अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में भारी फेरबदल! चंपत राय के इस्तीफे के बाद अब कौन संभालेगा कमान, इस धाकड़ IAS अफसर को मिल सकती है कमान !

अयोध्या। रामनगरी अयोध्या से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है। राम मंदिर ट्रस्ट में चढ़ावा चोरी के मामले और आरोपियों के जेल जाने के बाद मचे हड़कंप के बीच अब एक बहुत बड़े पुनर्गठन की तैयारी चल रही है। इस पूरे मामले की जांच कर रही विशेष जांच दल (एसआईटी) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सौंप दी है। एसआईटी ने न केवल ट्रस्ट के ढांचे को पूरी तरह बदलने की बात कही है, बल्कि मंदिर की व्यवस्थाओं को पारदर्शी बनाने के लिए किसी वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी (IAS) को मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) नियुक्त करने की बड़ी सिफारिश की है। इस उठापटक के बीच आगामी 11 जुलाई को होने वाली ट्रस्ट की त्रैमासिक बैठक को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, जहां कई चौंकाने वाले फैसले हो सकते हैं।

पीएम मोदी के लौटते ही लगेगा सीईओ की नियुक्ति पर मुहर

सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार भी इस पूरे घटनाक्रम पर पैनी नजर बनाए हुए है। राम मंदिर ट्रस्ट में सीईओ की नियुक्ति को लेकर अंतिम फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वदेश लौटने के बाद लिया जा सकता है। पीएमओ इस मामले को लेकर बेहद गंभीर है, क्योंकि मामला सीधे तौर पर राम भक्तों की आस्था और मंदिर की पारदर्शिता से जुड़ा हुआ है।

चंपत राय समेत दो दिग्गजों का इस्तीफा, कोषाध्यक्ष ने की पुष्टि

इस पूरे विवाद के बीच सबसे बड़ा झटका तब लगा जब राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और अहम सदस्य डॉ. अनिल कुमार मिश्र को अपने पदों से हाथ धोना पड़ा। विभिन्न आरोपों, मीडिया ट्रायल और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) व विश्व हिंदू परिषद (VHP) के भारी दबाव के चलते पीएमओ के निर्देश पर दोनों ने अपने त्यागपत्र सौंप दिए हैं। ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंददेव गिरि ने सार्वजनिक रूप से इन इस्तीफों की पुष्टि कर दी है। उन्होंने बताया कि 11 जुलाई को होने वाली बैठक में इन इस्तीफों को आधिकारिक रूप से स्वीकार करने पर विचार किया जाएगा।

योगी सरकार के इस धाकड़ IAS अफसर को मिल सकती है कमान

एसआईटी की सिफारिश के बाद राम मंदिर के नए सीईओ की रेस में कई बड़े नाम तैर रहे हैं। पहले पूर्व रिटायर्ड आईएएस अधिकारी नृपेंद्र मिश्र का नाम चर्चा में था, लेकिन अब इस रेस में 2005 बैच के बेहद कड़क और पूर्व अयोध्या जिलाधिकारी योगेश्वर राम मिश्र का नाम सबसे आगे चल रहा है। योगेश्वर राम मिश्र वर्तमान में उत्तर प्रदेश राज्य लोकसेवा अधिकरण में सदस्य (प्रशासनिक) के पद पर तैनात हैं और उन्हें अयोध्या के मिजाज का पुराना अनुभव भी है। हालांकि, ट्रस्ट में सीईओ का पद लाने के लिए इसके उपविधि (बायलाज) में बड़ा बदलाव करना होगा, क्योंकि वर्तमान नियमावली में ऐसा कोई पद ही नहीं है।

खाली पड़े हैं तीन पद, बुजुर्ग ट्रस्टियों की जगह नए चेहरों की तैयारी

यदि 11 जुलाई की बैठक में चंपत राय और अनिल मिश्रा का इस्तीफा मंजूर हो जाता है, तो ट्रस्ट में अचानक तीन पद खाली हो जाएंगे। दरअसल, अयोध्या राज परिवार के मुखिया बिमलेंद्र मोहन प्रताप मिश्र के निधन के बाद से एक पद पहले से ही रिक्त चल रहा है। इसके अलावा, ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्यगोपालदास और वरिष्ठ सदस्य के. परासरण जैसे दिग्गज बढ़ती उम्र और स्वास्थ्य कारणों से अब जमीनी रूप से सक्रिय नहीं रह पा रहे हैं। वे बैठकों में भी सिर्फ ऑनलाइन माध्यम से जुड़ते हैं। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी पुनर्गठन में राम मंदिर के कार्यों को नई ऊर्जा और पारदर्शिता देने के लिए कई नए और युवा चेहरों को ट्रस्ट में एंट्री मिल सकती है।

 

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