यूपी पुलिस को शर्मसार करने वाला दरोगा अमित मौर्य गिरफ्तार: कानपुर गैंगरेप केस में 4 महीने से था फरार, 50 हजार का था इनाम

कानपुर/मथुरा। उत्तर प्रदेश की खाकी को दागदार करने वाले फरार सब-इंस्पेक्टर (दारोगा) अमित कुमार मौर्य को आखिरकार पुलिस ने दबोच लिया है। कानपुर के सचेंडी इलाके में एक 14 वर्षीय नाबालिग किशोरी से गैंगरेप के सनसनीखेज मामले में नामजद दारोगा अमित कुमार पिछले चार महीनों से पुलिस की आंखों में धूल झोंककर फरार चल रहा था। शुक्रवार को पुलिस ने मुखबिर की सटीक सूचना पर घेराबंदी करते हुए आरोपी दारोगा को सचेंडी के सोना गांव से गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दिया है। इस घिनौने कांड का सह-आरोपी यू-ट्यूबर पहले ही जेल की हवा खा रहा है, वहीं हाईकोर्ट से अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद आरोपी दारोगा पर कानून का शिकंजा पूरी तरह कस गया था।

शौच के लिए निकली किशोरी को कार में खींचकर किया था गैंगरेप

दिल दहला देने वाली यह वारदात सचेंडी थाना क्षेत्र के एक गांव में इसी साल 5 जनवरी की देर शाम घटित हुई थी। गांव की रहने वाली 14 साल की एक किशोरी देर शाम घर से शौच के लिए बाहर निकली थी। जब वह देर रात तक वापस नहीं लौटी, तो परिजनों ने अनहोनी की आशंका में उसकी तलाश शुरू की। रात करीब 12 बजे किशोरी बदहवास और लहूलुहान हालत में रोती हुई घर पहुंची। परिजनों की पूछताछ में पीड़िता ने जो आपबीती सुनाई, उसने सबके होश उड़ा दिए। किशोरी ने आरोप लगाया कि गांव के यू-ट्यूबर शिवबरन यादव और दारोगा अमित कुमार मौर्य ने उसे जबरन कार में खींच लिया और सुनसान जगह पर ले जाकर उसके साथ गैंगरेप की वारदात को अंजाम दिया।

कुर्की की मुनादी और 50 हजार के इनाम के डर से आया पकड़ में?

वारदात के बाद सचेंडी पुलिस ने मुख्य आरोपी यू-ट्यूबर शिवबरन को तो तत्काल गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, लेकिन खाकी की आड़ में छिपा दारोगा अमित मौर्य फरार हो गया। पुलिस कमिश्नरेट ने उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। गिरफ्तारी से बचने के लिए दारोगा ने हाईकोर्ट की शरण ली थी, लेकिन उच्च न्यायालय ने उसकी याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद पुलिस ने आरोपी के गोरखपुर स्थित पैतृक आवास पर कुर्की (धारा 82/83) का नोटिस चस्पा कर दिया था। गलियारों में चर्चा है कि पैतृक घर की कुर्की और बदनामी के डर से घबराया दारोगा छिपते-छिपाते सचेंडी इलाके में आया, जहां पुलिस ने उसे धर दबोचा।

दोषी दरोगा को बचाने में नपे थे थाना प्रभारी समेत कई बड़े अफसर

इस हाईप्रोफाइल मामले में शुरुआत में सचेंडी पुलिस का रवैया बेहद शर्मनाक रहा था। पीड़ित भाई की शिकायत पर पुलिस ने खेल करते हुए बेहद हल्की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया था। इतना ही नहीं, तत्कालीन पुलिस कप्तानों और आला अफसरों को भी केस की झूठी रिपोर्ट भेजकर गुमराह किया गया। जब मामले की सच्चाई सामने आई, तो पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। तत्काल एक्शन लेते हुए पुलिस आयुक्त रघुबीर लाल ने लापरवाही बरतने वाले सचेंडी थाना प्रभारी विक्रम सिंह और भीमसेन चौकी इंचार्ज दिनेश कुमार को सस्पेंड कर दिया था। वहीं, मामले पर पर्दा डालने के आरोप में एसीपी पनकी और तत्कालीन डीसीपी पश्चिम दिनेश के कार्यक्षेत्र में भी बड़ा फेरबदल किया गया था।

मथुरा में भी खाकी का रौब: वीडियो बनाने के शक में युवक को पीटा, दरोगा लाइन हाजिर

उत्तर प्रदेश में पुलिसिया बर्बरता का एक और मामला कान्हा की नगरी मथुरा से सामने आया है। वृंदावन के ठाकुर बांके बिहारी मंदिर पुलिस चौकी पर तैनात उप-निरीक्षक (दारोगा) सुबोध मलिक को एक निर्दोष युवक की सरेराह बेरहमी से पिटाई करने के आरोप में तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया गया है।

गौरा नगर निवासी पीड़ित युवक आशीष श्रीवास्तव ने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक से शिकायत की थी कि रविवार को वह अपनी मोटरसाइकिल से बांके बिहारी मंदिर के पास बाजार से गुजर रहा था। उसी समय चौकी प्रभारी सुबोध मलिक कुछ पुलिसकर्मियों के साथ मोबाइल चोरी के आरोप में एक नाबालिग लड़के को पकड़कर ले जा रहे थे। इसी दौरान आशीष के फोन पर एक कॉल आई और वह गाड़ी रोककर बात करने लगा। दरोगा सुबोध मलिक को गलतफहमी हो गई कि युवक पुलिस की कार्रवाई का वीडियो बना रहा है। फिर क्या था, दरोगा ने आव देखा न ताव, आशीष का कॉलर पकड़ा और उसे बेरहमी से पीटना शुरू कर दिया।

दरोगा की यह पूरी गुंडागर्दी बाजार में लगी एक दुकान के सीसीटीवी (CCTV) कैमरे में कैद हो गई। सोशल मीडिया पर फुटेज वायरल होने और पीड़ित की शिकायत का संज्ञान लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने आरोपी दारोगा सुबोध मलिक को सस्पेंड करते हुए लाइन हाजिर कर दिया और मामले की विभागीय जांच के आदेश दिए हैं।

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