कि यह परीक्षा व्यवस्था बड़े स्तर पर धांधली और असमानता को बढ़ावा देती है।
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विजय (प्रमुख, टीवीके): तमिलगा वेत्री कझगम के प्रमुख विजय ने केंद्र सरकार से छात्रों के विरोध को गंभीरता से सुनने की अपील की और शिक्षा को पुनः समवर्ती सूची से हटाकर राज्य सूची (State List) में शामिल करने की मांग उठाई। साथ ही, दिल्ली में राहुल गांधी समेत विपक्षी नेताओं की पुलिस हिरासत को लोकतंत्र विरोधी करार दिया।















