Tvisha Sharma Death Case: ‘ससुराल नहीं नर्क में थी ट्विशा…’, सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी; CBI को तुरंत जांच शुरू करने का आदेश

नई दिल्ली। देश को झकझोर देने वाले मशहूर एक्ट्रेस और मॉडल ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में आज, 25 मई को सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम और हाई-प्रोफाइल सुनवाई हुई। इस संवेदनशील मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्वोच्च अदालत ने इस पर स्वतः संज्ञान (Suo Motu) लिया है। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए कई बेहद कड़े और ऐतिहासिक निर्देश जारी किए हैं।

अदालत की कार्रवाई के दौरान देश के सॉलिसिटर जनरल (SG) तुषार मेहता ने ट्विशा की ससुराल में स्थिति को लेकर एक ऐसी दर्दनाक टिप्पणी की, जिसने कोर्ट रूम में मौजूद हर शख्स को सन्न कर दिया।

“माता-पिता के लिए डरी-सहमी बेटी से बेहतर तलाकशुदा बेटी है”

सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने ट्विशा शर्मा की प्रताड़ना का जिक्र करते हुए बेहद भावुक और सख्त दलील दी। उन्होंने कोर्ट से कहा, “ट्विशा शर्मा अपने ससुराल में नहीं, बल्कि सीधे नर्क में जी रही थी। आज के समय में माता-पिता के लिए अपनी ससुराल में घुट-घुटकर जीने वाली या डरी-सहमी बेटी से कहीं बेहतर एक तलाकशुदा बेटी होती है।”

इस दौरान चीफ जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने भी मामले को लेकर चल रही बयानबाजी पर गहरी नाराजगी और सख्त रुख अपनाया। कोर्ट ने साफ लफ्जों में कहा कि इस मामले को प्रभावित करने के लिए सोशल मीडिया या बाहर जो नैरेटिव (एजेंडा) गढ़ा जा रहा है, न्यायपालिका उसका कड़ा विरोध करती है और किसी भी दबाव में नहीं आएगी।

किसी भी नैरेटिव पर न जाएं, बिना भेदभाव के हो जांच: CJI सूर्यकांत

मामले की निष्पक्षता पर जोर देते हुए चीफ जस्टिस (CJI) सूर्यकांत ने जांच एजेंसियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “जांच एजेंसियां पीड़ित परिवार या दूसरे पक्ष के बयानों और सोशल मीडिया के दावों पर बिल्कुल न जाएं। समाज का एक तबका यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहा है कि न्यायपालिका निष्पक्ष सुनवाई की अनुमति नहीं दे रही है। हमें अपनी राज्य एजेंसियों या केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पर कोई संदेह नहीं है। हम सिर्फ यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि जो दुर्भाग्यपूर्ण घटना हुई है, उसकी पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी भेदभाव के जांच हो।”

इस दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने कोर्ट को अवगत कराया कि उच्च न्यायालय के आदेश और दिशा-निर्देशों के मुताबिक, भोपाल में ट्विशा का दोबारा पोस्टमॉर्टम (Second Post-Mortem) कराया जा चुका है। सरकार ने मामले की जांच पूरी तरह से केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की सिफारिश कर दी है। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया कि सीबीआई बिना वक्त गंवाए इस केस को अपने हाथ में ले और तुरंत तफ्तीश शुरू करे।

मीडिया ट्रायल पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा ‘एक्शन’, दोनों पक्षों को फटकार

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने मामले को लेकर चल रहे ‘मीडिया ट्रायल’ पर गहरी चिंता व्यक्त की। सुप्रीम कोर्ट ने मृतका और आरोपी, दोनों पक्षों को कड़ी हिदायत दी है कि वे सार्वजनिक रूप से या किसी भी मीडिया मंच पर बयानबाजी करने से पूरी तरह बचें। कोर्ट ने कहा कि मीडिया में अपनी बात रखने के बजाय दोनों पक्ष अपने साक्ष्य और बयान सीधे जांच एजेंसी (CBI) के सामने दर्ज कराएं, ताकि जारी जांच पर कोई प्रतिकूल या गलत प्रभाव न पड़े।

इसके साथ ही देश की सबसे बड़ी अदालत ने मीडिया घरानों से भी एक बड़ा अनुरोध किया है। कोर्ट ने कहा कि मीडिया को ऐसे किसी भी व्यक्ति का इंटरव्यू या बयान रिकॉर्ड करने से बचना चाहिए, जो इस केस में संभावित गवाह हो सकते हैं। ऐसा करने से मुख्य जांच और गवाहों के बयानों पर अनावश्यक प्रभाव पड़ता है।

सास गिरिबाला सिंह पर भी बरसे सॉलिसिटर जनरल

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में उनकी सास गिरिबाला सिंह की भूमिका भी अब जांच के दायरे में आ गई है। सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि ट्विशा की सास गिरिबाला सिंह लगातार टीवी चैनलों और मीडिया को इंटरव्यू देकर मृतका की छवि को खराब करने और उसे बदनाम करने की कोशिश कर रही हैं। वह पुलिस और जांच एजेंसी को सहयोग करने या बयान देने के बजाय मीडिया में बैठकर अपनी कहानी सुना रही हैं, जो कि कानूनी रूप से पूरी तरह गलत है।

इस दलील पर सहमति जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने भी इस कृत्य पर गहरी चिंता जताई और कहा कि अदालत ऐसे किसी भी प्रयास या नैरेटिव को बर्दाश्त नहीं करेगी जो कानूनी प्रक्रिया को प्रभावित या डाइवर्ट करने की कोशिश करे।

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