भारत-पाकिस्तान में छोटा सा परमाणु युद्ध भी लाएगा दुनिया का अंत ! ओजोन परत होगी तबाह, 1 अरब से ज्यादा लोग तड़पेंगे भुखमरी से: स्टडी

नई दिल्ली। बीते सालों में भारत और पाकिस्तान के बीच बढ़े सैन्य तनाव ने पूरी दुनिया को एक बड़े परमाणु युद्ध (Nuclear War) की आशंका से डरा दिया था। लेकिन अब एक नई और बेहद डरावनी साइंटिफिक स्टडी सामने आई है, जिसने पूरी मानवता के होश उड़ा दिए हैं। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इन दोनों पड़ोसी परमाणु महाशक्तियों के बीच होने वाला एक अपेक्षाकृत छोटा और सीमित सैन्य संघर्ष भी वैश्विक तबाही का कारण बन सकता है। इस युद्ध से न सिर्फ दोनों देशों का विनाश होगा, बल्कि पृथ्वी की जीवनदायिनी ओजोन परत (Ozone Layer) पूरी तरह नष्ट हो जाएगी, जिससे दुनिया भर में एक अरब से अधिक लोगों को भुखमरी के कारण अपनी जान गंवानी पड़ सकती है।

परमाणु विस्फोट के तुरंत बाद आएगी ‘न्यूक्लियर विंटर’, सूरज की रोशनी के लिए तरसेगी धरती

वियना में आयोजित ‘यूरोपियन जियोसाइंसेज यूनियन’ की बैठक में पेश की गई इस स्टडी के शोधकर्ताओं ने बेहद चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। मुख्य शोधकर्ता के अनुसार, अगर भारत और पाकिस्तान के बीच छोटे पैमाने पर भी परमाणु युद्ध होता है, तो इसके दूरगामी प्रभाव पूरी दुनिया को भुगतने होंगे। परमाणु धमाकों से पैदा होने वाली अत्यधिक गर्मी और खतरनाक रेडिएशन (विकिरण) के कारण लाखों लोग तो पलक झपकते ही मौत के मुंह में समा जाएंगे। लेकिन असली और सबसे बड़ा वैश्विक खतरा इसके बाद शुरू होगा, जिसे वैज्ञानिक भाषा में ‘न्यूक्लियर विंटर’ (परमाणु शीतकाल) कहा जाता है। महाविस्फोटों और शहरों में लगने वाली भीषण आग से अरबों टन काला धुआं और कालिख वायुमंडल में फैल जाएगी। यह धुआं आसमान में एक ऐसी मोटी परत बना देगा जो सूरज की रोशनी को पृथ्वी तक पहुंचने से पूरी तरह रोक देगी, जिससे वैश्विक तापमान में अचानक रिकॉर्ड तोड़ गिरावट आएगी और चारों तरफ भयानक अंधेरा व ठंड छा जाएगी।

1 अरब से ज्यादा लोग भुखमरी के होंगे शिकार, ओजोन परत को पहुंचेगा अपूरणीय नुकसान

साल 2007 में आई एक पुरानी रिसर्च का हवाला देते हुए इस नई स्टडी में बताया गया है कि न्यूक्लियर विंटर के कारण दुनिया भर का मौसम चक्र पूरी तरह बिगड़ जाएगा। फसलें बर्बाद हो जाएंगी, जिसके चलते वैश्विक स्तर पर पैदा होने वाले खाद्यान्न संकट से 1 अरब से अधिक लोगों की तड़प-तड़पकर भुखमरी से मौत हो सकती है। इसके अलावा, परमाणु हथियारों से निकलने वाले खतरनाक रसायन हमारी सुरक्षा ढाल यानी ओजोन परत को छिन्न-भिन्न कर देंगे। वैज्ञानिकों का दावा है कि इस सीमित युद्ध से ओजोन परत को होने वाला नुकसान उतना ही भयानक होगा, जितना अमेरिका और रूस के बीच होने वाले किसी महा-परमाणु युद्ध से होता। ओजोन परत में बड़े छेद होने के कारण सूर्य की बेहद हानिकारक अल्ट्रावायलेट (UV) किरणें सीधे पृथ्वी पर आएंगी, जो इंसानों, पेड़-पौधों और जानवरों के डीएनए तक को नष्ट कर देंगी। इसका सीधा मतलब यह है कि सालों बाद जब तापमान सामान्य भी हो जाएगा, तब भी जमीन पर कुछ उगाने लायक नहीं बचेगा।

ट्रॉपिकल विंड पैटर्न बढ़ाएगा आफत, भारत-पाकिस्तान का परमाणु कचरा पूरी दुनिया को निगलेगा

शोधकर्ता और उनकी विशेषज्ञ टीम ने पिछले कई दशकों के डेटा और अनुमानों के आधार पर भारत-पाकिस्तान परमाणु युद्ध का एक बेहद आधुनिक और विस्तृत कंप्यूटर मॉडल तैयार किया है। इस वैज्ञानिक मॉडल से एक बेहद डरावना सच सामने आया है। रिसर्च के मुताबिक, उष्णकटिबंधीय (ट्रॉपिकल) इलाकों यानी हमारे उपमहाद्वीप में हवा के चलने और घूमने का एक विशेष पैटर्न होता है। इस पैटर्न के कारण भारत-पाकिस्तान के युद्ध से पैदा होने वाला परमाणु कचरा, जहरीली गैसें और रेडियोएक्टिव धुआं वायुमंडल में बहुत ज्यादा ऊंचाई (स्ट्रैटोस्फीयर) तक पहुंच जाएगा। ऊंचाई पर होने के कारण यह खतरनाक कचरा सालों-साल वहीं टिका रहेगा और धीरे-धीरे पूरी पृथ्वी को अपने आगोश में ले लेगा। यह रिपोर्ट वैश्विक नेताओं और मानवता के लिए एक गंभीर चेतावनी है कि परमाणु युद्ध में कोई विजेता नहीं होता, बल्कि यह पूरी मानव सभ्यता के अंत का रास्ता है।

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