अंतरराष्ट्रीय डेस्क ईरान के दिवंगत पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार (जनाजे) को लेकर अंतरराष्ट्रीय कूटनीति और सुरक्षा गलियारों में हलचल तेज हो गई है। उनके अंतिम संस्कार के कार्यक्रमों में दुनियाभर से लाखों लोगों और कई देशों के कूटनीतिक प्रतिनिधियों के जुटने की उम्मीद है। हालांकि, इस महा-आयोजन के बीच सबसे चौंकाने वाली खबर यह आ रही है कि अयातुल्ला खामेनेई के बेटे और ईरान के नवनियुक्त वर्तमान सुप्रीम लीडर मोजतबा खामेनेई के अपने ही पिता के जनाजे में शामिल होने की संभावना बेहद कम है। भारत में ईरान के सुप्रीम लीडर के आधिकारिक प्रतिनिधि आयतुल्ला हकीम इलाही ने इस बात की पुष्टि करते हुए बताया कि यह फैसला केवल और केवल बेहद कड़े सुरक्षा कारणों के चलते लिया जा रहा है।
इजरायली हत्या की धमकी और हवाई हमलों का गंभीर जोखिम
अयातुल्ला खामेनेई के निधन के बाद उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को ईरान का नया सुप्रीम लीडर चुना गया था। हालांकि, बीते 28 फरवरी को ईरान पर हुए भीषण अमेरिकी और इजरायली संयुक्त हमलों के बाद से मोजतबा को सार्वजनिक रूप से नहीं देखा गया है। आयतुल्ला हकीम इलाही के अनुसार, इजरायल की ओर से मिल रही लगातार धमकियां और खुफिया एजेंसियों की पैनी निगरानी इस फैसले की मुख्य वजह हैं।
भले ही हाल के दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच कुछ कूटनीतिक समझौते हुए हैं और बातचीत का दौर जारी है, लेकिन जमीनी स्तर पर सैन्य तनाव अब भी चरम पर है। हाल ही में इजरायल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने सार्वजनिक तौर पर मोजतबा खामेनेई को जान से मारने (हत्या) की सीधी धमकी दी थी, जिस पर ईरान ने कड़ा राजनयिक विरोध भी दर्ज कराया था। ऐसे में जनाजे के दौरान उनके सार्वजनिक रूप से सामने आने पर हवाई या ड्रोन हमले का बड़ा खतरा मंडरा रहा है।
28 फरवरी के हमले में खुद मोजतबा भी हुए थे घायल
गौर करने वाली बात यह है कि 28 फरवरी को हुए जिस अमेरिकी-इजरायली हमले में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हुई थी, उसी हमले की जद में आकर मोजतबा खामेनेई भी गंभीर रूप से जख्मी हो गए थे। खुफिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया था कि उनके चेहरे पर गहरे घाव और पैर में गंभीर चोटें आई थीं, जिसके बाद उनके स्वास्थ्य को लेकर अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। हालांकि, ईरानी सरकार और वहां के मीडिया ने इन दावों को खारिज करते हुए आधिकारिक बयान जारी किया है कि नए सुप्रीम लीडर मोजतबा अब पूरी तरह स्वस्थ और सुरक्षित हैं।
4 से 9 जुलाई तक ईरान के कई शहरों में चलेगा अंतिम संस्कार का कार्यक्रम
ईरान सरकार द्वारा जारी किए गए आधिकारिक शेड्यूल के मुताबिक, अयातुल्ला अली खामेनेई का अंतिम संस्कार 4 जुलाई से 9 जुलाई के बीच देश के विभिन्न ऐतिहासिक शहरों में बेहद राजकीय सम्मान के साथ संपन्न होगा:
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4 और 5 जुलाई: खामेनेई का पार्थिव शरीर राजधानी तेहरान के ग्रैंड मोसाला कॉम्प्लेक्स में आम जनता और श्रद्धालुओं के अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा।
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6 जुलाई: तेहरान की सड़कों पर विशाल अंतिम संस्कार जुलूस निकाला जाएगा। सुरक्षा और व्यवस्था को देखते हुए इस दिन प्रांत में पूरी तरह से सार्वजनिक अवकाश (Public Holiday) घोषित किया गया है।
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9 जुलाई: दिवंगत नेता के पार्थिव शरीर को उनके जन्मस्थान ‘मशहद’ ले जाया जाएगा, जहां उन्हें सुपुर्द-ए-खाक (अंतिम रूप से दफनाया) किया जाएगा।
पीएम मोदी के विदेशी दौरे के कारण भारत से जाएगा विशेष प्रतिनिधिमंडल
ईरान में होने वाले इस बड़े शोक समारोह के लिए भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) को पिछले सप्ताह ही आधिकारिक निमंत्रण प्राप्त हुआ था, जिसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को व्यक्तिगत रूप से आमंत्रित किया गया था। हालांकि, पीएम मोदी के पहले से तय 6 से 11 जुलाई के अनिवार्य विदेशी दौरे के कारण भारत सरकार ने इस समारोह में एक उच्च स्तरीय आधिकारिक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है।
भारतीय विदेश मंत्रालय की पुष्टि के मुताबिक, बिहार के माननीय राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) सैयद अता हसनैन और केंद्रीय विदेश राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भारत सरकार के आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में ईरान के इस राजकीय अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए रवाना होंगे।














